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ऑटो-टेंपो पर कार्रवाई
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हजारों ऑटो हर साल निगम को लगा रहे 50 लाख का चूना
- नगर निगम में पंजीकरण है अनिवार्य, मगर न ऑटो वालों को परवाह न अफसरों को
- टैक्स वसूली का लक्ष्य पूरा करने को हुई शुरुआत, हल्के विरोध पर ही थमी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
हजारों की तादात में शहर में दौड़ रहे ऑटो-टेंपो ट्रैफिक व्यवस्था चौपट करने के साथ ही नगर निगम को हर साल करीब 50 लाख रुपये का चूना लगा रहे हैं। इन्हें नगर निगम में पंजीकरण कराना चाहिए, लेकिन न तो निगम के अफसरों को परवाह है और न ही ऑटो-टेंपो वालों को। टैक्स वसूली का लक्ष्य पूरा करने के लिए सोमवार को निगम अफसरों को इन पर कार्रवाई की याद आई भी तो मामूली विरोध के चलते एक दिन बाद ही थम गई।
नगर निगम की टैक्स नियमावली के मुताबिक, शहर में दौड़ने वाले ऑटो-टेंपो का पंजीकरण अनिवार्य है। इसका शुल्क पांच सौ रुपये निर्धारित है, मगर निगम अफसरों की लापरवाही के चलते सालों से यह प्रक्रिया ठप पड़ी है। इस बार टैक्स दरें कम हुई हैं तो लक्ष्य पूरा करने के लिए नगर निगम को ऑटो-टेंपो की याद आई। सोमवार को निगम के सामने ही ऑटो-टेपों से पंजीकरण शुल्क वसूली की कार्रवाई शुरू हुई तो 20 ऑटो पकड़े गए। इस दौरान ऑटो चालकों ने विरोध किया तो मंगलवार को यह कार्रवाई चौपट हो गई।
शहर में दौड़ रहे सात हजार से ज्यादा ऑटो-टेंपो
आरटीओ सूत्रों के मुताबिक, शहर में करीब आठ हजार ऑटो-टेंपो दौड़ रहे हैं। इनमें 2300 ऑटो और 4300 टेंपो शहर परमिट पर चल रहे हैं। इसके अलावा एक हजार से ज्यादा ऑटो-टेंपो अवैध तरीके से भी संचालित हो रहे हैं।
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निगम में ई-रिक्शा का बंद हो चुका है रजिस्ट्रेशन
शहरी क्षेत्र में करीब चार हजार ई-रिक्शा भी दौड़ रहे हैं। इनमें 3500 ई-रिक्शा का आरटीओ में पंजीकरण है। बाकी एक हजार से अधिक फर्जी रजिस्ट्रेशन पर चल रहे हैं। नगर निगम ने पिछले साल इनका पंजीकरण बंद कर दिया तो काफी विवाद भी हुआ, मगर इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ से सेटिंग कर इनका संचालन जारी है।
वर्जन
हर ऑटो-टेंपो का नगर निगम में पंजीकरण अनिवार्य है। सोमवार को कुछ ऑटो-टेंपो पर कार्रवाई की गई है। होली के बाद अब इनके खिलाफ दोबारा अभियान शुरू किया जाएगा। इससे नगर निगम की आय बढ़ेगी। - ललतेश सक्सेना, प्रभारी मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
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- नगर निगम में पंजीकरण है अनिवार्य, मगर न ऑटो वालों को परवाह न अफसरों को
- टैक्स वसूली का लक्ष्य पूरा करने को हुई शुरुआत, हल्के विरोध पर ही थमी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
हजारों की तादात में शहर में दौड़ रहे ऑटो-टेंपो ट्रैफिक व्यवस्था चौपट करने के साथ ही नगर निगम को हर साल करीब 50 लाख रुपये का चूना लगा रहे हैं। इन्हें नगर निगम में पंजीकरण कराना चाहिए, लेकिन न तो निगम के अफसरों को परवाह है और न ही ऑटो-टेंपो वालों को। टैक्स वसूली का लक्ष्य पूरा करने के लिए सोमवार को निगम अफसरों को इन पर कार्रवाई की याद आई भी तो मामूली विरोध के चलते एक दिन बाद ही थम गई।
नगर निगम की टैक्स नियमावली के मुताबिक, शहर में दौड़ने वाले ऑटो-टेंपो का पंजीकरण अनिवार्य है। इसका शुल्क पांच सौ रुपये निर्धारित है, मगर निगम अफसरों की लापरवाही के चलते सालों से यह प्रक्रिया ठप पड़ी है। इस बार टैक्स दरें कम हुई हैं तो लक्ष्य पूरा करने के लिए नगर निगम को ऑटो-टेंपो की याद आई। सोमवार को निगम के सामने ही ऑटो-टेपों से पंजीकरण शुल्क वसूली की कार्रवाई शुरू हुई तो 20 ऑटो पकड़े गए। इस दौरान ऑटो चालकों ने विरोध किया तो मंगलवार को यह कार्रवाई चौपट हो गई।
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शहर में दौड़ रहे सात हजार से ज्यादा ऑटो-टेंपो
आरटीओ सूत्रों के मुताबिक, शहर में करीब आठ हजार ऑटो-टेंपो दौड़ रहे हैं। इनमें 2300 ऑटो और 4300 टेंपो शहर परमिट पर चल रहे हैं। इसके अलावा एक हजार से ज्यादा ऑटो-टेंपो अवैध तरीके से भी संचालित हो रहे हैं।
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निगम में ई-रिक्शा का बंद हो चुका है रजिस्ट्रेशन
शहरी क्षेत्र में करीब चार हजार ई-रिक्शा भी दौड़ रहे हैं। इनमें 3500 ई-रिक्शा का आरटीओ में पंजीकरण है। बाकी एक हजार से अधिक फर्जी रजिस्ट्रेशन पर चल रहे हैं। नगर निगम ने पिछले साल इनका पंजीकरण बंद कर दिया तो काफी विवाद भी हुआ, मगर इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ से सेटिंग कर इनका संचालन जारी है।
वर्जन
हर ऑटो-टेंपो का नगर निगम में पंजीकरण अनिवार्य है। सोमवार को कुछ ऑटो-टेंपो पर कार्रवाई की गई है। होली के बाद अब इनके खिलाफ दोबारा अभियान शुरू किया जाएगा। इससे नगर निगम की आय बढ़ेगी। - ललतेश सक्सेना, प्रभारी मुख्य कर निर्धारण अधिकारी