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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को मिला फर्जी डाटा तो होगी मुश्किल
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में टेकिप (टेक्निकल एजूकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम) के तहत मंगलवार को तीन दिवसीय चौथे अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ। इस बार सेमिनार की थीम ‘एकेडमिक रिसर्च इन इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट एंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी’ निर्धारित की गई है। पहले दिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य में उसकी चुनौतियों पर चर्चा की गई।
मंगलवार को विशिष्टि अतिथि के तौर पर इंडोनेशिया के प्रोफेसर प्रीहोंडाको ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के भविष्य एवं चुनौतियों पर बात की। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सारे काम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिये ही होंगे। गूगल असिस्टेंस, रोबोट आदि भविष्य की तमाम मशीनें इसी पर काम कर रही हैं। मगर इसमें फर्जी डाटा बड़ी चुनौती है। अगर मशीनों को फर्जी डाटा मिलेगा तो उनका परिणाम भी इससे प्रभावित होगा और गलत परिणाम मुश्किल में डाल सकते हैं। इसकी रोकथाम के लिए हमें ‘डीप लर्निंग’ पर ज्यादा गहराई से काम करना होगा ताकि मशीनों तक फर्जी डाटा नहीं पहुंच सके। अगर ऐसा करने में हम शत प्रतिशत कामयाब हुए तो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के नुकसान से हम बच सकेंगे अन्यथा असली और फर्जी डाटा से बचाव काफी मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग बढ़ने से भविष्य में कम तकनीकी ज्ञान रखने वाले लोगों के रोजगार की संभावनाएं भी कम होंगी। इस पर निर्भरता बढ़ने के चलते फिर सिर्फ उन्हीं लोगों को फायदा होगा जो तकनीकी रूप से काफी सक्षम होंगे। इससे पूर्व डॉ. मनोज कुमार सिंह ने सभी का परिचय दिया और बंगलुरू के बीएमएस कॉलेज से आए डॉ. एस गौरीशंकर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। पहले दिन के आयोजन के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल रहे। इस दौरान डॉ. एके सिंह, डॉ. एस अखिला, डॉ. जी. पूर्णिमा, डॉ. मनोज यादव समेत तमाम प्रोफेसर मौजूद रहे।
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मंगलवार को विशिष्टि अतिथि के तौर पर इंडोनेशिया के प्रोफेसर प्रीहोंडाको ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के भविष्य एवं चुनौतियों पर बात की। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सारे काम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिये ही होंगे। गूगल असिस्टेंस, रोबोट आदि भविष्य की तमाम मशीनें इसी पर काम कर रही हैं। मगर इसमें फर्जी डाटा बड़ी चुनौती है। अगर मशीनों को फर्जी डाटा मिलेगा तो उनका परिणाम भी इससे प्रभावित होगा और गलत परिणाम मुश्किल में डाल सकते हैं। इसकी रोकथाम के लिए हमें ‘डीप लर्निंग’ पर ज्यादा गहराई से काम करना होगा ताकि मशीनों तक फर्जी डाटा नहीं पहुंच सके। अगर ऐसा करने में हम शत प्रतिशत कामयाब हुए तो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के नुकसान से हम बच सकेंगे अन्यथा असली और फर्जी डाटा से बचाव काफी मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग बढ़ने से भविष्य में कम तकनीकी ज्ञान रखने वाले लोगों के रोजगार की संभावनाएं भी कम होंगी। इस पर निर्भरता बढ़ने के चलते फिर सिर्फ उन्हीं लोगों को फायदा होगा जो तकनीकी रूप से काफी सक्षम होंगे। इससे पूर्व डॉ. मनोज कुमार सिंह ने सभी का परिचय दिया और बंगलुरू के बीएमएस कॉलेज से आए डॉ. एस गौरीशंकर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। पहले दिन के आयोजन के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल रहे। इस दौरान डॉ. एके सिंह, डॉ. एस अखिला, डॉ. जी. पूर्णिमा, डॉ. मनोज यादव समेत तमाम प्रोफेसर मौजूद रहे।
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