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शादी के लिए आज भी बेची जा रहीं बेटियां
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sat, 29 Sep 2018 11:24 PM IST
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आज हमने कितनी भी तरक्की कर ली हो, लेकिन समाज में बेटियां आज खरीदी बेची जाती है। कभी देह व्यापार के लिए तो कभी मजदूरी कराने के लिए। आज सबसे ज्यादा लड़कियां शादी के लिए खरीदी बेची जाती है। जी हां, हकीकत चौंकाने वाली है। बरेली एक बड़ा केंद्र है जहां बाहर से लड़कियां लाई जाती हैं और यहां उनकी बोली लगती है। बरेली कॉलेज के सामाजिक विज्ञान विभाग के एसोसिएशट प्रोफेसर उमाचरण गंगवार के सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बाहर से लड़कियां लाकर यहां खरीदने बेचने का सिलसिला एक अर्से से चल रहा है। सर्वे में जब उन्होंने ऐसे परिवारों से बात की तो उन महिलाओं की दर्द आंसू बनकर छलक आया। विडंबना ये हैं कि उन्होंने यहां आकर उन परिवारों को स्वीकार कर लिया, लेकिन उस परिवार और समाज उनको नहीं स्वीकारा। आलम यह है कि उनके बच्चों की शादियां तक नहीं हो पा रही हैं। समाज में रहकर भी उनको समाज में हीन भावना से देखा जा रहा है। सर्वे में भोजीपुरा के आठ गांव के 58 परिवार लिए गए और पीलीभीत के एक गांव में रह रहे एक परिवार को शामिल किया गया। अब डॉ. उमाचरण इसको लेकर पूरे मंडल में सर्वे करने की तैयारी में हैं।
उच्च अध्ययन संस्थान से मिला है प्रोजेक्ट
डॉ. उमा चरण को भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में एसोसिएट बनाया गया है। ह्यूमन ट्रैफिकिंग फॉर मैरीज विषय पर उनको प्रोजेक्ट मिला है। इस प्रोजेक्ट वह रुहेलखंड परिक्षेत्र में उन परिवारों पर सर्वे करेंगे जहां शादी के लिए लड़कियां खरीदकर लाई गईं। डॉ. उमा चरण कहत हैं कि सबसे ज्यादा बिहार, बंगाल, उड़ीसा, आसाम, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके, नेपाल से महिलाएं लाई जाती हैं। एक सिंडिकेट बना हुआ जो ऐसे लोगों के ट्रैस करता है। उनके ही परिवार में किसी को पैसे का लालच देकर लड़की खरीदता है और क्लाइंट तक पहुंचाया जाता है। नॉर्थ इंडिया में इसका पूरा जाल फैला हुआ है। वे लोग लड़कियां खरीदते हैं जिनकी पत्नी की मृत्यु हो गई, शादी नहीं हो रही।
59 परिवारों का किया सर्वे, झलक आया महिलाओं का दर्द
डॉ. उमाचरण गंगवार ने भोजीपुरा के आठ गांव और एक पीलीभीत के सुमरिया गांव में सर्वे किया। भोजीपुरा में आठ गांव में 58 परिवार और पीलीभीत में एक परिवार का सर्वे किया। बातचीत में महिलाओं का दर्द छलक आया। उनके साथ उनके अपनों ने ही दगा की। उनको चंद रुपयों के लिए बेच दिया गया। आज भले ही वह अपने परिवार के साथ रहती हों, लेकिन सामाजिक में उनको वो इज्जत आज भी नहीं मिल पा रही है। उनके बच्चों की शादियां तक नहीं हो पा रही हैं।
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भोजीपुरा के इन गांव में हुआ सर्वे
सगलपुर, लटूरी, अभयपुर, भोजीपुरा, दभोरा, मझौआ, अंबरपुर, धंगौरा
बंगाल सरकार की रिपोर्ट में आया था बरेली का नाम
2009 में बंगाल सरकार ने एनएचआरसी के सहयोग से रिटायर आईपीएस अधिकारी शंकर सेन व अन्य अधिकारियों के माध्यम से स्टडी कराई। इसमें उन जगहों के नाम सामने आए जहां सबसे ज्यादा मानव तस्करी होती थी। उसमें बरेली को भी एक केंद्र माना गया था जहां लड़कियां ठहराई जाती हैं। यहां उनका सौदा होता है।
केस 1 : पिथौरागढ़ की रहने वाली एक महिला को तीस साल पहले उसके ही देवर ने पीलीभीत में लाकर महज पांच हजार रुपये में बेच दिया। पिथौरागढ़ में ही उसकी शादी हुई। उसे एक बेटा भी हुआ। कुछ दिन बाद उसका पति का मजदूरी के लिए बाहर गया। वह दो साल तक नहीं लौटा। उसका देवर उसे बहला फुसलाकर पीलीभीत लाया। पीलीभीत स्टेशन पर एक व्यक्ति के हाथों उसे बेच दिया। महिला को सुबह पता चला कि उसे बेच दिया गया। उसके पास र्कोई विकल्प नहीं था तो वह अधेड़ व्यक्ति के साथ उसके गांव सुमरिया चली गई। उस व्यक्ति की पत्नी की मृत्यु हो गई थी। वह सिर्फ संतान के लिए शादी करना चाहता था। हालांकि उससे संतान नहीं हुई। बाद में उसने महिला को प्रताड़ित भी बहुत किया। कुछ वर्षों बाद उस व्यक्ति की मौत हो गई। महिला का बेटा सरकारी नौकरी में है। गांव में तीस वर्ष रहने के बावजूद उसकी सामाजिक स्वीकारता नहीं हो सकी। वह खरीदकर लाई गई सिफ इस वजह से उसके बेटे की शादी आज नहीं हो पा रही। आज महिला को अपने गांव का नाम भी याद नहीं रहा। हालांकि उसका बेटा कई बार पिथौरागढ़ अपने घर वालों की तलाश में गया लेकिन कोई मिला नहीं।
केस 2 : आसाम की एक लड़की की शादी हुई। उसके दो बच्चे भी हुए। पति शराबी था, आए दिन उसके साथ मारपीट करता था। पति का एक दोस्त था जिसका उसके घर काफी आना जाना था। वह महिला को सांत्वना देता था। उसने महिला को अपनी बातों में फंसाया। कहा कि उसे साथ भाग चलो और आराम से जिंदगी कटेगी। वह उस व्यक्ति के साथ अपने बच्चों को लेकर भाग आई। कई जगह होटलों में रुकी, कई लोगों उसे मिलाया गया। बाद में महिला को वह बरेली लेकर आया गया। यहां महिला को एक व्यक्ति के पास रखा और वह खुद गायब हो गया। महिला को बाद में पता चला कि उसे बेच दिया गया। उस व्यक्ति ने उससे शादी की। भोजीपुरा के एक गांव में वह रहती है। हालांकि गांव में उसको वो इज्जत नहीं मिल पाई। हालात यह हैं कि उसे बच्चों की शादियां नहीं हो पा रही हैं।
केस 3 : बंगाल की एक लड़की भी धोखे का शिकार हुई। उसका पिता एक ठेकेदार के यहां मजदूरी करता था। ठेकेदार बरेली का था। ठेकेदार ने उस मजदूर की लड़की के साथ शादी की। शादी करके बरेली लाया। यहां कुछ दिन अपने पास रखने के बाद उसने लड़की को एक 35 साल के व्यक्ति के हाथों बेच दिया। उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी। वह आज भी बरेली में परिवार के साथ रहती है।
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उच्च अध्ययन संस्थान से मिला है प्रोजेक्ट
डॉ. उमा चरण को भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में एसोसिएट बनाया गया है। ह्यूमन ट्रैफिकिंग फॉर मैरीज विषय पर उनको प्रोजेक्ट मिला है। इस प्रोजेक्ट वह रुहेलखंड परिक्षेत्र में उन परिवारों पर सर्वे करेंगे जहां शादी के लिए लड़कियां खरीदकर लाई गईं। डॉ. उमा चरण कहत हैं कि सबसे ज्यादा बिहार, बंगाल, उड़ीसा, आसाम, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके, नेपाल से महिलाएं लाई जाती हैं। एक सिंडिकेट बना हुआ जो ऐसे लोगों के ट्रैस करता है। उनके ही परिवार में किसी को पैसे का लालच देकर लड़की खरीदता है और क्लाइंट तक पहुंचाया जाता है। नॉर्थ इंडिया में इसका पूरा जाल फैला हुआ है। वे लोग लड़कियां खरीदते हैं जिनकी पत्नी की मृत्यु हो गई, शादी नहीं हो रही।
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59 परिवारों का किया सर्वे, झलक आया महिलाओं का दर्द
डॉ. उमाचरण गंगवार ने भोजीपुरा के आठ गांव और एक पीलीभीत के सुमरिया गांव में सर्वे किया। भोजीपुरा में आठ गांव में 58 परिवार और पीलीभीत में एक परिवार का सर्वे किया। बातचीत में महिलाओं का दर्द छलक आया। उनके साथ उनके अपनों ने ही दगा की। उनको चंद रुपयों के लिए बेच दिया गया। आज भले ही वह अपने परिवार के साथ रहती हों, लेकिन सामाजिक में उनको वो इज्जत आज भी नहीं मिल पा रही है। उनके बच्चों की शादियां तक नहीं हो पा रही हैं।
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भोजीपुरा के इन गांव में हुआ सर्वे
सगलपुर, लटूरी, अभयपुर, भोजीपुरा, दभोरा, मझौआ, अंबरपुर, धंगौरा
बंगाल सरकार की रिपोर्ट में आया था बरेली का नाम
2009 में बंगाल सरकार ने एनएचआरसी के सहयोग से रिटायर आईपीएस अधिकारी शंकर सेन व अन्य अधिकारियों के माध्यम से स्टडी कराई। इसमें उन जगहों के नाम सामने आए जहां सबसे ज्यादा मानव तस्करी होती थी। उसमें बरेली को भी एक केंद्र माना गया था जहां लड़कियां ठहराई जाती हैं। यहां उनका सौदा होता है।
केस 1 : पिथौरागढ़ की रहने वाली एक महिला को तीस साल पहले उसके ही देवर ने पीलीभीत में लाकर महज पांच हजार रुपये में बेच दिया। पिथौरागढ़ में ही उसकी शादी हुई। उसे एक बेटा भी हुआ। कुछ दिन बाद उसका पति का मजदूरी के लिए बाहर गया। वह दो साल तक नहीं लौटा। उसका देवर उसे बहला फुसलाकर पीलीभीत लाया। पीलीभीत स्टेशन पर एक व्यक्ति के हाथों उसे बेच दिया। महिला को सुबह पता चला कि उसे बेच दिया गया। उसके पास र्कोई विकल्प नहीं था तो वह अधेड़ व्यक्ति के साथ उसके गांव सुमरिया चली गई। उस व्यक्ति की पत्नी की मृत्यु हो गई थी। वह सिर्फ संतान के लिए शादी करना चाहता था। हालांकि उससे संतान नहीं हुई। बाद में उसने महिला को प्रताड़ित भी बहुत किया। कुछ वर्षों बाद उस व्यक्ति की मौत हो गई। महिला का बेटा सरकारी नौकरी में है। गांव में तीस वर्ष रहने के बावजूद उसकी सामाजिक स्वीकारता नहीं हो सकी। वह खरीदकर लाई गई सिफ इस वजह से उसके बेटे की शादी आज नहीं हो पा रही। आज महिला को अपने गांव का नाम भी याद नहीं रहा। हालांकि उसका बेटा कई बार पिथौरागढ़ अपने घर वालों की तलाश में गया लेकिन कोई मिला नहीं।
केस 2 : आसाम की एक लड़की की शादी हुई। उसके दो बच्चे भी हुए। पति शराबी था, आए दिन उसके साथ मारपीट करता था। पति का एक दोस्त था जिसका उसके घर काफी आना जाना था। वह महिला को सांत्वना देता था। उसने महिला को अपनी बातों में फंसाया। कहा कि उसे साथ भाग चलो और आराम से जिंदगी कटेगी। वह उस व्यक्ति के साथ अपने बच्चों को लेकर भाग आई। कई जगह होटलों में रुकी, कई लोगों उसे मिलाया गया। बाद में महिला को वह बरेली लेकर आया गया। यहां महिला को एक व्यक्ति के पास रखा और वह खुद गायब हो गया। महिला को बाद में पता चला कि उसे बेच दिया गया। उस व्यक्ति ने उससे शादी की। भोजीपुरा के एक गांव में वह रहती है। हालांकि गांव में उसको वो इज्जत नहीं मिल पाई। हालात यह हैं कि उसे बच्चों की शादियां नहीं हो पा रही हैं।
केस 3 : बंगाल की एक लड़की भी धोखे का शिकार हुई। उसका पिता एक ठेकेदार के यहां मजदूरी करता था। ठेकेदार बरेली का था। ठेकेदार ने उस मजदूर की लड़की के साथ शादी की। शादी करके बरेली लाया। यहां कुछ दिन अपने पास रखने के बाद उसने लड़की को एक 35 साल के व्यक्ति के हाथों बेच दिया। उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी। वह आज भी बरेली में परिवार के साथ रहती है।