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विधायक ने खुद बैठकर बनवाई मंदिर की बाउंड्री.. सांसद जी आए नहीं

Sat, 02 Mar 2019 01:19 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Sat, 02 Mar 2019 01:19 AM IST
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विधायक ने खुद बैठकर बनवाई मंदिर की बाउंड्री.. सांसद जी आए नहीं
विधायक ने खुद बैठकर बनवाई मंदिर की बाउंड्री.. सांसद जी आए नहीं - फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। मंदिर की बाउंड्रीवाल निर्माण को लेकर गांव के दो पक्षों के विवाद का एक तरह से पटाक्षेप हो गया। इस विवाद में अप्रत्यक्ष रूप से सांसद और अपनी ही पार्टी के पुराने शिष्य कहे जाने वालेविधायक से आमने-सामने आ गए थे। विधायक ने अपने गुरू से एक कदम आगे निकलते हुए मंदिर की ब्राउंउीवाल खुद बैठकर सामने बनवा दी। दूसरे पक्ष के लोग सांसद के आने का इंतजार करते रह गए, लेकिन सांसद जी आए ही नहीं। सत्ता पक्ष के सांसद और विधायक की प्रतिष्ठा से जुड़े मामले में प्रशासनिक अफसरों और पुलिस ने भी ढील डाल दी और बाउंड्रीवाल बनकर खड़ी हो गई।
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बड़ा बाईपास रोड स्थित गांव नवदिया झादा में शिव मंदिर के चारो ओर बाउंड्रीवाल बननी थी। गांव का एक पक्ष बाउंड्रीवाल बनवाने में लगा था, जबकि दूसरा पक्ष उसे रुकवाने में। बाउंड्रीवाल बनवाने वाले पक्ष की पैरवी में विधायक लगे थे, जबकि उसे रुकवाने की पैरवी सांसद जी कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार सांसद ने बड़े साहब को फोन करके बाउंड्रीवाल रुकवाने को कहा। बड़े साहब ने छोटे साहब को जांच सौंप दी। छोटे साहब ने नीचे के मातहतों को। राजस्व टीम ने मौके पर जाकर नापजोख भी की। मगर, अफसर उनकी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे थे। इससे पहले पूर्व एसडीएम के नेतृत्व में भी बाउंड्रीवाल की जमीन की पैमाइश हो चुकी है।
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शुक्रवार को सुबह विधायक समर्थक बाउंड्रीवाल बनाने लगे तो दूसरे पक्ष ने आकर रोक दिया। सांसद का फोन पहुंचते ही बिथरी पुलिस मौके पर पहुंची और बाउंड्रीवाल बनाने वालों को पकड़कर ले जाने लगी। समर्थकों ने विधायक को खबर दी तो विधायक खुद चलकर मंदिर पर पहुंच गए और इंस्पेक्टर से कहा कि यह राजस्व का मामला है। इसमें पुलिस का क्या काम। हील हुज्जत के बाद पुलिस वापस चली गई तो इधर से उधर फोन घनघनाने शुरू हो गए। सूत्रों के मुताबिक सांसद ने भी उच्चाधिकारियों को फोन कर बाउंड्रीवाल निर्माण रोकने का दबाव बनाया। मगर, विधायक भी कहां मानने वाले थे। वह अफसरों से बोले- जिसे मंदिर की बाउंड्रीवाल का निर्माण रुकवाना हो, वह खुद सामने आए। अन्यथा बाउंड्रीवाल बनकर रहेगी। फिर क्या था। पुलिस के हटते ही निर्माण शुरू हो गया और 10 बजे तक पूरी बाउंड्रीवाल बन गई। दूसरे पक्ष के लोग सांसद के आने का इंतजार करते रह गए।
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अफसरों ने दी ढील
अफसरों के पास सांसद के भी फोन पहुंच रहे थे और विधायक के भी। सांसद बाउंड्रीवाल का निर्माण रुकवाने वालों के पक्ष में सिफारिश कर रहे थे, जबकि विधायक अपनी विधानसभा क्षेत्र में बाहरी हस्तक्षेप बताकर अफसरों पर अपनी बात मनवाने का दबाव बना रहे थे। अफसर सांसद और विधायकों दोनों को तकनीकी चीजें समझाकर खुद को इस पचड़े से बचाने के लिए मामले को लटकाने में लगे थे। उनको डर था कि कहीं सांसद या विधायक दोनों में से कोई नाराज न हो जाए। बाउंड्रीवाल बनने के बाद भी गांव में तनाव बना हुआ है।
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