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अब ‘मुद्रा’ न उतार दे सरकार की भद्रा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:35 PM IST
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फर्जी कुटेशन और बिलों के जरिये मुद्रा योजना की करोड़ों की रकम ठिकाने लगाई जा रही है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक मुद्रा योजना के ऐसे लाभार्थियों की संख्या करीब 30 फीसदी तक पहुंच गई है जिनसे रिकवरी नहीं हो पा रही है। इस योजना में ग्राहकों को बगैर गारंटी 50 हजार से 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है। मगर बड़े स्तर पर हो रही गड़बड़ी से बैंकों का घाटा बढ़ गया है, नतीजा यह है कि पात्र लोगों को इसका फायदा उठाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
स्टार्ट अप इंडिया के तहत अप्रैल 2015 में पीएम मोदी ने मुद्रा योजना की शुरूआत की थी, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े होने से बैंकों की वसूली बाधित हो गई है। इससे उनके एनपीए खातों का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है। ज्यादातर गड़बड़ी फर्जी रिकार्ड के जरिये हो रही है। मुद्रा योजना में कर्ज लेते वक्त ग्राहकों को यह ब्योरा देना होता है कि वह किस डीलर से मशीनरी या माल की खरीद कर रहे हैं। इसका कुटेशन (खरीदी जाने वाली सामग्री की उपलब्धता और उसके रेट) भी बैंक को उपलब्ध कराना होता है। बैंक इसी आधार पर ऋण की धनराशि जारी करता है। ऋण का भुगतान होने के बाद लाभार्थी को खरीदी गई सामग्री के बिल भी बैंक को देने होते हैं। सूत्रों का कहना है कि मुद्रा योजना में दलाल सक्रिय हो गए हैं। ये दलाल डीलर के जरिये फर्जी कुटेशन और बिल तैयार करके मुद्रा योजना की रकम आसानी से हासिल कर लेते हैं। बैंकों के स्टाफ के स्तर से भी इसका उचित सत्यापन नहीं होता। चूंकि इस लोन में कोई बैंक को कोई गारंटी नहीं दी जाती, इसलिए लोन की किस्त न चुकाने वाले लोगों के खिलाफ बैंक का कोई कार्रवाई करना भी आसान नहीं होता। बैंक अधिकारियों की मानें तो जिन स्कीमों में खाते सबसे ज्यादा एनपीए हो रहे हैं, उसमें मुद्रा योजना भी शामिल हैं। इसकी वजह में पात्र गरीबों को इसका लाभ पाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बैंक बांट चुके हैं 1.87 अरब का लोन
जिले में काम कर रही 21 सरकारी बैंकों समेत 38 बैंक शाखाएं मुद्रा योजना के तहत अब तक 11285 लोगों को एक अरब 87 करोड़ 13 लाख रुपये का लोन दे चुकी हैं जबकि इस वित्तीय वर्ष शिशु लोन में 664 लोगों को 2.97 करोड़, किशोर लोन में 826 लोगों को 18.23 करोड़ और तरुण लोन में 173 लोगों को 15.25 करोड़ रुपये दिया गया है। इस तरह इस साल कुल 1663 लोगों को 36.46 करोड़ से ज्यादा की धनराशि दी जा चुकी है।
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मुद्रा योजना में तीन तरह के लोन
शिशु लोन के तहत 50 हजार, किशोर लोन में 50 हजार से ज्यादा पांच लाख तक और तरुण लोन में पांच लाख से ज्यादा 10 लाख तक लोन देने की व्यवस्था है। इस लोन से खुद का कारोबार शुरू करने के लिए केवल किराए के दस्तावेज या मकान के मालिकाना हक के कागज लगते हैं। एनपीए के केस में ज्यादातर किरायानामा लगाने वाले ही शामिल हैं।
मुद्रा स्कीम में बैंकें निर्धारित प्रारूप पर आवेदन और उसके सत्यापन के बाद ही कर्ज देती हैं। एनपीए खाते के संबंध में बैंकों को सख्ती से रिकवरी करने के आदेश भी हैं।- ओपी बढ़ेरा, लीड बैंक मैनेजर
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स्टार्ट अप इंडिया के तहत अप्रैल 2015 में पीएम मोदी ने मुद्रा योजना की शुरूआत की थी, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े होने से बैंकों की वसूली बाधित हो गई है। इससे उनके एनपीए खातों का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है। ज्यादातर गड़बड़ी फर्जी रिकार्ड के जरिये हो रही है। मुद्रा योजना में कर्ज लेते वक्त ग्राहकों को यह ब्योरा देना होता है कि वह किस डीलर से मशीनरी या माल की खरीद कर रहे हैं। इसका कुटेशन (खरीदी जाने वाली सामग्री की उपलब्धता और उसके रेट) भी बैंक को उपलब्ध कराना होता है। बैंक इसी आधार पर ऋण की धनराशि जारी करता है। ऋण का भुगतान होने के बाद लाभार्थी को खरीदी गई सामग्री के बिल भी बैंक को देने होते हैं। सूत्रों का कहना है कि मुद्रा योजना में दलाल सक्रिय हो गए हैं। ये दलाल डीलर के जरिये फर्जी कुटेशन और बिल तैयार करके मुद्रा योजना की रकम आसानी से हासिल कर लेते हैं। बैंकों के स्टाफ के स्तर से भी इसका उचित सत्यापन नहीं होता। चूंकि इस लोन में कोई बैंक को कोई गारंटी नहीं दी जाती, इसलिए लोन की किस्त न चुकाने वाले लोगों के खिलाफ बैंक का कोई कार्रवाई करना भी आसान नहीं होता। बैंक अधिकारियों की मानें तो जिन स्कीमों में खाते सबसे ज्यादा एनपीए हो रहे हैं, उसमें मुद्रा योजना भी शामिल हैं। इसकी वजह में पात्र गरीबों को इसका लाभ पाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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बैंक बांट चुके हैं 1.87 अरब का लोन
जिले में काम कर रही 21 सरकारी बैंकों समेत 38 बैंक शाखाएं मुद्रा योजना के तहत अब तक 11285 लोगों को एक अरब 87 करोड़ 13 लाख रुपये का लोन दे चुकी हैं जबकि इस वित्तीय वर्ष शिशु लोन में 664 लोगों को 2.97 करोड़, किशोर लोन में 826 लोगों को 18.23 करोड़ और तरुण लोन में 173 लोगों को 15.25 करोड़ रुपये दिया गया है। इस तरह इस साल कुल 1663 लोगों को 36.46 करोड़ से ज्यादा की धनराशि दी जा चुकी है।
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मुद्रा योजना में तीन तरह के लोन
शिशु लोन के तहत 50 हजार, किशोर लोन में 50 हजार से ज्यादा पांच लाख तक और तरुण लोन में पांच लाख से ज्यादा 10 लाख तक लोन देने की व्यवस्था है। इस लोन से खुद का कारोबार शुरू करने के लिए केवल किराए के दस्तावेज या मकान के मालिकाना हक के कागज लगते हैं। एनपीए के केस में ज्यादातर किरायानामा लगाने वाले ही शामिल हैं।
मुद्रा स्कीम में बैंकें निर्धारित प्रारूप पर आवेदन और उसके सत्यापन के बाद ही कर्ज देती हैं। एनपीए खाते के संबंध में बैंकों को सख्ती से रिकवरी करने के आदेश भी हैं।- ओपी बढ़ेरा, लीड बैंक मैनेजर