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विधायक से नाराज ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन कर जताया विरोध
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फरीदपुर। रात्रि चौपाल में विधायक और ग्रामीणों के बीच कहासुनी मामले ने मंगलवार को तूल पकड़ लिया। विकास न कराए जाने का आरोप लगाकर ग्रामीणों ने तहसील दिवस पर स्कूल में धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। हालांकि ग्रामीणों ने गिले-शिकवे दूर करने के लिए दोपहर तक विधायक को बुलाया था, लेकिन विधायक गांव नहीं पहुंचे तो ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन किया।
गांव नवादा वन में विकास कार्यों को लेकर रात्रि चौपाल में क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर श्याम बिहारी लाल का गांव के कुछ युवकों से विवाद हो गया था। उनका आरोप था कि विधायक ने गांव में विकास कार्य नहीं कराए, जबकि विधायक का कहना था कि गांव में ऐसा कोई काम नहीं है, जो हुआ ना हो। इसी को लेकर विधायक और गांव वालों में कहासुनी हो गई थी। गांव वालों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि विधायक मंगलवार दोपहर तक गांव आकर अपने गिले शिकवे दूर कर लें। वरना वह धरना-प्रदर्शन करेंगे। विधायक तय समय पर दोपहर तक गांव नहीं पहुंचे तो गांव वालों ने स्कूल में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उसके बाद तहसील दिवस में जाकर अफसरों को 12 सूत्रीय ज्ञापन दिया । इसमें भी क्षेत्रीय विधायक से गांव आकर विकास कार्य कराने और नाराजगी दूर करने की बात कही गई। ज्ञापन में गांव वालों ने राजकीय पॉलीटेक्निक, आईटीआई खेल मैदान, फ्लड लाइट ,स्कूल में चाहर दीवारी, शमशान भूमि की बाउंड्री कराने की मांग की। देर शाम ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। उधर, गांव वाले एक अन्य विधायक को भी धरना-प्रदर्शन में बुलाना चाहते थे, लेकिन संघ पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप कर दूसरे विधायक को धरना-प्रदर्शन में आने से रोका। हालांकि दूसरे विधायक का कहना था कि वह अगर गांव जाते भी तो भी उनको समझाकर ही आते कि अपने क्षेत्रीय विधायक से गिले-शिकवे दूर करो। मगर, संघ पदाधिकारियों ने फोन करके दूसरे विधायक को गांव जाने से रोक दिया। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि कुछ दिनों में आचार संहिता लगने वाली है। गांव वालों की मांगे एकदम से पूरी नहीं हो सकतीं। आचार संहिता के बाद जो भी मांगे हैं, उनको सरकार पूरा करेगी। संघ के लोगों ने धरना-प्रदर्शन करने वालों को समझाया कि श्मशान की जमीन के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। बाकी मांगें भी पूरी की जाएंगी। धरना-प्रदर्शन करने वालों में नंदराम उपाध्याय, बी डी उपाध्याय, उमाशंकर, ,नत्थू, कालीचरण, नेम सिंह, पृथ्वीराज, अतिराज, धर्मेन्द्र, छोटे, वीरपाल, महेश पाल आदि शामिल थे।
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गांव नवादा वन में विकास कार्यों को लेकर रात्रि चौपाल में क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर श्याम बिहारी लाल का गांव के कुछ युवकों से विवाद हो गया था। उनका आरोप था कि विधायक ने गांव में विकास कार्य नहीं कराए, जबकि विधायक का कहना था कि गांव में ऐसा कोई काम नहीं है, जो हुआ ना हो। इसी को लेकर विधायक और गांव वालों में कहासुनी हो गई थी। गांव वालों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि विधायक मंगलवार दोपहर तक गांव आकर अपने गिले शिकवे दूर कर लें। वरना वह धरना-प्रदर्शन करेंगे। विधायक तय समय पर दोपहर तक गांव नहीं पहुंचे तो गांव वालों ने स्कूल में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उसके बाद तहसील दिवस में जाकर अफसरों को 12 सूत्रीय ज्ञापन दिया । इसमें भी क्षेत्रीय विधायक से गांव आकर विकास कार्य कराने और नाराजगी दूर करने की बात कही गई। ज्ञापन में गांव वालों ने राजकीय पॉलीटेक्निक, आईटीआई खेल मैदान, फ्लड लाइट ,स्कूल में चाहर दीवारी, शमशान भूमि की बाउंड्री कराने की मांग की। देर शाम ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। उधर, गांव वाले एक अन्य विधायक को भी धरना-प्रदर्शन में बुलाना चाहते थे, लेकिन संघ पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप कर दूसरे विधायक को धरना-प्रदर्शन में आने से रोका। हालांकि दूसरे विधायक का कहना था कि वह अगर गांव जाते भी तो भी उनको समझाकर ही आते कि अपने क्षेत्रीय विधायक से गिले-शिकवे दूर करो। मगर, संघ पदाधिकारियों ने फोन करके दूसरे विधायक को गांव जाने से रोक दिया। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि कुछ दिनों में आचार संहिता लगने वाली है। गांव वालों की मांगे एकदम से पूरी नहीं हो सकतीं। आचार संहिता के बाद जो भी मांगे हैं, उनको सरकार पूरा करेगी। संघ के लोगों ने धरना-प्रदर्शन करने वालों को समझाया कि श्मशान की जमीन के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। बाकी मांगें भी पूरी की जाएंगी। धरना-प्रदर्शन करने वालों में नंदराम उपाध्याय, बी डी उपाध्याय, उमाशंकर, ,नत्थू, कालीचरण, नेम सिंह, पृथ्वीराज, अतिराज, धर्मेन्द्र, छोटे, वीरपाल, महेश पाल आदि शामिल थे।
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