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चुनिंदा प्रोफेसर युवाओं में तराशेंगे शोध का हुनर
Updated Sun, 09 Jul 2017 01:31 AM IST
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university
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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बरेली।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने बेसिक साइंस रिसर्च फेलोशिप (बीएसआर) के तहत विश्वविद्यालयों में शोध का माहौल विकसित करने और युवा शोधकर्ताओं में हुनर तराशने की पहल की है। इस फेलोशिप के लिए प्रदेश से पंद्रह प्रोफेसर चुने गए हैं, जिसमें एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्लांट साइंस के सेवानिवृत्त प्रोफेसर व पूर्व प्रति कुलपति रहे वीपी सिंह को भी चुना गया है। यहां बता दें कि उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में से वीपी सिंह इकलौते प्रोफेसर हैं, जिनको इस फेलोशिप के लिए चुना गया है।
यूजीसी की तरफ से जारी पत्र में दो शर्तों को प्रमुखता से जोड़ा गया है जिसमें कैंपस में शोध का माहौल विकसित करने और युवा शोधकर्ताओं में शोध का हुनर विकसित करने की जिम्मेदारी इन पर रहेगी। इसके अलावा ये शोध से जुड़ी क्लॉसेज भी लेंगे। प्रोफेसर वीपी सिंह ने इस बाबत सभी विभागों का पत्र भी जारी किया है।
प्रोफेसर वीपी सिंह ने बताया कि नाइट्रो एरोमेटिक्स कंपाउंड को तोड़ने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया था, जिसके लिए उनको यह फेलाशिप मिली है। इसके तहत वह डाई, कीटनाशक, दवाइयां, इंडस्ट्रियल केमिकल्स से निकलने वाले हानिकारक केमिकल और उनके खात्मे के तरीके खोजेंगे। ऐसे वैक्टीरिया पर शोध शुरू कर दिया गया है।
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पीएचडी करने वालों को मिलेगी मदद
विवि कैंपस सहित संबद्ध कॉलेजों में पीएचडी का कार्य शुरू हो गया है। युवा शोधकर्ताओं को शोध से जुड़ी बारीकियां प्रोफेसर वीपी सिंह बताएंगे। इसके अलावा डिपार्टमेंट के जो शिक्षक शोध करना चाहते हैं वह भी उनकी मदद ले सकते हैं। केवल विवि कैंपस ही नहीं बल्कि कॉलेज के शोधकर्ता भी उनसे मदद ले सकते हैं।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने बेसिक साइंस रिसर्च फेलोशिप (बीएसआर) के तहत विश्वविद्यालयों में शोध का माहौल विकसित करने और युवा शोधकर्ताओं में हुनर तराशने की पहल की है। इस फेलोशिप के लिए प्रदेश से पंद्रह प्रोफेसर चुने गए हैं, जिसमें एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्लांट साइंस के सेवानिवृत्त प्रोफेसर व पूर्व प्रति कुलपति रहे वीपी सिंह को भी चुना गया है। यहां बता दें कि उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में से वीपी सिंह इकलौते प्रोफेसर हैं, जिनको इस फेलोशिप के लिए चुना गया है।
यूजीसी की तरफ से जारी पत्र में दो शर्तों को प्रमुखता से जोड़ा गया है जिसमें कैंपस में शोध का माहौल विकसित करने और युवा शोधकर्ताओं में शोध का हुनर विकसित करने की जिम्मेदारी इन पर रहेगी। इसके अलावा ये शोध से जुड़ी क्लॉसेज भी लेंगे। प्रोफेसर वीपी सिंह ने इस बाबत सभी विभागों का पत्र भी जारी किया है।
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प्रोफेसर वीपी सिंह ने बताया कि नाइट्रो एरोमेटिक्स कंपाउंड को तोड़ने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया था, जिसके लिए उनको यह फेलाशिप मिली है। इसके तहत वह डाई, कीटनाशक, दवाइयां, इंडस्ट्रियल केमिकल्स से निकलने वाले हानिकारक केमिकल और उनके खात्मे के तरीके खोजेंगे। ऐसे वैक्टीरिया पर शोध शुरू कर दिया गया है।
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पीएचडी करने वालों को मिलेगी मदद
विवि कैंपस सहित संबद्ध कॉलेजों में पीएचडी का कार्य शुरू हो गया है। युवा शोधकर्ताओं को शोध से जुड़ी बारीकियां प्रोफेसर वीपी सिंह बताएंगे। इसके अलावा डिपार्टमेंट के जो शिक्षक शोध करना चाहते हैं वह भी उनकी मदद ले सकते हैं। केवल विवि कैंपस ही नहीं बल्कि कॉलेज के शोधकर्ता भी उनसे मदद ले सकते हैं।