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नशीली दवाओं के खिलाफ शास्त्री मार्केट और किला में छापेमारी

Thu, 28 Jun 2018 12:34 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Thu, 28 Jun 2018 12:34 AM IST
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Narcotics dept raids shahtri market and kila
फेंसिडिल समेत अन्य नशीली दवाओं की अवैध बिक्री की लगातार मिल रही सूचनाओं पर बुधवार को ड्रग विभाग की टीम ने शास्त्री मार्केट दवा बाजार और किला में ट्रांसपोर्ट कंपनी पर छापामारी की। इस दौरान चार दवा एजेंसियों और एक ट्रांसपोर्ट कंपनी पर जांच की गई। जांच में तमाम अनियमितताएं पाई गईं। बड़ी तादात में दुकानों पर स्टॉक और बिक्री मिली, जिनका रिकॉर्ड व्यापारी पेश नहीं कर सके। इस पर संबंधित दवाओं का स्टॉक फ्रीज कर दिया गया। जांच गुरुवार को भी जारी रहेगी।
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बुधवार दोपहर ड्रग विभाग की बरेली, बदायूं और पीलीभीत की संयुक्त टीम ने शास्त्री मार्केट में छापा मारा। टीम में उर्मिला वर्मा, बबिता रानी और नवनीत कुमार शामिल थे। सबसे पहले टीम भारत ट्रेडर्स पर पहुंची। यहां पर टेबलेट स्पास्मो प्रॉक्सीवान, ट्राइका, अल्प्राजोलाम, सीरप कोडीस्टार और इंजेक्शन फीनोबार्बिटॉन का स्टॉक मिला, जिसे फ्रीज कर दिया गया। इसके बाद टीम मोहन ट्रेडर्स पर पहुंची। यहां खांसी की दवा कॉरेक्स, टॉसेक्स, एविल 25 समेत अन्य दवाइयों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि यहां 50 हजार बोतल का स्टॉक खरीदा गया था, लेकिन उसकी बिक्री का रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके पास ही साईं ट्रेडर्स पर ढाई महीने में 5,000 शीशी की खरीद का ऑर्डर मिला, लेकिन बिक्री रिकॉर्ड सिर्फ 546 का ही मिला। इसके बाद टीम केएलआरएल फार्मा प्राइवेट लिमिटेड पहुंची। यहां भी अन्य दुकानों जैसा हाल था। अलग-अलग बैच नंबर की फेंसिडिल सीरप 30 हजार शीशियां खरीदी गई थीं, दुकान में काफी स्टॉक भी था, लेकिन दवा व्यवसायी बिक्री का रिकॉर्ड पेश नहीं कर सके। टीम ने इन सभी एजेंसियों पर जिन दवाओं का रिकॉर्ड नहीं मिला, उसका स्टॉक फ्रीज कर दिया है।
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दो दवाओं के सैंपल भरे
ड्रग इंस्पेक्टर नवनीत कुमार ने जांच के दौरान भारत ट्रेडर्स से कोप टेबलेट और स्पास्मो प्रॉक्सीवान कैप्सूल के सैंपल भी भरे। स्पास्मो प्रॉक्सीवान कैप्सूल नशेड़ियों के बीच नीले कैप्सूल के रूप में जाना जाता है।
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रिकॉर्ड को लेकर बनाए तरह-तरह के बहाने
जांच के दौरान व्यापारियों ने रिकॉर्ड को लेकर तरह-तरह के बहाने बताए। किसी भी दुकान पर दवा बिक्री का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। किसी ने रिकॉर्ड ज्यादा होने पर घर में रखा होने की बात कही तो किसी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट के पास होने की बात कही। मगर टीम ने किसी के बहाने नहीं सुने। बृहस्पतिवार तक रिकॉर्ड पेश करने की बात कही।

कोल्ड चेन एवं एक्सपायर दवाओं की भी हुई जांच
जांच के दौरान टीम ने एजेंसियों के रेफ्रिजरेटर एवं ठंडे में रखी जाने वाली दवाइयों की भी जांच की। जांचा गया कि इन दवाइयों की कोल्ड चेन मेंटेन की गई है या नहीं। इसके अलावा एक्सपायर दवाओं का स्टॉक भी चेक किया गया।

पूजा रोडलाइंस पर फेंसिडिल सीरप के 347 गत्ते फ्रीज
ड्रग विभाग की टीम किला स्थित ट्रांसपोर्ट कंपनी पूजा रोडलाइंस पर भी पहुंची। कंपनी से जुड़े किशनलाल ने बताया कि पिछले दिनों छापेमारी के दौरान दिल्ली क्राइम ब्रांच उनका सारा रिकॉर्ड ले गई है। इसके चलते वह रिकॉर्ड नहीं उपलब्ध करा पा रहे हैं। इस पर टीम ने उनके यहां पड़े फेंसिडिल सीरप के 347 गत्ते का स्टॉक फ्रीज कर दिया। वहां से ही जानकारी मिली कि वह शहर में 11 एजेंसियों को यह दवाई सप्लाई करता है। उसके इनपुट के आधार पर ही बुधवार को शास्त्री मार्केट में कार्रवाई की गई। बता दें कि पूजा रोड लाइंस पर दिल्ली की क्राइम ब्रांच और केंद्रीय नारकोटिक्स की टीम ने छापा मारा था। यह कार्रवाई फेंसिडिल सीरप की अवैध बिक्री को लेकर की गई थी।

 

शराब से ज्यादा फेंसिडिल के दीवाने हैं नशेड़ी

टीम के मुताबिक खांसी की दवाई फेंसिडिल, कॉरेक्स आदि नशे के लिए भी इस्तेमाल की जाती हैं, क्योंकि इसमें नशीला पदार्थ कोडीन होता है। फार्मूला पुराना होने के कारण फेंसिडिल अब डॉक्टरों के बीच लोकप्रिय नहीं है, लेकिन इसका नशा करने वाले दीवाने बढ़ते जा रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, फेंसिडिल करीब 60-70 साल पुराना ब्रांड है। मार्केट में खांसी के लिए नए फार्मूले पर आधारित कई सीरप मौजूद हैं, इसलिए चिकित्सक इसे नहीं लिखते, मगर नशा करने वालों में इसकी अलग ही दीवानगी है। एक सीरप दो-तीन पैग का नशा देता है और सबसे खास बात यह कि इसका नशा अलग तरह का होता है। डॉ. सुदीप सरन बताते हैं कि एंटीहिस्टामिन ग्रुप की दवाओं में फेंसिडिल टॉप पर है। नशा करने वाले इसे ब्रेड और डबलरोटी पर लगाकर भी खाते हैं। यही वजह है कि अब फिजीशियन किसी भी मरीज के लिए फेंसिडिल या कॉरेक्स नहीं लिखते।

बांग्लादेश तक हो रही ब्लैकमार्केटिंग
फेंसिडिल सीरप स्टॉकिस्ट को 70 रुपये में मिलता है और 85 रुपये में स्थानीय बाजार में बेचा जाता है। इससे बड़ा खेल बांग्लादेश के बाजार में इसकी खपत है। सूत्रों के मुताबिक, बरेली के करीब दर्जन भर थोक दवा व्यापारी इसके कारोबार में लिप्त हैं जो फेंसिडिल का बड़ी तादात में स्टॉक मंगाकर यहां से लखनऊ, कलकत्ता और पश्चिम बंगाल के जरिये बांग्लादेश सप्लाई करते हैं। बांग्लादेश में इसकी बड़ी डिमांड है और वहां यह 400 रुपये तक में बिकता है, इसके चलते अवैध कारोबार करने वालों को मोटा मुनाफा होता है। कई बार तो स्टॉक मंगाने के बाद दुकानदार इसे ट्रांसपोर्ट से उठाने के बजाय सीधे बाहर भेज देते हैं।
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