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अब दो साल तक नहीं खुल सकेंगे नए बीटेक कॉलेज
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बरेली। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली उत्तर प्रदेश राज्य प्रवेश परीक्षा-2019 (यूपीएसईई) की तैयारी को लेकर बरेली आए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के सलाहकार प्रोफेसर दिनेश पाठक ने इंजीनियरिंग कॉलेजों का हाल बयां किया। बोले- पिछले छह सालों में प्रदेश में चालीस फीसदीइंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो गए। आज इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के 593 कॉलेज ही बचे हैं। स्थिति सुधारने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने अगले दो सालों तक प्रदेश में नए बीटेक कॉलेज खोलने पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेज पर रोक लगने के बाद फार्मेसी कॉलेजों के आवेदन बढ़े हैं। इस साल बरेली में ही 16 नए फार्मेसी कॉलेज खुलने जा रहे हैं। प्रदेश से एकेटीयू के पास 250 फार्मेसी कॉलेजों के आवेदन पहुंचे हैं। इतना ही नहीं पिछले साल प्रदेश में 25 इंजीनियरिंग कॉलेजों ने बंद करने की अर्जी लगाई थी। इसमें रुहेलखंड परिक्षेत्र के भी कुछ कॉलेज शामिल हैं।
पिछले साल चालीस हजार सीटें रह गईं खाली
बीटेक डिग्रियां बांटने के खेल में क्वालिटी एजुकेशन की धज्जियां उड़ गईं। एक वक्त में प्रदेश में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की 1.75 लाख सीटें थीं। अब 1.20 लाख सीटें हैं। प्रोफेसर पाठक का कहना है कि इंजीनियरिंग कॉलेजों में न बेहतर शिक्षक हैं और पढ़ाने के अच्छे साधन। क्वालिटी एजुकेशन न होने पर छात्रों को जॉब नहीं मिल पाती, जिस कारण एडमिशन का ग्राफ गिरा है। उन्हाेंने बताया कि पिछले साल इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की 1.20 लाख सीटों में से 40 हजार सीटें खाली रह गईं। इस बार प्रयास किए जा रहे हैं कि सीटें बढ़ें और छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन मिले।
परास्नातक के लिए भी इस बार ऑफलाइन होगा एंट्रेंस
पिछले साल तक स्नातक कोर्स के प्रवेश के लिए ही ऑफलाइन परीक्षा होती थी। इस बार परास्नातक जैसे एमसीए, एमबीए, एमफार्मा के लिए भी ऑफलाइन परीक्षा होगी। कॉलेजों की सीटें बढ़ सकें इसके लिए आल इंडिया कोटा भी 10 से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। प्रोफेसर पाठक ने बताया कि यूपीएसईई के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। 15 मार्च तक आवेदन होंगे और 21 अप्रैल को परीक्षा होगी। इस बार प्रवेश लेने वाले सौ एससी व एसटी और सामान्य वर्ग के सौ छात्रों को विश्वविद्यालय की तरफ से लैपटॉप दिए जाएंगे।
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छात्रों को स्किल्ड बनाने के लिए खुले सात नोडल सेंटर
इंजीनियरिंग डिग्री हासिल करने के बाद भी छात्र जॉब के लिए तैयार नहीं हो पाते। उनमें स्किल की कमी होती है। उसे दूर करने के लिए एकेटीयू ने सात नोडल सेंटर बनाए हैं। कानपुर, इलाहाबाद, कन्नौज और बाकी सेंटर नोएडा के कॉलेजों में हैं। सभी सेंटरों पर अलग-अलग विषय की जिम्मेदारी दी गई है। जिन विषयों में छात्र कमजोर हैं उनको इन सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन की सुविधा मिलेगी।
इस बार सभी कॉलेजों में बायोमेट्रिक हाजिरी
माना जाता है कि इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षक पूरे साल नहीं आते, आते भी हैं तो पढ़ाते लायक स्टूडेंट्स की संख्या नहीं होती, लेकिन इस बार उपस्थिति पूरी तरह से ऑनलाइन कर दी गई है। छात्रों और शिक्षकों की सब्जेक्टवार बायोमेट्रिक उपस्थिति लगेगी और प्रतिदिन की रिपोर्ट एकेटीयू जाएगी।
इस बार खुले नए कोर्स
एकेटीयू ने छात्रों को बेहतर शिक्षा देने लिए इस बार नए कोर्स शुरू किए हैं। इस बार छात्र बीवोक, बी.प्लान शुरू किया है। इसके अलावा पीजी में ड्यूअल डिग्री शुरू की है। यानी बीटेक में प्रवेश लेने वाला छात्र पांच साल में बीटेक के साथ एमटेक की भी डिग्री हासिल कर लेगा। इसके अलावा प्लेसमेंट के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है। छात्र इस पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। प्रोफेसर पाठक ने बताया कि हैरानी की बात यह है कि पंजीकरण कराने के बाद बीस फीसदी छात्र भी इंटरव्यू में नहीं पहुंचते। कम्यूनिकेशन स्किल न होने के कारण यह स्थिति पैदा हो रही है।
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पिछले साल चालीस हजार सीटें रह गईं खाली
बीटेक डिग्रियां बांटने के खेल में क्वालिटी एजुकेशन की धज्जियां उड़ गईं। एक वक्त में प्रदेश में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की 1.75 लाख सीटें थीं। अब 1.20 लाख सीटें हैं। प्रोफेसर पाठक का कहना है कि इंजीनियरिंग कॉलेजों में न बेहतर शिक्षक हैं और पढ़ाने के अच्छे साधन। क्वालिटी एजुकेशन न होने पर छात्रों को जॉब नहीं मिल पाती, जिस कारण एडमिशन का ग्राफ गिरा है। उन्हाेंने बताया कि पिछले साल इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की 1.20 लाख सीटों में से 40 हजार सीटें खाली रह गईं। इस बार प्रयास किए जा रहे हैं कि सीटें बढ़ें और छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन मिले।
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परास्नातक के लिए भी इस बार ऑफलाइन होगा एंट्रेंस
पिछले साल तक स्नातक कोर्स के प्रवेश के लिए ही ऑफलाइन परीक्षा होती थी। इस बार परास्नातक जैसे एमसीए, एमबीए, एमफार्मा के लिए भी ऑफलाइन परीक्षा होगी। कॉलेजों की सीटें बढ़ सकें इसके लिए आल इंडिया कोटा भी 10 से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। प्रोफेसर पाठक ने बताया कि यूपीएसईई के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। 15 मार्च तक आवेदन होंगे और 21 अप्रैल को परीक्षा होगी। इस बार प्रवेश लेने वाले सौ एससी व एसटी और सामान्य वर्ग के सौ छात्रों को विश्वविद्यालय की तरफ से लैपटॉप दिए जाएंगे।
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छात्रों को स्किल्ड बनाने के लिए खुले सात नोडल सेंटर
इंजीनियरिंग डिग्री हासिल करने के बाद भी छात्र जॉब के लिए तैयार नहीं हो पाते। उनमें स्किल की कमी होती है। उसे दूर करने के लिए एकेटीयू ने सात नोडल सेंटर बनाए हैं। कानपुर, इलाहाबाद, कन्नौज और बाकी सेंटर नोएडा के कॉलेजों में हैं। सभी सेंटरों पर अलग-अलग विषय की जिम्मेदारी दी गई है। जिन विषयों में छात्र कमजोर हैं उनको इन सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन की सुविधा मिलेगी।
इस बार सभी कॉलेजों में बायोमेट्रिक हाजिरी
माना जाता है कि इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षक पूरे साल नहीं आते, आते भी हैं तो पढ़ाते लायक स्टूडेंट्स की संख्या नहीं होती, लेकिन इस बार उपस्थिति पूरी तरह से ऑनलाइन कर दी गई है। छात्रों और शिक्षकों की सब्जेक्टवार बायोमेट्रिक उपस्थिति लगेगी और प्रतिदिन की रिपोर्ट एकेटीयू जाएगी।
इस बार खुले नए कोर्स
एकेटीयू ने छात्रों को बेहतर शिक्षा देने लिए इस बार नए कोर्स शुरू किए हैं। इस बार छात्र बीवोक, बी.प्लान शुरू किया है। इसके अलावा पीजी में ड्यूअल डिग्री शुरू की है। यानी बीटेक में प्रवेश लेने वाला छात्र पांच साल में बीटेक के साथ एमटेक की भी डिग्री हासिल कर लेगा। इसके अलावा प्लेसमेंट के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है। छात्र इस पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। प्रोफेसर पाठक ने बताया कि हैरानी की बात यह है कि पंजीकरण कराने के बाद बीस फीसदी छात्र भी इंटरव्यू में नहीं पहुंचते। कम्यूनिकेशन स्किल न होने के कारण यह स्थिति पैदा हो रही है।