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शहर में 300 ई-रिक्शा चलेंगे
बरेली
Updated Fri, 12 Feb 2016 01:52 AM IST
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बरेली। प्रभारी कमिश्नर गौरव दयाल की अध्यक्षता में हुई आरटीए की बैठक में फैसला लिया गया है कि शहर में अब टेंपों और ऑटो के नये परमिट जारी नहीं होंगे। शहर में चल रहे देहात के टेंपो और ऑटो की चेकिंग कराई जाएगी, जिससे कि उनका संचालन बंद कराया जा सके। शहर को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए 300 ई रिक्शा चलाने का निर्णय भी लिया गया है।
कमिश्नरी सभाकक्ष में हुई बैठक में लोगों की सुविधा की दृष्टि से पूरनपुर-बिलसंडा वाया बंडा से खुटार तक 17 किलोमीटर तक का रूट और बढ़ाकर बसें चलाने का फैसला लिया गया है। इसी तरह बदायूं-उसैत-उड़रपुर वाया कलराला-हजरतपुर को उसैत से कटरा शहादतगंज लिलमा तक 19 किलोमीटर। फतेहगंज पूर्वी गढ़िया रंगीन मार्ग को नवादा मोड़ से दातागंज और आंवला-बदायूं-कादरचौक मार्ग को गंजडुंडवारा तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी गई। इन मार्गों पर अब रोडवेज और प्राइवेट दोनों तरह की बसों का संचालन होगा। मंडल के विभिन्न रूटों पर रोडवेज को नौ और प्राइवेट ऑपरेटरों को आठ बसों को संचालित करने के परमिट भी जारी किए गए हैं।
ओवर लोडेड वाहनों पर सख्ती करने के साथ-साथ उन पर एक हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया है। पूर्व में जुर्माना राशि पांच सौ से लेकर पांच हजार रुपये तक निर्धारित की गई थी। सीएनजी के 16 ऑटो दूसरे लोगों को बेचने की अनुमति दी गई, लेकिन तीन अन्य मृतकों के लाइसेंस ट्रांसफर करने के आवेदन खारिज कर दिए गए। ट्रैवल एजेंसी के दो आवेदनों को रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी गई। बैठक में अपर आयुक्त प्रशासन प्रभात शर्मा, आरटीओ आरआर सोनी, रोडवेज के आरएम प्रभाकर मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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लेकिन इन अवैध टैम्पो का क्या होगा!
शहर में चल रहे अवैध टैम्पो को गिनती नहीं, ई रिक्शा चलवाने की अनुमति दे दी
बरेली। शहर में अवैध तरीके से चल रहे देहात के टेपों हटाने के कई बार प्रशासनिक स्तर से दावे किए गए लेकिन कुछ नहीं हुआ। ये टेंपो यथावत बने हुए हैं। इतना ही नहीं एक ही परमिट पर कई-कई टेंपो शहर में दौड़ रहे हैं, जो कि हर चौराहे तथा सड़क पर जाम लगा रहे हैं। इनको हटाने के लिए चेकिंग अभियान के निर्देश कभी कमिश्नर तो कभी डीएम के स्तर से जारी हुए । ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ आफिस ने अभियान के नाम पर औपचारिकताएं पूरी की है।
वास्तविकता यह है कि ये अवैध टेंपो पुलिस वालों के संरक्षण में चल रहे हैं। कुछ तो पुलिस वालों के ही हैं। भला ऐसे में पुलिस इन टेंपो को क्यों हटाने से रही। इसीलिए बार-बार आदेश होते रहे और कुछ समय के लिए कुछ टेंपो दूसरे जगहों में शिफ्ट कर दिए गए । बाद में उन टेंपो को फिर से उन्हीं रुटों पर दौड़ाकर ट्रैफिक जाम किया जा रहा है। इतना ही नहीं देहात के टेंपो सीएनजी गैस की फिलिंग के बहाने शहर में दौड़ रहे हैं। जबकि कई बार अभियान चलाकर दावे किए गए कि काफी टेंपो हटा दिए हैं लेकिन शहर में तो कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।
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कमिश्नरी सभाकक्ष में हुई बैठक में लोगों की सुविधा की दृष्टि से पूरनपुर-बिलसंडा वाया बंडा से खुटार तक 17 किलोमीटर तक का रूट और बढ़ाकर बसें चलाने का फैसला लिया गया है। इसी तरह बदायूं-उसैत-उड़रपुर वाया कलराला-हजरतपुर को उसैत से कटरा शहादतगंज लिलमा तक 19 किलोमीटर। फतेहगंज पूर्वी गढ़िया रंगीन मार्ग को नवादा मोड़ से दातागंज और आंवला-बदायूं-कादरचौक मार्ग को गंजडुंडवारा तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी गई। इन मार्गों पर अब रोडवेज और प्राइवेट दोनों तरह की बसों का संचालन होगा। मंडल के विभिन्न रूटों पर रोडवेज को नौ और प्राइवेट ऑपरेटरों को आठ बसों को संचालित करने के परमिट भी जारी किए गए हैं।
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ओवर लोडेड वाहनों पर सख्ती करने के साथ-साथ उन पर एक हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया है। पूर्व में जुर्माना राशि पांच सौ से लेकर पांच हजार रुपये तक निर्धारित की गई थी। सीएनजी के 16 ऑटो दूसरे लोगों को बेचने की अनुमति दी गई, लेकिन तीन अन्य मृतकों के लाइसेंस ट्रांसफर करने के आवेदन खारिज कर दिए गए। ट्रैवल एजेंसी के दो आवेदनों को रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी गई। बैठक में अपर आयुक्त प्रशासन प्रभात शर्मा, आरटीओ आरआर सोनी, रोडवेज के आरएम प्रभाकर मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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लेकिन इन अवैध टैम्पो का क्या होगा!
शहर में चल रहे अवैध टैम्पो को गिनती नहीं, ई रिक्शा चलवाने की अनुमति दे दी
बरेली। शहर में अवैध तरीके से चल रहे देहात के टेपों हटाने के कई बार प्रशासनिक स्तर से दावे किए गए लेकिन कुछ नहीं हुआ। ये टेंपो यथावत बने हुए हैं। इतना ही नहीं एक ही परमिट पर कई-कई टेंपो शहर में दौड़ रहे हैं, जो कि हर चौराहे तथा सड़क पर जाम लगा रहे हैं। इनको हटाने के लिए चेकिंग अभियान के निर्देश कभी कमिश्नर तो कभी डीएम के स्तर से जारी हुए । ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ आफिस ने अभियान के नाम पर औपचारिकताएं पूरी की है।
वास्तविकता यह है कि ये अवैध टेंपो पुलिस वालों के संरक्षण में चल रहे हैं। कुछ तो पुलिस वालों के ही हैं। भला ऐसे में पुलिस इन टेंपो को क्यों हटाने से रही। इसीलिए बार-बार आदेश होते रहे और कुछ समय के लिए कुछ टेंपो दूसरे जगहों में शिफ्ट कर दिए गए । बाद में उन टेंपो को फिर से उन्हीं रुटों पर दौड़ाकर ट्रैफिक जाम किया जा रहा है। इतना ही नहीं देहात के टेंपो सीएनजी गैस की फिलिंग के बहाने शहर में दौड़ रहे हैं। जबकि कई बार अभियान चलाकर दावे किए गए कि काफी टेंपो हटा दिए हैं लेकिन शहर में तो कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।