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मंडली संग गरीबों का अनाज ठिकाने लगा रहे थे ‘कन्हैया’, पूरे सिस्टम का काम हो रहा था
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बरेली। सरकार किसानों से सीधे अनाज खरीदकर अपनी विभिन्न योजनाओं के तहत गरीबों को तीन रुपये चावल और दो रुपये किलो गेहूं उपलब्ध कराती है लेकिन राशन माफिया इसमें भी जमकर खेल कर रहे हैं। किसानों से जो अनाज खरीदा जाता है, उसे बदलकर घटिया गुणवत्ता का अनाज गोदामों में भर दिया जाता है, जो खाने लायक तक नहीं होता। बाद में राशन वितरण प्रणाली के जरिये यही अखाद्य गेहूं-चावल कोटे की दुकानों के माध्यम से गरीबों में बंट जाता है।
करीब छह महीने पहले केंद्रीय खाद्य मंत्रालय टीम ने बरेली समेत कई जिलों में एफसीआई के गोदामों में छापे मारे थे और उनमें भंडारित चावल और गेहूं के नमूने लिए थे। इनमें से गेहूं-चावल के ज्यादातर नमूने लैब में फेल हो गए हैं। हैरत की बात यह है कि बरेली मंडल में दो दर्जन से ज्यादा चट्टों के नमूने अधोमानक मिले हैं। लैब की रिपोर्ट पर कार्रवाई शुरू हुई तो खाद्य विभाग में हड़कंप मच गया। एफआईसी के क्षेत्रीय प्रबंधकों ने तुरंत इसकी जिम्मेदारी सरकारी खरीद एजेंसियों पर डालते हुए संभागीय खाद्य नियंत्रक को कार्रवाई के लिए लिख दिया। चावल सप्लाई करने वाले राइस मिलों को ब्लैकलिस्ट करने और संबंधित क्रय एजेंसी अफसरों पर कार्रवाई करने को कहा गया। मगर इसके जवाब में आरएफसी (संभागीय खाद्य नियंत्रक) ने कह दिया कि सैंपल लेने आयी टीम में राज्य स्तरीय प्रतिनिधित्व नहीं था, साथ एक साल पुराना खाद्यान्न गोदामों में खराब भी हो सकता है। इससे गेंद फिर एफसीआई के पाले में आ गयी है।
दो दर्जनों गोदामों में मिला खराब अनाज
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की टीम ने बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में एफसीआई के करीब दो दर्जन गोदामों में खराब अनाज पाया है। करीब सात हजार क्विंटल गेहूं-चावल की क्वालिटी खराब घोषित कर दी गयी है। इसकी कीमत 150 लाख रुपये से अधिक बतायी जाती है।
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कैसे हो वितरण
चेकिंग टीम ने जो अनाज खराब घोषित किया है, उसका वितरण नहीं हो सकता है। इसी कारण एफसीआई इसे बदलने के लिए दबाव बना रहा है मगर आरएफसी अफसरों ने इसे बदलने से साफ इंकार कर दिया है। इस घोटाले में फंसे कुछ राइस मिल मालिकों ने कोर्ट से स्टे भी ले लिया है। अदालत में उन्होंने यह तर्क रखा है कि उन्होंने एफसीआई गोदामों पर तैनात अफसरों ने क्वालिटी चेक की थी, उन्हें इसका भुगतान इस चेकिंग के बाद ही मिला है। अब एक साल बाद उनसे कहा जा रहा है कि यह अनाज खराब है। एफसीआई अफसर इस बात से परेशान हैं कि चिह्नित चट्टों में लगे बोरों की निकासी नहीं हो सकती है। इसका हर्जाना भी एफसीआई को भरना पड़ सकता है।
एफसीआई के स्टाफ की गर्दन फंसना तय
राशन माफिया की मिलीभगत से एफसीआई गोदामों तक पहुंचा खराब अनाज को लेकर विभाग में अफरातफरी मची हुई है। आरएफसी कार्यालय के रुख के बाद तय माना जा रहा है कि इसमें एफसीआई गोदाम कर्मचारी और क्वालिटी कंट्रोल अफसर जरूर फंसेेंगे। क्षेत्र प्रबंधक एफसीआई अखिलेश्वर ओझा कहते हैं कि गोदाम में भंडारित अनाज विभागीय स्टाफ पहले चेक करता है। इसलिए इसमें लापरवाही करने वाला स्टाफ चिह्नित करके उस पर कार्रवाई होगी। आरोपपत्र तैयार किए जा रहे हैं, इस गंभीर मामले में स्टाफ से वसूली भी होगी। उधर, डिप्टी आरएमओ सुनील भारती बताते हैं कि सरकारी खरीद में खरीदा गया गेहूं-चावल भंडारित होने से पहले सभी मानकों पर चेक होता है, इसके बाद ही एफसीआई गोदाम में राशन रखकर भुगतान करती है। इसी के चलते खराब अनाज का भी भुगतान एफसीआई कर चुकी है, इसलिए किसी सरकारी खरीद एजेंसी और धान कुटाई कर सरकारी गोदामों में सप्लाई करने वाले राइस मिलों पर कार्रवाई संभव नहीं है।
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करीब छह महीने पहले केंद्रीय खाद्य मंत्रालय टीम ने बरेली समेत कई जिलों में एफसीआई के गोदामों में छापे मारे थे और उनमें भंडारित चावल और गेहूं के नमूने लिए थे। इनमें से गेहूं-चावल के ज्यादातर नमूने लैब में फेल हो गए हैं। हैरत की बात यह है कि बरेली मंडल में दो दर्जन से ज्यादा चट्टों के नमूने अधोमानक मिले हैं। लैब की रिपोर्ट पर कार्रवाई शुरू हुई तो खाद्य विभाग में हड़कंप मच गया। एफआईसी के क्षेत्रीय प्रबंधकों ने तुरंत इसकी जिम्मेदारी सरकारी खरीद एजेंसियों पर डालते हुए संभागीय खाद्य नियंत्रक को कार्रवाई के लिए लिख दिया। चावल सप्लाई करने वाले राइस मिलों को ब्लैकलिस्ट करने और संबंधित क्रय एजेंसी अफसरों पर कार्रवाई करने को कहा गया। मगर इसके जवाब में आरएफसी (संभागीय खाद्य नियंत्रक) ने कह दिया कि सैंपल लेने आयी टीम में राज्य स्तरीय प्रतिनिधित्व नहीं था, साथ एक साल पुराना खाद्यान्न गोदामों में खराब भी हो सकता है। इससे गेंद फिर एफसीआई के पाले में आ गयी है।
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दो दर्जनों गोदामों में मिला खराब अनाज
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की टीम ने बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में एफसीआई के करीब दो दर्जन गोदामों में खराब अनाज पाया है। करीब सात हजार क्विंटल गेहूं-चावल की क्वालिटी खराब घोषित कर दी गयी है। इसकी कीमत 150 लाख रुपये से अधिक बतायी जाती है।
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कैसे हो वितरण
चेकिंग टीम ने जो अनाज खराब घोषित किया है, उसका वितरण नहीं हो सकता है। इसी कारण एफसीआई इसे बदलने के लिए दबाव बना रहा है मगर आरएफसी अफसरों ने इसे बदलने से साफ इंकार कर दिया है। इस घोटाले में फंसे कुछ राइस मिल मालिकों ने कोर्ट से स्टे भी ले लिया है। अदालत में उन्होंने यह तर्क रखा है कि उन्होंने एफसीआई गोदामों पर तैनात अफसरों ने क्वालिटी चेक की थी, उन्हें इसका भुगतान इस चेकिंग के बाद ही मिला है। अब एक साल बाद उनसे कहा जा रहा है कि यह अनाज खराब है। एफसीआई अफसर इस बात से परेशान हैं कि चिह्नित चट्टों में लगे बोरों की निकासी नहीं हो सकती है। इसका हर्जाना भी एफसीआई को भरना पड़ सकता है।
एफसीआई के स्टाफ की गर्दन फंसना तय
राशन माफिया की मिलीभगत से एफसीआई गोदामों तक पहुंचा खराब अनाज को लेकर विभाग में अफरातफरी मची हुई है। आरएफसी कार्यालय के रुख के बाद तय माना जा रहा है कि इसमें एफसीआई गोदाम कर्मचारी और क्वालिटी कंट्रोल अफसर जरूर फंसेेंगे। क्षेत्र प्रबंधक एफसीआई अखिलेश्वर ओझा कहते हैं कि गोदाम में भंडारित अनाज विभागीय स्टाफ पहले चेक करता है। इसलिए इसमें लापरवाही करने वाला स्टाफ चिह्नित करके उस पर कार्रवाई होगी। आरोपपत्र तैयार किए जा रहे हैं, इस गंभीर मामले में स्टाफ से वसूली भी होगी। उधर, डिप्टी आरएमओ सुनील भारती बताते हैं कि सरकारी खरीद में खरीदा गया गेहूं-चावल भंडारित होने से पहले सभी मानकों पर चेक होता है, इसके बाद ही एफसीआई गोदाम में राशन रखकर भुगतान करती है। इसी के चलते खराब अनाज का भी भुगतान एफसीआई कर चुकी है, इसलिए किसी सरकारी खरीद एजेंसी और धान कुटाई कर सरकारी गोदामों में सप्लाई करने वाले राइस मिलों पर कार्रवाई संभव नहीं है।