फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   ‘श्रीराम विदेश नहीं जाते तो कैसे होता रावण का अंत’

‘श्रीराम विदेश नहीं जाते तो कैसे होता रावण का अंत’

Wed, 27 Mar 2019 01:23 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Wed, 27 Mar 2019 01:23 AM IST
विज्ञापन
‘श्रीराम विदेश नहीं जाते तो कैसे होता रावण का अंत’
‘श्रीराम विदेश नहीं जाते तो कैसे होता रावण का अंत’ - फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम राज्य त्यागकर वन को नहीं जाते तो उन्हें ऋषि-मुनियों का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता। संसार के सबसे बड़े आततायी रावण का अंत भी नहीं होता। वनों की यात्रा करने से ही श्रीराम को अनेक चमत्कारी अनुभव प्राप्त हुए। सभी को दुनिया की गति के साथ चलना चाहिए। देश-विदेश घूमना चाहिए। इससे प्राप्त अनुभव समाज, देश और परिवार के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं आशीर्वचनों के साथ मंगलवार को संत मोरारी बापू ने श्रीराम कथा की शुरुआत की।
विज्ञापन

कत्था फैक्टरी में श्रीराम कथा प्रेमयज्ञ समिति की ओर से चल रही श्रीराम कथा में चौथे दिन काफी संख्या में लोग पहुंचे। संत मोरारी बापू ने बताया कि आम आदमी के क्रोध और लोभ से श्रीराम का क्रोध और लोभ पूरी तरह अलग है। जब आम आदमी क्रोध करता है तो वह विकास की गति को धीमा कर खुद को और दूसरों को नुकसान पहुंचाता है। वहीं, जब भगवान क्रोध करते हैं तो समाज का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि कितनी ही विपरीत परिस्थितियां क्यों न हाें, युवाओं को बगैर ध्यान, साधना किए घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। ध्यान से कई समस्याओं का समाधान आसानी से मिल जाता है।
विज्ञापन

भक्ति गीतों से गूंजा पंडाल

‘श्रीराम विदेश नहीं जाते तो कैसे होता रावण का अंत’
भक्ति गीतों से गूंजा पंडाल - फोटो : अमर उजाला, बरेली

भक्ति गीतों से गूंजा पंडाल

मंगलवार की शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। इसमें कोलकाता से आए सागरिका और अपराजिता ने हेमंत कुमार के गीतों की तर्ज पर भक्ति गीतों से श्रद्धालुओं को सराबोेर कर दिया। ‘न ये चांद होगा न ये तारे होंगे’, ‘काशी देखी तीरथ देखे, कहीं भी मन न लगा’, ‘तेरे द्वार खड़ा एक जोगी’, ‘याद किया दिल ने, कहा तुम कहां हो’, ‘तुम्हारा इंतजार है पुकार लो..’, ‘न तुम हमें जानो’, ‘बेकरार करके हमें यूं न जाइए’ आदि गीत सुनाकर माहौल को आनंदमय बना दिया।

बरेली की महिमा भी बताई

संत मोरारी बापू ने बताया कि बरेली की चारों दिशाओं में नाथ हैं। नाथ यानी जो ब्याही गई हो। ऐसे में बरेली का अर्थ दुल्हन होता है। उन्होंने बताया कि नाथ परंपरा में भी सबसे बड़ा नियम ध्यान का माना गया है। पूरी परंपरा का जो ज्ञान कराए वह ध्यान है। बापू बोले, प्रभु के सामने युवा किसी कारणवश झुक न सकें तो माता-पिता का ही सम्मान करें। उनके चरण छूकर घर से निकलने पर देवतुल्य माता-पिता का आशीर्वाद सुरक्षा करेगा।

श्रीराम कथा से रिटायर नहीं होऊंगा

बापू ने बताया कि वह श्रीराम कथा का श्रवण कराने से पहले शिक्षक थे। बोले, शिक्षक के पद से रिटायर हो गया हूं, लेकिन श्रीराम कथा से कभी रिटायर नहीं होऊंगा। आखिरी सांस तक कथा करता रहूंगा। उन्होेंने अंतर्मन को ध्यान से और शरीर के बाहरी अंगों को स्नान से शुद्ध करने का महत्व बताया।

आम इंसान बनकर कथा सुनो

आरती के दौरान पंडाल में मोहल्ला शाहाबाद निवासी एक महिला की सोने की चेन कट गई। इससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसकी जानकारी बापू को हुई तो उन्होंने कथा में करोड़पति के बजाय साधारण इंसान बनकर आने का सुझाव दिया। महिला ने ईश्वर की दी वस्तु उन्हें ही समर्पित होने की बात कही।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed