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फरहत बोली- जज साहब.. 5 हजार गुजारा भत्ते से बेटी को कैसे पढ़ाएं

Tue, 24 Jul 2018 12:40 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Tue, 24 Jul 2018 12:40 AM IST
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Farhat seek more moey for survival
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 तीन तलाक और हलाला पीड़ित महिलाओं की आवाज बुलंद करने वाली मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी का अपना दर्द सोमवार को अदालत में छलका। अदालत में गवाही के दौरान जज्बाती हुई फरहत ने अपनी मासूम बेटी का हवाला देते हुए गुजारा भत्ता बढ़ाने की फरियाद की। कहा, जज साहब अदालत ने पांच हजार रुपये का गुजारा भत्ता तय किया था, लेकिन अब इस मामूली रकम से खर्च नहीं चलता। घर के खर्चे तो दूर, बेटी की फीस तक जमा नहीं हो पाती। तलाक के बाद पिता के मकान में रह रही थीं, मगर अब वहां भी ज्यादा दिन का गुजारा नहीं बचा। मदद का कोई और जरिया भी नहीं है। जिन लोगों से उधार मिल जाता था, वे लोग भी अब कतराने लगे हैं। मेरा गुजारा भत्ता बढ़ा दीजिए।
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फरहत नकवी का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम अजय सिंह की अदालत में चल रहा है। पति के तलाक दिए जाने के बाद फरहत ने फैमिली कोर्ट में 2008 में भरण-पोषण के लिए वाद दायर किया था। इसमें कहा था कि उनका निकाह 28 अप्रैल 2005 को रोहली टोला निवासी रेहान हैदर के साथ हुई थी। उनके घरवालों ने शादी में बतौर दहेज तीन लाख का सामान दिया था और करीब डेढ़ लाख रुपये आवभगत पर खर्च किए थे। फिर भी ससुराल वाले संतुष्ट नहीं हुए। दहेज में कार न देने की वजह से उन्हें जिस्मानी और जहनी तौर से परेशान किया जाने लगा। अक्सर ताना दिया जाता था कि मंत्री की बहन है फिर भी दहेज में कार नहीं दी। आठ जून 2006 को उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया। उसकी पैदाइश पर तकरीबन 25 हजार रुपये का खर्च उन्हें अपने पिता से मांगकर करना पड़ा। फिर भी एक जनवरी 2007 को पति और ससुराल वालों ने उन्हें मारपीट कर मासूम बेटी के साथ घर से निकाल दिया। उसके बाद से उनकी कभी कोई सुध नहीं ली। अदालत ने 2012 में फरहत की अर्जी पर उनके लिए तीन और उनकी बेटी के लिए दो हजार रुपये यानी कुल पांच हजार रुपये का गुजारा भत्ता तय किया था।
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सोमवार को तीन साल बाद फिर अदालत पहुंची फरहत ने कहा कि जब उनका गुजारा भत्ता तय किया गया था तब उनकी बेटी की उम्र एक साल थी। तलाक के बाद 2008 से अब तक वह रिश्तेदारों से उधार लेकर किसी तरह जिंदगी गुजारती रही। अब उनकी बेटी दस साल की है और बिशप कोनराड में पढ़ रही है। उसकी स्कूल फीस, किताबें-कापी, यूनिफार्म और ऑटो का ही खर्च करीब आठ हजार रुपये महीना होता है। अब उनका अपने पिता के मकान में रहना भी मुश्किल हो रहा है। उन्हें किराए के मकान की जरूरत है। लोगों से उधार मिलना भी उसे बंद हो गया। मायके से मदद मिलने के हालात नहीं है। बेटी के खर्च और उनके रहने का इंतजाम करने की उनके पूर्व पति की है जो वह आसानी से कर सकते हैं। अदालत ने उनका बयान दर्ज होने के बाद सुनवाई के लिए दो अगस्त की तारीख तय की है।
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अदालत से फरियाद, कम से कम 20 हजार रुपये मासिक हो गुजारा भत्ता
फरहत ने अदालत में कहा कि उन्हें अब अपने और बेटी के गुजारे के लिए कम से कम बीस हजार रुपये महीने की जरूरत है। फरहत ने बताया कि उनके पूर्व पति रेहान हैदर उप्र परिवहन निगम के लाइसेंसयाफ्ता कारोबारी हैं। वाहन प्रदूषण जांच का भी उनका बड़ा काम है। निजी मकानात हैं जिनका काफी हिस्सा किराये पर उठा हुआ है। उनकी कुल आय 80 हजार रुपये से ज्यादा है, लेकिन उन्हें और उनकी बेटी को सिर्फ पांच हजार रुपये गुजारा भत्ता मिल रहा है जो काफी कम है। फरहत ने अपने भरण पोषण और किराये के मकान के लिए दस हजार और इतनी ही रकम अपनी बेटी की पढ़ाई लिखाई के लिए बतौर गुजारा भत्ता दिलाने की मांग की।
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