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अवैध कॉलोनी वाले टैक्स दें निगम उन्हें सुविधाएं देगा

Mon, 02 Apr 2018 06:32 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Mon, 02 Apr 2018 06:32 PM IST
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Pay tax and we will provide amenties
टैक्स दरें कम होने से होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए नगर निगम ने रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। नगर निगम की नजर अब शहर के चारों ओर नई बसी अवैध कॉलोनियों पर है। बीडीए बेशक इनका नियमितीकरण नहीं कर सका है लेकिन निगम इनसे टैक्स वसूली की तैयारी कर रहा है। इन सभी कॉलोनियों के प्रत्येक घर को टैक्स की श्रेणी में लाया जाएगा ताकि वहां विकास कार्य कराए जा सकें।
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वर्ष 1998 में नगर निगम और बीडीए ने सर्वे कराया था, जिसमें शहर के चारों ओर 197 अवैध कॉलोनियां चिह्नित की गई थीं। यह कॉलोनियां बदायूं रोड, पीलीभीत बाईपास, मिनी बाईपास, सीबीगंज, लाल फाटक आदि इलाकों में बसी हैं। इनमें से कुछ कॉलोनियों में नगर निगम ने विकास कार्य कराए हैं तो कुछ में विकास कार्यों की शिकायतें आती रहती हैं। मगर इन कॉलोनियों से नगर निगम को कोई टैक्स नहीं मिलता है। नगर निगम चूंकि टैक्स में 35 से 50 प्रतिशत तक की छूट देने जा रहा है, लिहाजा इससे राजस्व में और ज्यादा कमी आ जाएगी। इसकी भरपाई के लिए नगर निगम इन अवैध कॉलोनियों से टैक्स वसूलने की योजना बना रहा है। इसके लिए एक निजी एजेंसी के साथ नगर निगम की टीम सर्वे करके प्रत्येक घर को टैक्स के दायरे में लाएगी। इससे नगर निगम को जो आय होगी, उसी धनराशि से इन कॉलोनियों में विकास कार्य कराए जाएंगे।
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बीडीए से पहले निगम ने बाजी मारी
शहर में इन अवैध कालोनियों की पैदाइश बीडीए से साठगांठ कर हुई है। इसलिए इनमें न तो कोई इंफ्रास्ट्रक्चर है और न कोई कुछ सुविधाएं। लंबे समय से इनके नियमितीकरण की बात चल रही है लेकिन बीडीए आज तक कुछ नहीं कर सका। इसी बीच नगर निगम ने इनसे कमाई और उसी कमाई से उन्हें विकसित करने की तैयारी करके बाजी मार ली है।
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चार श्रेणियों के बजाय वार्ड वाइज होगा टैक्स का वर्गीकरण
नगर निगम ने टैक्स कम करने के लिए वर्ष 2007 की किराया दरों में दस प्रतिशत बढ़ोत्तरी करने की योजना बनाई है। उस समय टैक्स का वर्गीकरण श्रेणी के अनुसार होता था। शहर की कॉलोनियों को चार श्रेणी में बांटा गया था और उसी आधार पर किराया दरें निर्धारित की गई थीं। इसके बाद टैक्स का वर्गीकरण वार्ड के आधार पर होने लगा। अब टैक्स दरों में बदलाव हो रहा है तो इसे भी वार्ड के आधार पर ही वर्गीकृत किया जाएगा। हर वार्ड में कॉलोनियों की तीन श्रेणी होंगी।


कोई भी कॉलोनी अगर नगर निगम क्षेत्र में बनी हुई है तो उसमें रहने वालों को टैक्स देना पड़ेगा। इसके लिए सर्वे किया जाएगा और दो सौ से अधिक ऐसी कॉलोनियों को टैक्स दायरे में लाया जाएगा, जहां से अब तक टैक्स नहीं मिलता है। - राजेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त
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