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Bareilly News: साल भर में निकलते हैं 2407 जुलूस, इंतजाम में खर्च हो रही पुलिस की ऊर्जा
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बरेली। सुन्नी मसलक से जुड़े बरेलवी सिलसिले और नाथ मंदिरों की शृंखला वाले बरेली में धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। यहां पर साल भर में सभी धर्मों के 2407 से ज्यादा जुलूस व शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। इससे कई बार जाम लगता है और लोगों को परेशानी होती है। इसके इंतजाम में पुलिस की पूरी ऊर्जा लगानी पड़ती है। इसके चलते कानून व्यवस्था बनाने और अपराध नियंत्रण के दूसरे काम प्रभावित होते हैं।
जिले में बेहिसाब शोभायात्राएं व जुलूसों के आयोजन के चलते आयोजकों से ज्यादा मशक्कत संबंधित इलाके की पुलिस प्रशासन करनी पड़ती है। एक जुलूस निकलवाने के लिए पुलिस को ड्यूटी लगाने से लेकर कई अन्य तरह के सुरक्षा बंदोबस्त करने होते हैं। इस काम में कम से कम तीन दिन लगते हैं। इतनी तैयारी के बाद कुछ घंटे का जुलूस निकल पाता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक चार हजार की भीड़ के जुलूस को निकलवाने में करीब डेढ़ सौ पुलिसकर्मियों को लगाना पड़ता है। बड़े उर्स व आयोजनों के लिए तो दूसरे जिलों से पुलिसकर्मियों को बुलाया जाता है। इसके लिए उन्हें वेतन के अलावा यात्रा व भोजन भत्ता पर खर्च करना पड़ता है।
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विवेचना से लेकर गिरफ्तारी तक होती है प्रभावित
- पुलिस के कई जरूरी काम इन जुलूसों व आयोजनों की वजह से प्रभावित होते हैं। मुकदमों की विवेचना, दूसरे जिलों और प्रांतों में दबिश जैसे जरूरी कामों पर भी असर पड़ता है। इन जुलूसों में खुराफाती तत्व शामिल होकर कानून व्यवस्था खराब न कर दें, इसके लिए पहले से अराजक तत्वों पर नजर रखी जाती है।
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भोजीपुरा में सबसे ज्यादा जुलूस, फतेहगंज पूर्वी में सबसे कम
साल भर में सबसे अधिक 210 जुलूस भोजीपुरा थाना क्षेत्र में निकाले जाते हैं। शेरगढ़ थाना क्षेत्र में 185 जुलूस, देवरनियां में 162, बहेड़ी में 148, किला में 141, सीबीगंज 117, बारादरी में 110, शीशगढ़ में 136, नवाबगंज में 136 और शाही में 102 जुलूस निकाले जाते हैं। सबसे कम 14 जुलूस फतेहगंज पूर्वी थाना क्षेत्र में निकाले जाते हैं। कोतवाली में केवल 53 जुलूस निकाले जाते हैं पर सर्वाधिक बड़े आयोजन इसी क्षेत्र के तंग गलियों में निकाले जाते हैं।
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बॉक्स फॉर्मेशन में लगाई जाती है ड्यूटी
- पुलिस अफसरों ने बताया कि जुलूस में बॉक्स फॉर्मेशन (बक्से की संरचना) में फोर्स की ड्यूटी लगाई जाती है। इसमें जुलूस के आगे-पीछे और दाएं-बाएं चारों तरफ सुरक्षा रखनी पड़ती है। बड़े जुलूसों में पीएसी रखना अनिवार्य है। छतों पर भी सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं। यूपी 112 की गाड़ियां जुलूस के साथ मय कैमरे के साथ लगाई जाती हैं। अग्निशमन गाड़ी व एंबुलेंस साथ रहती है। जिस जुलूस में 150 पुलिसकर्मी लगाए जाते हैं, उसके साथ पुलिस की न्यूनतम 10 गाड़ियां रखनी होती हैं। ब्यूरो
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- जिले में बड़ी संख्या में शोभायात्राएं व जुलूस निकाले जाते हैं। चूंकि यह सीधे कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला होता है। इसलिए पुलिस प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतनी होती है। आयोजकों से भी सहयोग लिया जाता है। - अनुराग आर्य, एसएसपी
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जिले में बेहिसाब शोभायात्राएं व जुलूसों के आयोजन के चलते आयोजकों से ज्यादा मशक्कत संबंधित इलाके की पुलिस प्रशासन करनी पड़ती है। एक जुलूस निकलवाने के लिए पुलिस को ड्यूटी लगाने से लेकर कई अन्य तरह के सुरक्षा बंदोबस्त करने होते हैं। इस काम में कम से कम तीन दिन लगते हैं। इतनी तैयारी के बाद कुछ घंटे का जुलूस निकल पाता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक चार हजार की भीड़ के जुलूस को निकलवाने में करीब डेढ़ सौ पुलिसकर्मियों को लगाना पड़ता है। बड़े उर्स व आयोजनों के लिए तो दूसरे जिलों से पुलिसकर्मियों को बुलाया जाता है। इसके लिए उन्हें वेतन के अलावा यात्रा व भोजन भत्ता पर खर्च करना पड़ता है।
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विवेचना से लेकर गिरफ्तारी तक होती है प्रभावित
- पुलिस के कई जरूरी काम इन जुलूसों व आयोजनों की वजह से प्रभावित होते हैं। मुकदमों की विवेचना, दूसरे जिलों और प्रांतों में दबिश जैसे जरूरी कामों पर भी असर पड़ता है। इन जुलूसों में खुराफाती तत्व शामिल होकर कानून व्यवस्था खराब न कर दें, इसके लिए पहले से अराजक तत्वों पर नजर रखी जाती है।
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भोजीपुरा में सबसे ज्यादा जुलूस, फतेहगंज पूर्वी में सबसे कम
साल भर में सबसे अधिक 210 जुलूस भोजीपुरा थाना क्षेत्र में निकाले जाते हैं। शेरगढ़ थाना क्षेत्र में 185 जुलूस, देवरनियां में 162, बहेड़ी में 148, किला में 141, सीबीगंज 117, बारादरी में 110, शीशगढ़ में 136, नवाबगंज में 136 और शाही में 102 जुलूस निकाले जाते हैं। सबसे कम 14 जुलूस फतेहगंज पूर्वी थाना क्षेत्र में निकाले जाते हैं। कोतवाली में केवल 53 जुलूस निकाले जाते हैं पर सर्वाधिक बड़े आयोजन इसी क्षेत्र के तंग गलियों में निकाले जाते हैं।
बॉक्स फॉर्मेशन में लगाई जाती है ड्यूटी
- पुलिस अफसरों ने बताया कि जुलूस में बॉक्स फॉर्मेशन (बक्से की संरचना) में फोर्स की ड्यूटी लगाई जाती है। इसमें जुलूस के आगे-पीछे और दाएं-बाएं चारों तरफ सुरक्षा रखनी पड़ती है। बड़े जुलूसों में पीएसी रखना अनिवार्य है। छतों पर भी सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं। यूपी 112 की गाड़ियां जुलूस के साथ मय कैमरे के साथ लगाई जाती हैं। अग्निशमन गाड़ी व एंबुलेंस साथ रहती है। जिस जुलूस में 150 पुलिसकर्मी लगाए जाते हैं, उसके साथ पुलिस की न्यूनतम 10 गाड़ियां रखनी होती हैं। ब्यूरो
- जिले में बड़ी संख्या में शोभायात्राएं व जुलूस निकाले जाते हैं। चूंकि यह सीधे कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला होता है। इसलिए पुलिस प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतनी होती है। आयोजकों से भी सहयोग लिया जाता है। - अनुराग आर्य, एसएसपी