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नकली हेलमेट अब बचाएगा नहीं कटवाएगा चालान
Updated Thu, 09 Aug 2018 01:14 AM IST
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चालान काटे जाने से बचाने वाला नकली हेलमेट अब चालान कटवाएगा। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी आरपी सिंह ने इस बाबत जारी आदेश में कहा है कि चेकिंग के दौरान जिन लोगों के पास ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ‘बीआईएस’ मानक के अनुसार इंडियन स्टैंडर्ड इंस्टीट्यूट ‘आईएसआई’ मार्क का हेलमेट नहीं होगा उनका चालान कटेगा। यह आदेश हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका के एक केस की सुनवाई के दौरान हुए फैसले के बाद जारी हुआ है, जिसमें नकली हेलमेट बेचने और पहनने वाले पर कार्रवाई करने को कहा गया है।
बता दें कि शहर के सैटेलाइट, सिटी स्टेशन, चौकी चौराहा और अय्यूब खां चौराहा समेत रामपुर रोड की सड़कों पर नकली आईएसआई मार्का वाला और घटिया हेलमेट धड़ल्ले से बिक रहे हैं। चौराहों पर मौजूद पुलिसकर्मियों को इस बात की ज्यादा चिंता नहीं है कि कौन से बाइक सवार ने असली पहना या नकली हेलमेट पहन रखा है। बस सिर पर हेलमेट लगा दिखना चाहिए।
क्या कहते हैं आंकड़े
थानों में दर्ज हुई दुर्घटना की रिपोर्ट के अनुसार सड़क हादसों में घायल व मृतक 100 वाहन चालकों में 40 फीसदी बिना हेलमेट के होते हैं। शेष 60 फीसदी वाहन चालकों में से आधे से अधिक ऐसे चालक होते हैं, जिन्होंने सस्ता हेलमेट पहना होता है। सस्ते हेलमेट के चक्कर में लगातर जान जाने के बाद भी लोग इस दिशा में जागरूक नहीं हो रहे हैं।
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नकली हेलमेट की पहचान
नकली हेलमेट चौराहों पर अथवा सड़क के किनारे सौ से ढाई सौ रुपये में मिल जाते हैं। ऐसे हेलमेट पर किसी कंपनी का नाम नहीं होता। आईएसआई मार्क भी अजीब सा दिखेगा। इसकी प्रिंटिंग भी ठीक नहीं होगी। यह हेलमेट प्लास्टिक अथवा फाइबर का बना होने से काफी हल्का होता है। खरीदरारी की कोई रसीद और गारंटी नहीं मिलती।
ब्रांडेड हेलमेट की जांच
कंडीशनिंग टेस्ट - हेलमेट को 50 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और न्यूनतमतापमान पर रखा जाता है।
अल्ट्रावायलेट रेडिएशन चेक - 48 घंटे तक 125 वाट के जिनोफाइड लैंप की रोशनी में रखा जाता है।
नमी का परीक्षण - चार घंटे पानी के तेज बहाव में रखा जाता है।
आघात परीक्षण - पांच किलोग्राम का भार ढाई मीटर की ऊंचाई से पूरी ताकत से डाला जाता है।
नोट- प्राप्त आंकड़े ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड वेबसाइट के अनुसार हैं।
हाईकोर्ट में दर्ज जनहित याचिका में आए एक फैसले के बाद ट्रैफिक रेग्यूलेटरी संबंधी विभागों को नकली हेलमेट पहनने वालों का चालान काटने का आदेश दिया है। नकली हेलमेट पहनना या बेचना अपराध की श्रेणी में आता है।
- आरपी सिंह, एआरटीओ
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बता दें कि शहर के सैटेलाइट, सिटी स्टेशन, चौकी चौराहा और अय्यूब खां चौराहा समेत रामपुर रोड की सड़कों पर नकली आईएसआई मार्का वाला और घटिया हेलमेट धड़ल्ले से बिक रहे हैं। चौराहों पर मौजूद पुलिसकर्मियों को इस बात की ज्यादा चिंता नहीं है कि कौन से बाइक सवार ने असली पहना या नकली हेलमेट पहन रखा है। बस सिर पर हेलमेट लगा दिखना चाहिए।
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क्या कहते हैं आंकड़े
थानों में दर्ज हुई दुर्घटना की रिपोर्ट के अनुसार सड़क हादसों में घायल व मृतक 100 वाहन चालकों में 40 फीसदी बिना हेलमेट के होते हैं। शेष 60 फीसदी वाहन चालकों में से आधे से अधिक ऐसे चालक होते हैं, जिन्होंने सस्ता हेलमेट पहना होता है। सस्ते हेलमेट के चक्कर में लगातर जान जाने के बाद भी लोग इस दिशा में जागरूक नहीं हो रहे हैं।
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नकली हेलमेट की पहचान
नकली हेलमेट चौराहों पर अथवा सड़क के किनारे सौ से ढाई सौ रुपये में मिल जाते हैं। ऐसे हेलमेट पर किसी कंपनी का नाम नहीं होता। आईएसआई मार्क भी अजीब सा दिखेगा। इसकी प्रिंटिंग भी ठीक नहीं होगी। यह हेलमेट प्लास्टिक अथवा फाइबर का बना होने से काफी हल्का होता है। खरीदरारी की कोई रसीद और गारंटी नहीं मिलती।
ब्रांडेड हेलमेट की जांच
कंडीशनिंग टेस्ट - हेलमेट को 50 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और न्यूनतमतापमान पर रखा जाता है।
अल्ट्रावायलेट रेडिएशन चेक - 48 घंटे तक 125 वाट के जिनोफाइड लैंप की रोशनी में रखा जाता है।
नमी का परीक्षण - चार घंटे पानी के तेज बहाव में रखा जाता है।
आघात परीक्षण - पांच किलोग्राम का भार ढाई मीटर की ऊंचाई से पूरी ताकत से डाला जाता है।
नोट- प्राप्त आंकड़े ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड वेबसाइट के अनुसार हैं।
हाईकोर्ट में दर्ज जनहित याचिका में आए एक फैसले के बाद ट्रैफिक रेग्यूलेटरी संबंधी विभागों को नकली हेलमेट पहनने वालों का चालान काटने का आदेश दिया है। नकली हेलमेट पहनना या बेचना अपराध की श्रेणी में आता है।
- आरपी सिंह, एआरटीओ