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Bareilly News: 487 स्कूलों ने एक ही दुकान से दिखाई खरीदारी, डेढ़ माह से अटकी जांच
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बरेली। जिले के 487 परिषदीय स्कूलों ने स्मार्ट क्लास और दूसरी सुविधाओं के लिए जारी 38-38 हजार रुपये के बजट से इन्वर्टर, बैटरी, स्टेबलाइजर आदि की खरीदारी की। इन सभी स्कूलों ने एक ही दुकान से खरीदारी दिखाई।
इस पर सवाल उठे तो डीएम के आदेश पर जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई, लेकिन डेढ़ माह बाद भी यह जांच आगे नहीं बढ़ सकी है। अब तक रिपोर्ट नहीं आने से जांच पर भी सवाल खड़े हाे रहे हैं।
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ (यूटा) की ओर से की गई शिकायत के मुताबिक, मार्च में शासन ने जिले के 487 स्कूलों में आईटीसी लैब और स्मार्ट क्लास के संचालन के लिए ग्रांट जारी की थी। इन विद्यालयों में करीब चार करोड़ रुपये के सामान की खरीद दिखाई गई है। आरोप है कि प्रधानाध्यापकों की जानकारी के बिना ही विद्यालयों के नाम से बिल तैयार कराए जा रहे हैं। पीएफएमएस जनरेट होने से पहले ही बिल बनाकर प्रधानाध्यापकों को दिए जा रहे हैं।
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आरोप है कि शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे उन्हीं फर्मों से सामग्री की आपूर्ति दिखाएं, जिनके बिल उन्हें दिए गए हैं। डीएम के आदेश पर सीडीओ ने मामले की जांच के लिए पीडी डीआरडीए, डीआईओएस और एएओ की तीन सदस्यीय समिति गठित की है, लेकिन डेढ़ माह बीतने के बाद भी यह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
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इस पर सवाल उठे तो डीएम के आदेश पर जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई, लेकिन डेढ़ माह बाद भी यह जांच आगे नहीं बढ़ सकी है। अब तक रिपोर्ट नहीं आने से जांच पर भी सवाल खड़े हाे रहे हैं।
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उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ (यूटा) की ओर से की गई शिकायत के मुताबिक, मार्च में शासन ने जिले के 487 स्कूलों में आईटीसी लैब और स्मार्ट क्लास के संचालन के लिए ग्रांट जारी की थी। इन विद्यालयों में करीब चार करोड़ रुपये के सामान की खरीद दिखाई गई है। आरोप है कि प्रधानाध्यापकों की जानकारी के बिना ही विद्यालयों के नाम से बिल तैयार कराए जा रहे हैं। पीएफएमएस जनरेट होने से पहले ही बिल बनाकर प्रधानाध्यापकों को दिए जा रहे हैं।
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आरोप है कि शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे उन्हीं फर्मों से सामग्री की आपूर्ति दिखाएं, जिनके बिल उन्हें दिए गए हैं। डीएम के आदेश पर सीडीओ ने मामले की जांच के लिए पीडी डीआरडीए, डीआईओएस और एएओ की तीन सदस्यीय समिति गठित की है, लेकिन डेढ़ माह बीतने के बाद भी यह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।