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सीटें खाली तो नए कॉलेज खोलने की दिलचस्पी भी हो रही खत्म
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बरेली। लगातार सीटें खाली रहने से मौजूदा कॉलेजों को तो करारा झटका लग ही रहा है, साथ ही नए कॉलेज खोलने को लेकर भी दिलचस्पी खत्म होती जा रही है। इस बार संबद्धता के लिए हुए आवेदनों से इसकी हकीकत सामने आ रही है। बरेली और मुरादाबाद मंडल में नए कॉलेजों के लिए वैसे हर साल बीस से ज्यादा आवेदन आते थे। इस बार महज छह आवेदन आए हैं। इसमें भी दो लॉ कॉलेज हैं, जिसमें एक पीलीभीत का है। सीटें खाली रहना इसकी बढ़ी वजह माना जा रहा है।
बरेली और मुरादाबाद मंडल में एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से 533 कॉलेज संबद्ध हैं, जिसमें 450 से जयादा कॉलेजों में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई होती है। 2013-14 में विश्वविद्यालय में रेवड़ियों की तरह संबद्धता बांटी गई। एक सत्र में 100 से ज्यादा कॉलेज खुले। मानकों का भी ख्याल नहीं रखा गया। आसपास में स्थित कॉलेजों को संबद्धता दे दी गई। इसका असर पिछले तीन वर्षों की प्रवेश प्रक्रिया में देखने को मिला। हर साल 30 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली रह जाती है। ऊपर से शासन ने मानक भी कड़े कर दिए। पिछले दिनों में आवेदन प्रक्रिया पूरी हुई। बरेली और मुरादाबाद मंडल से महज छह आवेदन आए। अब संबद्धता की बैठक होने वाली है।
न अच्छी शिक्षा न रोजगार इसलिए बाहर का रुख कर रहे छात्र
डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर और सुविधाएं बेहतर न होना और रोजगारपरक शिक्षा न मिलने से भी सीटें खाली रहने की बड़ी वजह है। स्नातक और परास्नातक कराने वाले कॉलेजों की संख्या 450 से ज्यादा है, लेकिन इनमें 50 फीसदी ऐसे हैं जहां मानकों के अनुसार शिक्षक तक नहीं। कई में तो सिर्फ कागजों पर फैकल्टी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी माना कि कॉलेजों में मानकों के अनुसार शिक्षक और आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं। अब जो भी नए कॉलेज खुलेंगे, उनमें इन मानकों को नजरंदाज नहीं किया जाएगा। यूपी बोर्ड, सीबीएसई और अन्य बोर्ड मिलाकर बरेली और मुरादाबाद में तीन लाख से ज्यादा छात्र इंटरमीडिएट पास करके निकलते हैं। जबकि विश्वविद्यालय में स्नातक में डेढ़ लाख भी एडमिशन नहीं लेते। इस सत्र में ही सवा लाख से कम प्रवेश हुए, जबकि सीटों की संख्या करीब दो लाख है।
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नए कॉलेजों के लिए इस बार काफी कम आवेदन आए हैं। इनमें भी देखना है कि कितने मानकों पर खरे उतरे हैं। अब जल्द संबद्धता की बैठक होगी, जिसमें सभी की फाइलें रखी जाएंगी।
- एके अरविंद, कुलसचिव
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बरेली और मुरादाबाद मंडल में एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से 533 कॉलेज संबद्ध हैं, जिसमें 450 से जयादा कॉलेजों में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई होती है। 2013-14 में विश्वविद्यालय में रेवड़ियों की तरह संबद्धता बांटी गई। एक सत्र में 100 से ज्यादा कॉलेज खुले। मानकों का भी ख्याल नहीं रखा गया। आसपास में स्थित कॉलेजों को संबद्धता दे दी गई। इसका असर पिछले तीन वर्षों की प्रवेश प्रक्रिया में देखने को मिला। हर साल 30 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली रह जाती है। ऊपर से शासन ने मानक भी कड़े कर दिए। पिछले दिनों में आवेदन प्रक्रिया पूरी हुई। बरेली और मुरादाबाद मंडल से महज छह आवेदन आए। अब संबद्धता की बैठक होने वाली है।
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न अच्छी शिक्षा न रोजगार इसलिए बाहर का रुख कर रहे छात्र
डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर और सुविधाएं बेहतर न होना और रोजगारपरक शिक्षा न मिलने से भी सीटें खाली रहने की बड़ी वजह है। स्नातक और परास्नातक कराने वाले कॉलेजों की संख्या 450 से ज्यादा है, लेकिन इनमें 50 फीसदी ऐसे हैं जहां मानकों के अनुसार शिक्षक तक नहीं। कई में तो सिर्फ कागजों पर फैकल्टी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी माना कि कॉलेजों में मानकों के अनुसार शिक्षक और आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं। अब जो भी नए कॉलेज खुलेंगे, उनमें इन मानकों को नजरंदाज नहीं किया जाएगा। यूपी बोर्ड, सीबीएसई और अन्य बोर्ड मिलाकर बरेली और मुरादाबाद में तीन लाख से ज्यादा छात्र इंटरमीडिएट पास करके निकलते हैं। जबकि विश्वविद्यालय में स्नातक में डेढ़ लाख भी एडमिशन नहीं लेते। इस सत्र में ही सवा लाख से कम प्रवेश हुए, जबकि सीटों की संख्या करीब दो लाख है।
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नए कॉलेजों के लिए इस बार काफी कम आवेदन आए हैं। इनमें भी देखना है कि कितने मानकों पर खरे उतरे हैं। अब जल्द संबद्धता की बैठक होगी, जिसमें सभी की फाइलें रखी जाएंगी।
- एके अरविंद, कुलसचिव