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राइफल क्लब : बंदूकों की खरीद में भी ‘निशानेबाजी’

Sat, 29 Dec 2018 01:51 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Sat, 29 Dec 2018 01:51 AM IST
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राइफल क्लब : बंदूकों की खरीद में भी ‘निशानेबाजी’
बरेली। राइफल क्लब की अव्यवस्थाओं को लेकर शूटर और संरक्षकों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। शूटर्स ने प्रैक्टिस के लिए मंगाई गई मशीनों और बंदूकों की खरीद में गोलमाल का आरोप लगाया है। क्लब की कार्यकारिणी के चुनाव की मांग को लेकर शूटर्स की ओर से केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर को पत्र भेजा गया है। उसमें शूटर्स ने साफ कहा है कि 30 साल से कमेटी का चुनाव न होने से क्लब की कार्यकारिणी में नेता एवं उनके परिवारों के लोग हावी हैं। उनको शूटिंग या शूटर्स की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है। चुनाव कराकर ऐसे कार्यकारिणी सदस्य बनाए जाएं, जो स्वयं शूटर रह चुके हों या फिर उनकी सामाजिक पहचान हो।
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राइफल क्लब के शूटर्स की ओर से खेल मंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि प्रैक्टिस में किसी खिलाड़ी को क्लब की ओर से कोई सहयोग नहीं दिया जाता है। राजनैतिक प्रभाव वाले कार्यकारिणी सदस्य शूटिंग को प्रोत्साहन नहीं दे रहे हैं, न ही उनको शूटिंग की ‘एबीसीडी’ पता है। शूटर अपने स्तर से आर्थिक तंगी के बीच प्रैक्टिस करते हैं। इसी वजह से आर्थिक रूप से कमजोर शूटर्स की प्रतिभा निखर नहीं पा रही है। शूटर दानिश अहमद ने आरोप लगाया कि राइफल क्लब ने पांच साल में 20 लाख रुपये में दो 12 बोर की बंदूकें और पांच सुपर हॉक कंपनी की मशीनें खरीदीं, इनकी ऑनलाइन कीमत 50 हजार से अधिक नहीं हैं। पांच साल में किसी भी शूटर को यह बंदूकें प्रैक्टिस के लिए नहीं दी गईं। यदि कोई शूटर किसी प्रतियोगिता के लिए क्लब में जाता है तो उससे पांच लाख रुपये सिक्योरिटी जमा करने को कहा जाता है। शूटर अपने पैसे खर्च कर प्रैक्टिस करते हैं। तब प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले पाते हैं।
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30 साल में कितने शूटर बनाए
शूटरों ने राजनीतिक ताकत से क्लब कार्यकारिणी में मेंबर बने सदस्यों से पूछा कि वह बताएं कि 30 साल में उन्होंने राइफल क्लब में कितने शूटर पैदा किए? कितने पुराने शूटरों को सुविधाएं देकर आगे बढ़ाया गया। अगर नेता शूटिंग के क्षेत्र में कोई काम नहीं कर सकते तो उनको क्लब की मेंबरशिप तत्काल छोड़ देनी चाहिए। कार्यकारिणी में वही मेंबर रखे जाएं, जिनको शूटिंग की जानकारी हो और वह शूटर्स के लिए बेहतर काम करें। नेताओं को राइफल क्लब से बाहर किया जाना चाहिए।
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राइफल क्लब के संबंध में जो भी शिकायतें आ रही हैं, उन्हें शासनादेश और बॉयलाज के नियमों के मुताबिक हल कराया जाएगा। शूटर्स की समस्या भी प्राथमिकता से हल कराई जाएगी। - अशोक कुमार शुक्ला, सिटी मजिस्ट्रेट
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