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शिकायतकर्ता दुकानदारों के ‘गायब’ होने से पोर्टेबल शॉप की जांच को झटका
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बरेली। जिला पंचायत रोड पर पोर्टेबल शॉप के हटने के साथ ही दुकानदारों के ‘गायब’ हो जाने से मामले में फर्जीवाड़ा की जांच को भी झटका लगा है। दुकानदारों ने आरोप लगाया था कि दुकानों को रखने के नाम पर नगर निगम के एक ठेकेदार ने उनसे एक-एक लाख रुपये की उगाही की थी। सिटी मजिस्ट्रेट ने दुकानदारों के बयान लेेते हुए रिकॉर्डिंग भी की थी। बताते हैं कि जांच को प्रभावित करने के लिए ही दबाव डालकर वहां से दुकानदारों को हटा दिया गया है।
जिला पंचायत रोड पर पीडब्ल्यूडी की जमीन पर अवैध तरीके से 70 पोर्टेबल शॉप रख दी गई थीं। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने इन दुकानों का आवंटन नगर निगम से न होने का खुलासा किया था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन हरबंश सिंह ने भी दुकानों का हटाने का नोटिस भी भेजा था। मामले की जांच कर रहे सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने इंदिरानगर और जिला पंचायत रोड पर रखी पोर्टेबल शॉप के दुकानदारों के बयान लिए थे। तमाम दुकानदारों ने यह आरोप लगाया था कि नगर निगम के एक ठेकेदार ने पोर्टेबल शॉप रखने के नाम पर एक-एक लाख रुपये की वसूली की थी। जबकि दुकानों के आवंटन संबंधी कोई भी कागज उनके पास नहीं है। दुकानदारों ने यह भी शिकायत की थी कि मनमाने तरीके से बाहरी वेंडर्स को भी ये दुकानें दे दी गई हैं। ये आरोप पोर्टेबल शॉप के प्रकरण की जांच में महत्वपूर्ण थे। जबकि यह मामला गर्म होने के साथ ही जिला पंचायत रोड की पोर्टेबल दुकानें और वेंडर्स एक-एक कर ‘गायब’ हो गए हैं। बताते हैं कि पोर्टेबल शॉप का पर्दाफाश हो जाने के बाद दुकानदारों को दबाव डालकर हटा दिया गया है।
जांच में जो भी तथ्य सामने आए हैं, उसके आधार पर ही जांच रिपोर्ट बननी है। यह सही है कि शिकायतकर्ता दुकानदार अगर दोबारा पेश नहीं हुए तो यह जानना मुश्किल होगा कि उनके साथ वसूली किसने की थी। - संजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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जिला पंचायत रोड पर पीडब्ल्यूडी की जमीन पर अवैध तरीके से 70 पोर्टेबल शॉप रख दी गई थीं। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने इन दुकानों का आवंटन नगर निगम से न होने का खुलासा किया था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन हरबंश सिंह ने भी दुकानों का हटाने का नोटिस भी भेजा था। मामले की जांच कर रहे सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने इंदिरानगर और जिला पंचायत रोड पर रखी पोर्टेबल शॉप के दुकानदारों के बयान लिए थे। तमाम दुकानदारों ने यह आरोप लगाया था कि नगर निगम के एक ठेकेदार ने पोर्टेबल शॉप रखने के नाम पर एक-एक लाख रुपये की वसूली की थी। जबकि दुकानों के आवंटन संबंधी कोई भी कागज उनके पास नहीं है। दुकानदारों ने यह भी शिकायत की थी कि मनमाने तरीके से बाहरी वेंडर्स को भी ये दुकानें दे दी गई हैं। ये आरोप पोर्टेबल शॉप के प्रकरण की जांच में महत्वपूर्ण थे। जबकि यह मामला गर्म होने के साथ ही जिला पंचायत रोड की पोर्टेबल दुकानें और वेंडर्स एक-एक कर ‘गायब’ हो गए हैं। बताते हैं कि पोर्टेबल शॉप का पर्दाफाश हो जाने के बाद दुकानदारों को दबाव डालकर हटा दिया गया है।
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जांच में जो भी तथ्य सामने आए हैं, उसके आधार पर ही जांच रिपोर्ट बननी है। यह सही है कि शिकायतकर्ता दुकानदार अगर दोबारा पेश नहीं हुए तो यह जानना मुश्किल होगा कि उनके साथ वसूली किसने की थी। - संजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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