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फोटो आईडी की शर्त पर वोटर बनने से जवानों का इनकार
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बरेली। कैंट बोर्ड के चुनाव के लिए नए सिरे से बनाई जा रही वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए फोटो आईडी देने की शर्त मानने से सेना के करीब 1600 जवानों ने इंकार कर दिया है। इससे कैंट बोर्ड के अधिकारी सकते में आ गए हैं। अधिकारियों ने अब इस बारे में सैन्य अधिकारियों के साथ लिखापढ़ी करने की बात कही है।
कैंट बोर्ड के चुनाव फरवरी 2020 में प्रस्तावित हैं। बताया जाता है कि पिछले चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रत्याशियों ने अवैध निवासियों के साथ कैंट के आसपास के गांवों के लोगों के भी नाम वोटर लिस्ट में शामिल करा लिए थे। इसी को देखते हुए इस बार वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के नियम बदल दिए गए हैं। इसके तहत आवेदकों के लिए फोटो आईडी प्रूफ देना अनिवार्य कर दिया गया है। नए नियमों के तहत वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए बीएलओ ड्यूटी पर लगाए गए शिक्षक आईजीबीएच एरिया, चिटपुट लाइन, बर्डवुड लाइन के साथ दूसरे सैन्य क्वॉर्टरों में पहुंचे थे।
जवानों ने उनसे आवेदन पत्र तो ले लिए लेकिन सेना की ओर से जारी फोटो आईडी प्रूफ उन्हें देने से मना कर दिया। जवानों का कहना था कि उच्चाधिकारियों के आदेश के बगैर वे फोटो आईडी प्रूफ नहीं दे सकते। शिक्षकों के मुताबिक कुछ दिन बाद जब वे फिर सैन्य क्वॉर्टर पहुंचे तो क्वॉर्टर पर मौजूद गार्ड ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। उन्होंने इसकी जानकारी कैंट के अधिकारियों को दी। अधिकारियों ने मामले में सेना के उच्च अधिकारियों से बात कर फोटो आईडी प्रूफ दिलाने संबंधी आदेश जारी करवाने की बात कही है।
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फर्जी मतदाता होंगे बाहर
नई मतदाता सूची बनाने का प्रभार संभाल रहे पारसनाथ ने बताया कि अबकी बार झुग्गी, झोपड़ी और अवैध तरीके से कैंट में रह रहे लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जाएगा। किराएदारों के नाम मकान मालिक की संस्तुति पर शामिल होंगे। बंगलों में रह रहे लोगों के नाम भी मूल लीजधारक की संस्तुति पर शामिल किए जाएंगे। नियमों में परिवर्तन किए जाने से काफी संख्या में फर्जी वोटरों के लिस्ट से बाहर होने की संभावना है। कैंट बोर्ड के एई आरके माहेश्वरी ने बताया कि संबंधित मामले में सैन्य अधिकारियों से वोटर लिस्ट बनाने की प्रक्रिया में सहयोग करने को पत्र लिखा जाएगा।
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कैंट बोर्ड के चुनाव फरवरी 2020 में प्रस्तावित हैं। बताया जाता है कि पिछले चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रत्याशियों ने अवैध निवासियों के साथ कैंट के आसपास के गांवों के लोगों के भी नाम वोटर लिस्ट में शामिल करा लिए थे। इसी को देखते हुए इस बार वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के नियम बदल दिए गए हैं। इसके तहत आवेदकों के लिए फोटो आईडी प्रूफ देना अनिवार्य कर दिया गया है। नए नियमों के तहत वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए बीएलओ ड्यूटी पर लगाए गए शिक्षक आईजीबीएच एरिया, चिटपुट लाइन, बर्डवुड लाइन के साथ दूसरे सैन्य क्वॉर्टरों में पहुंचे थे।
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जवानों ने उनसे आवेदन पत्र तो ले लिए लेकिन सेना की ओर से जारी फोटो आईडी प्रूफ उन्हें देने से मना कर दिया। जवानों का कहना था कि उच्चाधिकारियों के आदेश के बगैर वे फोटो आईडी प्रूफ नहीं दे सकते। शिक्षकों के मुताबिक कुछ दिन बाद जब वे फिर सैन्य क्वॉर्टर पहुंचे तो क्वॉर्टर पर मौजूद गार्ड ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। उन्होंने इसकी जानकारी कैंट के अधिकारियों को दी। अधिकारियों ने मामले में सेना के उच्च अधिकारियों से बात कर फोटो आईडी प्रूफ दिलाने संबंधी आदेश जारी करवाने की बात कही है।
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फर्जी मतदाता होंगे बाहर
नई मतदाता सूची बनाने का प्रभार संभाल रहे पारसनाथ ने बताया कि अबकी बार झुग्गी, झोपड़ी और अवैध तरीके से कैंट में रह रहे लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जाएगा। किराएदारों के नाम मकान मालिक की संस्तुति पर शामिल होंगे। बंगलों में रह रहे लोगों के नाम भी मूल लीजधारक की संस्तुति पर शामिल किए जाएंगे। नियमों में परिवर्तन किए जाने से काफी संख्या में फर्जी वोटरों के लिस्ट से बाहर होने की संभावना है। कैंट बोर्ड के एई आरके माहेश्वरी ने बताया कि संबंधित मामले में सैन्य अधिकारियों से वोटर लिस्ट बनाने की प्रक्रिया में सहयोग करने को पत्र लिखा जाएगा।