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बागवानी : अब किसानों की नहीं, पहुंच वाले रईसों की

Wed, 09 Jan 2019 01:38 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Wed, 09 Jan 2019 01:38 AM IST
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बागवानी : अब किसानों की नहीं, पहुंच वाले रईसों की
बरेली। किसानों की आमदनी दो गुनी करने के लिए सरकार किसानों को फूल और सब्जी की खेती करने पर लागत की आधी सब्सिडी दे रही है। मगर, राजनीति और सिस्टम की मनमानी के चलते इस सब्सिडी का फायदा छोटे और मझोले किसानों के बजाय मेडिकल और फर्नीचर कारोबारियों के अलावा विभागीय कर्मचारियों के रिश्तेदारों को मिल रहा है। राजनीतिज्ञों की उपेक्षा की वजह से लघु और मध्यम किसान सरकार से मिलने वाली गुलाब और फूलों की खेती पर सब्सिडी से दूर है क्योंकि किसान उनको वोट तो देते हैं, लेकिन नोट नहीं देते।
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उत्तर प्रदेश उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण की राज्य औद्यानिक मिशन योजना के अंतर्गत सरकार लघु एवं मध्यम किसानों को 500 वर्ग मीटर से 4000 वर्ग मीटर में फूलों और सब्जी की खेती करने के लिए कुल लागत का 50 प्रतिशत की सब्सिडी देती है। इसमें फूल और सब्जी की खेती करने के इच्छुक पंजीकृत किसान इसके लिए अपना प्रोजेक्ट बनाकर ऑनलाइन आवेदन करते हैं। इससे पहले उनको अपने बजट से निर्धारित एरिया में पॉलीहाउस बनाकर खेती की शुरूआत करनी होती है। बरेली में दो साल के अंदर पांच पॉलीहाउस राज्य सरकार ने मंजूर किए। पांचों पॉलीहाउस बड़े घरानों या ऊंची पहुंच रखने वाले कारोबारियों या विभागीय कर्मचारियों के परिवार के हैं। साधारण किसान कोई भी पॉलीहाउस नहीं खोल पाया। न ही उसे सब्सिडी मिल पायी क्योंकि न तो उसे समय से फूलों की खेती की जानकारी हो सकी। न ही किसी ने पॉलीहाउस की सब्सिडी देने के लिए उसकी सिफारिश की।
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कारोबार शहर में, पॉलीहाउस गांव में
शहर के एक कारोबारी ने सरकार की 50 प्रतिशत सब्सिडी लेकर अपने ही परिवार में दो अलग-अलग नामों से दो पॉलीहाउस फरीदपुर के एक गांव में खोल लिए। कारोबारी की सरकार में दिग्गज नेताओं तक पहुंच है। निकाय चुनाव से पहले पूरी सरकार इनके घर आ चुकी है। इन कारोबारी के 4000 वर्ग मीटर में बने एक पालीहाउस की लागत 56 लाख है, जिसमें इन्होंने गुलाब की खेती करने का दावा किया है। इसमें इनको उद्यान विभाग से 26 लाख से ज्यादा की सब्सिडी मिली है। इन कारोबारी के भाई का बगल में ही 4000 वर्ग मीटर एरिया में दूसरा पॉलीहाउस भी बन रहा है, जिसमें जरबेरा के फूलों की खेती करने की बात कही गई है। इस पॉलीहाउस की लागत 58.16 लाख है। इसमें भी इनको 26 लाख से ज्यादा की सब्सिडी मिली है। एक ही परिवार को अलग-अलग नामों से सरकार की 50 लाख से ज्यादा की सब्सिडी मिल गई।
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सुपरवाइजर के परिवार में पॉलीहाउस
एक पॉलीहाउस नवाबगंज के गांव ग्रेम में बना हैं। यह उद्यान विभाग के पीलीभीत दफ्तर में कार्यरत सुपरवाइजर के भाई का है क्योंकि इनका परिवार नवाबगंज के इस गांव में रहता है। यह पॉलीहाउस भी 4000 हजार वर्ग मीटर में बना है। इसमें खीरे की खेती होती है। पॉली हाउस की लागत 39.36 लाख है। इसमें 19.88 लाख की सब्सिडी भी मिल चुकी है। इनका खीरा दिल्ली की मंडी में सप्लाई किया जाता है।

मेडिकल कालेज में भी पॉलीहाउस
दो हजार वर्ग मीटर एरिया में एक पॉलीहाउस शहर के एक नामचीन मेडिकल कालेज में खोले जाने की मंजूरी मिल गई है। मेडिकल कालेज के मालिक अपनी पत्नी के नाम से यह पॉलीहाउस बनाने जा रहे हैं। यह पॉलीहाउस 2000 वर्ग मीटर में गुलाब की खेती करने के लिए खोला जाना है। नामचीन मेडिकल व्यवसायी को गुलाब की खेती करने का ऐसा चस्का चढ़ा है कि वह 20.60 लाख का प्रोजेक्ट बनाकर उद्यान विभाग से 10.60 लाख की सब्सिडी भी लेंगे। इनका प्रोजेक्ट फिलहाल मंजूर हो चुका है। इनका अरबों का कारोबार है। फिर भी इनको गुलाब की खेती करने के लिए किसानों को मिलने वाली सब्सिडी चाहिए।

सेमीखेड़ा में भी पॉलीहाउस
बहेड़ी के सेमीखेड़ा में भी 4000 वर्ग मीटर एरिया में खीरे की खेती के लिए पॉलीहाउस खोला गया है। इस पॉलीहाउस की लागत 39.36 लाख है, जिसमें इनको 19.88 लाख की सब्सिडी सरकार से मिली है। यह अपने पॉलीहाउस में उच्चकोटि का खीरा उगाकर दिल्ली की मंडी में उसकी बिक्री करते हैं। यह सामान्य खीरे से अलग है।

क्या है पॉलीहाउस खोलने की प्रक्रिया
गुलाब या सब्जी की खेती करने के लिए अगर किसी किसान के पास 500 वर्ग मीटर से 4000 वर्ग मीटर जमीन है तो वह औद्यानिक मिशन योजना के अंतर्गत उद्यान एवं प्रसंस्करण विभाग में अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकता है। फिर किसान को उद्यान विभाग की नर्सरी से ही बीज लेकर खेती करनी होती है। जब प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो जाता है तो उसे ऑनलाइन अपलोड किया जाता है। उसकी हार्ड कापी विभाग में जमा करनी होती है। जिला उद्यान अधिकारी और सीडीओ उसकी संस्तुति कर शासन को भेजते हैं। वहां से प्रमुख सचिव, कृषि उत्पादन आयुक्त और उद्यान निदेशक उस प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हैं। फिर लखनऊ से ज्वाइंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में सत्यापन कमेटी बनती है जो मौके पर जाकर पूरे प्रोजेक्ट का सत्यापन करती है। उसके बाद उसे मंजूरी मिलती है।


‘कोई भी किसान ऑनलाइन पंजीकरण कर पॉलीहाउस के लिए आवेदन कर सकता है। मेरे दफ्तर में उसकी हार्ड कापी जमा होती है। पॉलीहाउस के प्रोजेक्ट की मंजूरी शासन से मिलती है।’
- डा. पूजा, जिला उद्यान अधिकारी
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