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नोटबंदी में फंस गईं 400 सड़कें
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Tue, 27 Dec 2016 01:52 AM IST
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400 roads were stuck in Notbandi
- फोटो : self
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नगर निगम ने प्रत्येक वार्ड में 20 लाख और मलिन बस्तियों में दस लाख की लागत से सीसी टाइल्स की सड़कें बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। जुलाई से अगस्त तक इन सड़कों के टेंडर भी हो चुके हैं, लेकिन चार सौ से ज्यादा मार्गों को पक्का करने का काम साल के आखिर तक शुरू नहीं हो पाया है। कुछ दिनों तक तो निर्माण कागजी खानापूरी में फंसा रहा और बाद में नोटबंदी के कारण ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए।
शहर के 70 वार्डों में औसतन 40 फीसदी से ज्यादा गलियां जर्जर हो चुकी हैं। इन पर वाहनों से आवागमन में परेशानी होती है। बारिश में जलभराव से नारकीय स्थिति बन जाती है। नगर निगम बोर्ड की बैठकों में पार्षद अपने वार्डों के काम आवंटन में अफसरों पर भेदभाव का आरोप लगाते रहे हैं। इसको देखते हुए नगर निगम बोर्ड ने 70 वार्डों में प्रत्येक चुने हुए और 10 नामित पार्षदों को अपने वार्ड में 20 लाख और मलिन बस्ती में गलियां पक्की कराने के लिए 10 लाख के बजट का प्रावधान रखा। शहर में चार सौ से ज्यादा जर्जर गलियां और सड़कें चिह्नित की गईं। इनको पक्का कराने के लिए जुलाई से सितंबर तक टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
एक्सईएन से चीफ इंजीनियर बनने के बाद सतीश कुमार का तबादला हो गया। इसके बाद एक्सईएन का चार्ज पर्यावरण अभियंता उत्तम वर्मा के पास पहुंच गया। उनके दफ्तर में फाइलें लटकती रहीं। काम लेट होते गए। इसके बाद नोटबंदी आई तो ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए। ठेकेदारों को नगर निगम से पुराने पेमेंट नहीं हो रहे हैं। इसलिए वह नई सड़कें या गलियां बनाने में रुचि नहीं ले रहे। आधे से ज्यादा कामों के वर्क आर्डर जारी हो चुके हैं। फिर भी वार्डों के बाशिंदे जर्जर सड़कों पर वाहन चलाने या पैदल चलने की परेशानी झेल रहे हैं। बारिश में ये गलियां तालाब बन जाती हैं।
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इन इलाकों में हैं जर्जर गलियां
साहूकारा, भूड़, कालीबाड़ी, गंगापुर, जगतपुर, बुखारपुरा, रोहिली टोला, रबड़ी टोला, खुर्रम गौंटिया, बिहारीपुर, सैलानी, रामपुर गार्डन, त्रिवटीनाथ, सुभाषनगर, वीरभट्ठी, मॉडल टाउन, राजेंद्र नगर, नवादा शेखान, कटरा चांद खां, सैदपुर हाकिंस, हरूनगला, गुलाबनगर, आलमगिरीगंज, मथुरापुर, सूफी टोला, फाल्तूनगंज, नई बस्ती, चकमहमूद, जाटवपुरा, हजियापुर, संजय नगर, मलूकपुर आदि।
33 करोड़ से चार सौ गलियों को पक्का करने की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इनके वर्क आर्डर भी जारी हो चुके हैं। नोट बंदी की वजह से ठेकेदारों ने काम में रुचि नहीं दिखाई। नई करेंसी आने के बाद काम शुरू कराए जाएंगे।
- डा. आईएस तोमर, मेयर
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शहर के 70 वार्डों में औसतन 40 फीसदी से ज्यादा गलियां जर्जर हो चुकी हैं। इन पर वाहनों से आवागमन में परेशानी होती है। बारिश में जलभराव से नारकीय स्थिति बन जाती है। नगर निगम बोर्ड की बैठकों में पार्षद अपने वार्डों के काम आवंटन में अफसरों पर भेदभाव का आरोप लगाते रहे हैं। इसको देखते हुए नगर निगम बोर्ड ने 70 वार्डों में प्रत्येक चुने हुए और 10 नामित पार्षदों को अपने वार्ड में 20 लाख और मलिन बस्ती में गलियां पक्की कराने के लिए 10 लाख के बजट का प्रावधान रखा। शहर में चार सौ से ज्यादा जर्जर गलियां और सड़कें चिह्नित की गईं। इनको पक्का कराने के लिए जुलाई से सितंबर तक टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
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एक्सईएन से चीफ इंजीनियर बनने के बाद सतीश कुमार का तबादला हो गया। इसके बाद एक्सईएन का चार्ज पर्यावरण अभियंता उत्तम वर्मा के पास पहुंच गया। उनके दफ्तर में फाइलें लटकती रहीं। काम लेट होते गए। इसके बाद नोटबंदी आई तो ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए। ठेकेदारों को नगर निगम से पुराने पेमेंट नहीं हो रहे हैं। इसलिए वह नई सड़कें या गलियां बनाने में रुचि नहीं ले रहे। आधे से ज्यादा कामों के वर्क आर्डर जारी हो चुके हैं। फिर भी वार्डों के बाशिंदे जर्जर सड़कों पर वाहन चलाने या पैदल चलने की परेशानी झेल रहे हैं। बारिश में ये गलियां तालाब बन जाती हैं।
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इन इलाकों में हैं जर्जर गलियां
साहूकारा, भूड़, कालीबाड़ी, गंगापुर, जगतपुर, बुखारपुरा, रोहिली टोला, रबड़ी टोला, खुर्रम गौंटिया, बिहारीपुर, सैलानी, रामपुर गार्डन, त्रिवटीनाथ, सुभाषनगर, वीरभट्ठी, मॉडल टाउन, राजेंद्र नगर, नवादा शेखान, कटरा चांद खां, सैदपुर हाकिंस, हरूनगला, गुलाबनगर, आलमगिरीगंज, मथुरापुर, सूफी टोला, फाल्तूनगंज, नई बस्ती, चकमहमूद, जाटवपुरा, हजियापुर, संजय नगर, मलूकपुर आदि।
33 करोड़ से चार सौ गलियों को पक्का करने की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इनके वर्क आर्डर भी जारी हो चुके हैं। नोट बंदी की वजह से ठेकेदारों ने काम में रुचि नहीं दिखाई। नई करेंसी आने के बाद काम शुरू कराए जाएंगे।
- डा. आईएस तोमर, मेयर