{"_id":"5c86c531bdec22142f019f17","slug":"51552336177-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोडिंग तोड़ने की फिराक में नकल माफिया, काट रहे विश्वविद्यालय के चक्कर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोडिंग तोड़ने की फिराक में नकल माफिया, काट रहे विश्वविद्यालय के चक्कर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की परीक्षाओं का मूल्यांकन होली के बाद शुरू होगा, लेकिन कुछ नकल माफिया कोडिंग व्यवस्था में सेंधमारी की तैयारी में अभी से जुट गए हैं। दरअसल, कोेडिंग व्यवस्था की जानकारी जुटाने के लिए कुछ लोग विश्वविद्यालय कैंपस पहुंच गए, जिसकी भनक अधिकारियों को लग गई। इसके बाद सब सतर्क हो गए हैं। कोडिंग सेंटर पर किसी भी बाहरी को न जाने देने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार परीक्षा में सख्ती हो रही है तो पास कराने का ठेका लिए बैठे नकल माफिया सीधे मूल्यांकन में सेटिंग करना चाहते हैं।
पूर्व में इस तरह के कई मामले सामने भी आ चुके हैं। नकल माफिया विश्वविद्यालय में मूल्यांकन तक सेटिंग का खेल करते हैं। विश्वविद्यालय कैंपस के कुछ शिक्षकों की मानें तो मूल्यांकन से पहले ही कुछ कॉलेज के लोगों की कैंपस में आवाजाही बढ़ गई है। वे यहीं से मूल्यांकन केंद्र से जुड़ने वालों की जानकारी जुटाते हैं और बाद में सारा खेल होता है। नकल माफिया की चिंता इस बार इसलिए बढ़ गई हैं क्योंकि मूल्यांकन विभागों में न होकर परीक्षा भवन और नेहरू युवा केंद्र में हो रहा है। सीसीटीवी की निगरानी में मूल्यांकन होगा तो उनकी दाल नहीं गलने वाली, हालांकि कुछ परीक्षकों से सेटिंग कर वे पूरा खेल कर सकते हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारियों को इसकी भनक भी लग गई है। मूल्यांकन केंद्र और कोडिंग सेंटर में बाहरी लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार का कहना है कि मूल्यांकन केंद्रों पर सिर्फ परीक्षक ही जाएंगे। कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं जा सकेगा।
निशानी बनाकर पहचानी जाती है कॉपी
कई मामलों में कॉपी पर कोई निशानी बनाकर उसकी पहचान कराई जाती है। कुछ नकल माफिया ने कोड बना रखे हैं जो परीक्षकों तक पहुंचाए जाते हैं। कोडिंग होने से पता नहीं चलता कि कॉपी किस कॉलेज की है, लेकिन निशानी से पता चल जाता है कि कॉपी कहां की है। परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि कोडिंग वालों को पहले से ही निर्देश दे दिए है कि अगर किसी कॉपी पर निशान हो तो उसको अलग कर दें।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्व में इस तरह के कई मामले सामने भी आ चुके हैं। नकल माफिया विश्वविद्यालय में मूल्यांकन तक सेटिंग का खेल करते हैं। विश्वविद्यालय कैंपस के कुछ शिक्षकों की मानें तो मूल्यांकन से पहले ही कुछ कॉलेज के लोगों की कैंपस में आवाजाही बढ़ गई है। वे यहीं से मूल्यांकन केंद्र से जुड़ने वालों की जानकारी जुटाते हैं और बाद में सारा खेल होता है। नकल माफिया की चिंता इस बार इसलिए बढ़ गई हैं क्योंकि मूल्यांकन विभागों में न होकर परीक्षा भवन और नेहरू युवा केंद्र में हो रहा है। सीसीटीवी की निगरानी में मूल्यांकन होगा तो उनकी दाल नहीं गलने वाली, हालांकि कुछ परीक्षकों से सेटिंग कर वे पूरा खेल कर सकते हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारियों को इसकी भनक भी लग गई है। मूल्यांकन केंद्र और कोडिंग सेंटर में बाहरी लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार का कहना है कि मूल्यांकन केंद्रों पर सिर्फ परीक्षक ही जाएंगे। कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं जा सकेगा।
विज्ञापन
निशानी बनाकर पहचानी जाती है कॉपी
कई मामलों में कॉपी पर कोई निशानी बनाकर उसकी पहचान कराई जाती है। कुछ नकल माफिया ने कोड बना रखे हैं जो परीक्षकों तक पहुंचाए जाते हैं। कोडिंग होने से पता नहीं चलता कि कॉपी किस कॉलेज की है, लेकिन निशानी से पता चल जाता है कि कॉपी कहां की है। परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि कोडिंग वालों को पहले से ही निर्देश दे दिए है कि अगर किसी कॉपी पर निशान हो तो उसको अलग कर दें।
विज्ञापन