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गर्भवती होने के बाद कराई नसबंदी, जांच में पकड़ी गई
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बरेली। परिवार नियोजन के तहत मिल रहे मुआवजे को हासिल करने के लिए एक महिला ने नसबंदी फेल होने का आरोप लगा दिया। टीम बनाकर मामले की पड़ताल कराई गई तो पता चला कि महिला नसबंदी कराने से करीब डेढ़ माह पूर्व ही गर्भवती थी। इसके बाद उसने नसबंदी कराई और फिर मुआवजा लेने के लिए शिकायत करके दावा ठोंका। मामला पकड़ में आने के बाद सीएमओ ने उसके मुआवजे का आवेदन निरस्त कर दिया है।
मीरगंज के सिंघाई मुरावान निवासी प्रीती देवी ने 24 जुलाई को परिवार नियोजन के तहत नसबंदी कराई थी। करीब 5 माह बाद प्रीती ने सीएमओ से नसबंदी फेल होने की शिकायत करते हुए मुआवजा के लिए आवेदन कर दिया। मामले पर जांच कमेटी बनाई गई। नसबंदी फेल होने के आरोपों को जांचा गया तो पता चला कि नसबंदी कराने के आठ सप्ताह पहले से ही प्रीती गर्भवती थी। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने बताया कि गर्भवती होने के बाद नसबंदी कराने पर मुआवजा देने का कोई औचित्य ही नहीं है। महिला ने गुमराह करने का प्रयास किया लेकिन जांच में ‘खेल’ का पता चला। उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया है।
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मीरगंज के सिंघाई मुरावान निवासी प्रीती देवी ने 24 जुलाई को परिवार नियोजन के तहत नसबंदी कराई थी। करीब 5 माह बाद प्रीती ने सीएमओ से नसबंदी फेल होने की शिकायत करते हुए मुआवजा के लिए आवेदन कर दिया। मामले पर जांच कमेटी बनाई गई। नसबंदी फेल होने के आरोपों को जांचा गया तो पता चला कि नसबंदी कराने के आठ सप्ताह पहले से ही प्रीती गर्भवती थी। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने बताया कि गर्भवती होने के बाद नसबंदी कराने पर मुआवजा देने का कोई औचित्य ही नहीं है। महिला ने गुमराह करने का प्रयास किया लेकिन जांच में ‘खेल’ का पता चला। उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया है।
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