{"_id":"5c477107bdec22123976104a","slug":"201548185863-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जब नेताजी सरपरस्त तो डर काहे का..","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जब नेताजी सरपरस्त तो डर काहे का..
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। बीडीए ने तीन महीने पहले शहर के 200 नर्सिँग होम को नोटिस जारी किए थे जिसके मुताबिक 15 दिन के अंदर उनके मालिकों को अपने भवन के कामर्शियल नक्शे प्राधिकरण में दाखिल करने थे। नेताजी नर्सिंग होम मालिकों के सरपरस्त बने वे बेखौफ हो गए। किसी भी नर्सिंग होम मालिक ने बीडीए से अपने भवन का नक्शा मंजूर कराना तो दूर नोटिस का जवाब देना तक जरूरी नहीं समझा।
शहर में 150 से अधिक बारातघर बीडीए से नक्शा बिना मंजूर कराए बने। छापामार अभियान में कुछ बारातघर सील किए गए तो बारातघर मालिक नेताजी की शरण में पहुंच गए। नेताजी ने सिफारिश की कि चुनाव नजदीक हैं, व्यापारियों को परेशान मत कीजिए। दबाव बढ़ा, खींचतान मची रही मगर बाद में दोनों के बीच फैसला हुआ कि बारातघर मालिक टोकन मनी जमा करें और जुर्माना अदा कर अपने बारातघरों की कंपाउंडिंग कराएं। उसमें अधिकांश बारातघरों की कंपाउंडिंग तो नहीं हो सकी, लेकिन बीडीए को 1.5 करोड़ से ज्यादा की राजस्व वसूली हो गई। फिर नंबर आया नर्सिंग होम का। जब बीडीए ने नर्सिँग होम मालिकों पर शिकंजा शुरू किया तो नेताजी फिर आड़े आ गए। इस बार एक नहीं, बल्कि कई नेतागण सिफारिश में उतर आए। जिसका नतीजा यह निकला कि बीते नवंबर और दिसंबर में जारी नोटिस का नर्सिंग होम मालिकों ने जवाब तक देना जरूरी नहीं समझा। चुनाव नजदीक देख राजनीतिक दबाव की आशंका से बीडीए भी खामोश हो गया।
नर्सिंग होम से बीडीए के नोटिस का जवाब नहीं मिला। मेरी ओर से सीएमओ को पत्र लिखा गया है कि वह बिना मानचित्र स्वीकृत कराए अवैध भवनों में नर्सिंग होम चलाने वाले डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन रद्द करें और उनका लाइसेंस निरस्त करने की दिशा में कदम उठाएं। डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर में 150 से अधिक बारातघर बीडीए से नक्शा बिना मंजूर कराए बने। छापामार अभियान में कुछ बारातघर सील किए गए तो बारातघर मालिक नेताजी की शरण में पहुंच गए। नेताजी ने सिफारिश की कि चुनाव नजदीक हैं, व्यापारियों को परेशान मत कीजिए। दबाव बढ़ा, खींचतान मची रही मगर बाद में दोनों के बीच फैसला हुआ कि बारातघर मालिक टोकन मनी जमा करें और जुर्माना अदा कर अपने बारातघरों की कंपाउंडिंग कराएं। उसमें अधिकांश बारातघरों की कंपाउंडिंग तो नहीं हो सकी, लेकिन बीडीए को 1.5 करोड़ से ज्यादा की राजस्व वसूली हो गई। फिर नंबर आया नर्सिंग होम का। जब बीडीए ने नर्सिँग होम मालिकों पर शिकंजा शुरू किया तो नेताजी फिर आड़े आ गए। इस बार एक नहीं, बल्कि कई नेतागण सिफारिश में उतर आए। जिसका नतीजा यह निकला कि बीते नवंबर और दिसंबर में जारी नोटिस का नर्सिंग होम मालिकों ने जवाब तक देना जरूरी नहीं समझा। चुनाव नजदीक देख राजनीतिक दबाव की आशंका से बीडीए भी खामोश हो गया।
विज्ञापन
नर्सिंग होम से बीडीए के नोटिस का जवाब नहीं मिला। मेरी ओर से सीएमओ को पत्र लिखा गया है कि वह बिना मानचित्र स्वीकृत कराए अवैध भवनों में नर्सिंग होम चलाने वाले डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन रद्द करें और उनका लाइसेंस निरस्त करने की दिशा में कदम उठाएं। डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
विज्ञापन