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तेज छक्के का गुर बता गए आस्ट्रेलियाई कोच
Updated Sat, 15 Jul 2017 01:12 AM IST
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बरेली।
भारत में अभी भी ट्रेडिशनल क्रिकेट ही सिखाया जाता है। इसमें नई तकनीक आने में अभी कई साल लगेंगे। जैसे बेसबॉल तकनीक और ऑनलाइन फिटनेस कोचिंग। वेस्टर्न आस्ट्रेलिया क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी व कोच गैरी मार्टिन ने बरेली में क्रिकेट सीख रहे बच्चों को यही बताया। कहा कि बच्चे हाई परफारमेंस वर्कआउट करें और यू ट्यूब पर वीडियो देखें।
तीन दिन की बरेली यात्रा पर रहे आस्ट्रेलिया के गैरी मार्टिन और खिलाड़ी टॉम कोल ने खिलाड़ियों को खूब टिप्स दिए। फिजिकल ट्रेनिंग, बल्लेबाजी, फिल्डिंग और बॉलिंग की बेसिक जानकारी दी। हालांकि यह इतनी बारीक जानकारी थी कि बच्चों ने इसे नया बताया है।
ब्रोसिड स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के सहयोग से बरेली आए मार्टिन ने डोरी लाल अग्रवाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में भी बच्चों की एक दिन की क्लास ली। उन्हाेंने बताया कि बेसबॉल तकनीक से डाउन स्विंग बैट चलाने में काफी मदद मिलती है। इससे तेज छक्के लगते हैं। यह आज के टी-ट्वेंटी जैसे फटाफट क्रिकेट के लिए जरूरी है। उन्हाेंने बताया कि इंडिया में अभी यह तकनीक नहीं है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में इसके क्लब चल रहे हैं, जहां बेसबॉल ट्रेनिंग का क्रिकेट में प्रयोग हो रहा है।
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खाने के स्वाद के हुए मुरीद
तीन दिन बरेली में रहे विदेशी मेहमानों को देसी खाना परोसा गया। रोटी, चिकन बिरयानी के अलावा कोरमा का स्वाद भी आस्ट्रेलियाई क्रिकेट पदाधिकारियाें को खूब पसंद आया। महफूज खान ने इनकी मेहमान नवाजी में कोई कमी नहीं रखी। ब्रोसिड के सौरभ भांबरी ने बताया कि बच्चे काफी अच्छा अनुभव बता रहे हैं।
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भारत में अभी भी ट्रेडिशनल क्रिकेट ही सिखाया जाता है। इसमें नई तकनीक आने में अभी कई साल लगेंगे। जैसे बेसबॉल तकनीक और ऑनलाइन फिटनेस कोचिंग। वेस्टर्न आस्ट्रेलिया क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी व कोच गैरी मार्टिन ने बरेली में क्रिकेट सीख रहे बच्चों को यही बताया। कहा कि बच्चे हाई परफारमेंस वर्कआउट करें और यू ट्यूब पर वीडियो देखें।
तीन दिन की बरेली यात्रा पर रहे आस्ट्रेलिया के गैरी मार्टिन और खिलाड़ी टॉम कोल ने खिलाड़ियों को खूब टिप्स दिए। फिजिकल ट्रेनिंग, बल्लेबाजी, फिल्डिंग और बॉलिंग की बेसिक जानकारी दी। हालांकि यह इतनी बारीक जानकारी थी कि बच्चों ने इसे नया बताया है।
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ब्रोसिड स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के सहयोग से बरेली आए मार्टिन ने डोरी लाल अग्रवाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में भी बच्चों की एक दिन की क्लास ली। उन्हाेंने बताया कि बेसबॉल तकनीक से डाउन स्विंग बैट चलाने में काफी मदद मिलती है। इससे तेज छक्के लगते हैं। यह आज के टी-ट्वेंटी जैसे फटाफट क्रिकेट के लिए जरूरी है। उन्हाेंने बताया कि इंडिया में अभी यह तकनीक नहीं है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में इसके क्लब चल रहे हैं, जहां बेसबॉल ट्रेनिंग का क्रिकेट में प्रयोग हो रहा है।
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खाने के स्वाद के हुए मुरीद
तीन दिन बरेली में रहे विदेशी मेहमानों को देसी खाना परोसा गया। रोटी, चिकन बिरयानी के अलावा कोरमा का स्वाद भी आस्ट्रेलियाई क्रिकेट पदाधिकारियाें को खूब पसंद आया। महफूज खान ने इनकी मेहमान नवाजी में कोई कमी नहीं रखी। ब्रोसिड के सौरभ भांबरी ने बताया कि बच्चे काफी अच्छा अनुभव बता रहे हैं।