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Bareilly News: करीब एक करोड़ की जीएसटी दबाए हैं 217 ईंट भट्ठा संचालक, नोटिस
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बरेली। मंडल भर के ईंट भट्ठा संचालक मानकों के अनुसार जीएसटी नहीं जमा कर रहे हैं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग ने ईंट के उत्पादन और बिक्री से टैक्स का कैल्कुलेशन किया। उससे पता चला कि मंडल भर के 217 ईंट भट्ठा संचालक करीब एक करोड़ रुपये की जीएसटी दबाए बैठे हैं। भट्ठा संचालकों ने इस वर्ष 30 फीसदी कम टैक्स दिया है। इन भट्ठा संचालकों को नोटिस भेजा गया है।
मंडल भर में 712 ईंट भट्ठे हैं। भट्ठा वालों को छह फीसदी टैक्स देना होता है। पिछले दिनों ईंट उत्पादन के सापेक्ष जीएसटी जमा किए जाने की समीक्षा की गई। उससे पता चला कि बरेली के 117 और शाहजहांपुर के 100 ऐसे कारोबारी हैं, जिन्होंने बीते वर्ष के सापेक्ष 30 फीसदी कम टैक्स दिया। उत्पादन के सापेक्ष बाजार भाव का मिलान किया गया तो यह तथ्य प्रकाश में आया कि उन्होंने करीब एक करोड़ रुपये टैक्स कमा दिया। कम टैक्स देने वाले कारोबारियों की सूची तैयार कर ली गई है। उन्हें ईंट उत्पादन के सापेक्ष टैक्स हर हाल में जमा करना होगा। इन भट्ठा संचालकों को नोटिस भेजा गया है। वहीं, पीलीभीत और बदायूं के ईंट भट्ठा कारोबारियों ने बीते वर्ष के सापेक्ष 20 फीसदी ज्यादा टैक्स जमा किया है।
यूं पकड़ा भट्ठा संचालकों का खेल
भट्ठा पर ईंट की फुंकाई का कार्य मार्च से जून तक चलता है। एक भट्ठे पर न्यूनतम 10 लाख ईंट का उत्पादन प्रतिमाह होता है। कुछ पर 15 लाख से भी ज्यादा है। इस लिहाज से फुंकाई सीजन के दौरान ईंट का उत्पादन 35 से 40 लाख प्रति भट्ठा है। ईंट की बिक्री का बाजार भाव औसतन छह हजार रुपये है। वार्षिक टर्नओवर करीब दो से 2.5 करोड़ रुपये होना चाहिए। बिना आईटीसी जीएसटी दर छह फीसदी के हिसाब से दस से 12 लाख रुपये की जीएसटी होनी चाहिए। लेकिन कारोबारियों ने अब तक एक से दो लाख रुपये ही टैक्स दिया। इसलिए उन पर करीब एक करोड़ का टैक्स बकाया है। अजीत प्रताप सिंह
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उत्पादन, बिक्री के अनुपात में टैक्स दें कारोबारी
अपर आयुक्त ग्रेड-1 दिनेश कुमार मिश्र ने बताया कि मंडल में 712 ईंट भट्ठा संचालक जीएसटी में पंजीकृत हैं। वार्षिक 2.68 करोड़ रुपये टैक्स जमा होता है। उस हिसाब से टैक्स जमा नहीं किया गया है। टैक्स कम जमा करने वालों की सूची बन गई है। उनको नोटिस भेजा गया है। वह 31 मार्च तक टैक्स जमा कर सकते हैं।
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मंडल भर में 712 ईंट भट्ठे हैं। भट्ठा वालों को छह फीसदी टैक्स देना होता है। पिछले दिनों ईंट उत्पादन के सापेक्ष जीएसटी जमा किए जाने की समीक्षा की गई। उससे पता चला कि बरेली के 117 और शाहजहांपुर के 100 ऐसे कारोबारी हैं, जिन्होंने बीते वर्ष के सापेक्ष 30 फीसदी कम टैक्स दिया। उत्पादन के सापेक्ष बाजार भाव का मिलान किया गया तो यह तथ्य प्रकाश में आया कि उन्होंने करीब एक करोड़ रुपये टैक्स कमा दिया। कम टैक्स देने वाले कारोबारियों की सूची तैयार कर ली गई है। उन्हें ईंट उत्पादन के सापेक्ष टैक्स हर हाल में जमा करना होगा। इन भट्ठा संचालकों को नोटिस भेजा गया है। वहीं, पीलीभीत और बदायूं के ईंट भट्ठा कारोबारियों ने बीते वर्ष के सापेक्ष 20 फीसदी ज्यादा टैक्स जमा किया है।
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यूं पकड़ा भट्ठा संचालकों का खेल
भट्ठा पर ईंट की फुंकाई का कार्य मार्च से जून तक चलता है। एक भट्ठे पर न्यूनतम 10 लाख ईंट का उत्पादन प्रतिमाह होता है। कुछ पर 15 लाख से भी ज्यादा है। इस लिहाज से फुंकाई सीजन के दौरान ईंट का उत्पादन 35 से 40 लाख प्रति भट्ठा है। ईंट की बिक्री का बाजार भाव औसतन छह हजार रुपये है। वार्षिक टर्नओवर करीब दो से 2.5 करोड़ रुपये होना चाहिए। बिना आईटीसी जीएसटी दर छह फीसदी के हिसाब से दस से 12 लाख रुपये की जीएसटी होनी चाहिए। लेकिन कारोबारियों ने अब तक एक से दो लाख रुपये ही टैक्स दिया। इसलिए उन पर करीब एक करोड़ का टैक्स बकाया है। अजीत प्रताप सिंह
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उत्पादन, बिक्री के अनुपात में टैक्स दें कारोबारी
अपर आयुक्त ग्रेड-1 दिनेश कुमार मिश्र ने बताया कि मंडल में 712 ईंट भट्ठा संचालक जीएसटी में पंजीकृत हैं। वार्षिक 2.68 करोड़ रुपये टैक्स जमा होता है। उस हिसाब से टैक्स जमा नहीं किया गया है। टैक्स कम जमा करने वालों की सूची बन गई है। उनको नोटिस भेजा गया है। वह 31 मार्च तक टैक्स जमा कर सकते हैं।