{"_id":"5ce067b5bdec2207697943bd","slug":"191558210485-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर का अति व्यस्त इलाका रिहायशी कहां से हो गया?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर का अति व्यस्त इलाका रिहायशी कहां से हो गया?
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बरेली। बीडीए के दो दशक पहले बनाए गए मास्टर प्लान में कुछ इलाके जानबूझकर कमर्शियल बनाने से छोड़ दिए गए। इसका खामियाजा वहां की जनता अब भी भुगत रही है। अब मूर्ति नर्सिंग होम से धर्मकांटा तक मैकेनियर रोड कहा जाने वाला यह इलाका ही ले लीजिए। मास्टर प्लान में यह इलाका आवासीय था क्योंकि मकानों के आगे रोड पार करते ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क भी है। मगर रोड के दोनों ओर बने दर्जनों शोरूम, कान्वेंट स्कूल, कांप्लेक्स, प्रापर्टी मार्केट, नर्सिंग होम, हौजरी आदि यह साबित करते हैं कि यह इलाका बरसों पहले ही कमर्शियल होना शुरू हो गया था।
मूर्ति नर्सिंग होम रोड के शुरू होते ही दुकानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। रोड के एक ओर नर्सिंग होम से चंद कदम बढ़ते ही आवासीय भवन दिखते हैं, मगर उनमें आगे दुकानें भी हैं। थोड़ा और चलें तो कई मंजिला ऊंची इमारत बनी है, जिसके नीचे दुकानें और गोदाम हैं। एक बड़ी और लंबी बिल्डिंग दो से तीन मंजिल ऊंची बनी है, जिसमें दर्जनों दुकानें ऊपर और नीचे बनी है। एक पब्लिक स्कूल के अलावा नगर निगम का गैराज भी है। फिर नेताजी सुभाषचंद्र बोस पार्क। प्रेमनगर थाना के सामने एक दर्जन दुकानों की मार्केट बनी है। उसके आगे तीन से चार क्लीनिक हैं। फिर पांच से छह नर्सिंग होम। बीच में घनी दुकानों का मार्केट है। कपड़े, हौजरी, फर्नीचर के कई शोरूम हैं। तीन से चार कांप्लेक्स भी बने हैं।
इनमें प्रत्येक कांप्लेक्स में 30 से 40 या 50 दुकानें ऊपर नीचे तक बनी हैं, जिनमें रोजाना करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। एक अंग्रेजी मीडियम स्कूल की आलीशान बिल्डिंग भी है। उसके अगल-बगल कुछ बड़े शोरूम हैं। आखिर में धर्मकांटा और ठीक प्रेमनगर चौराहे पर हनुमान जी का मंदिर है। वहीं रोड के दूसरी ओर भी कई चिकित्सकों के क्लीनिक हैं। रेडीमेड कपड़े, जनरल स्टोर आदि की दर्जनों दुकानें हैं। प्रेमनगर थाने से पहले कुछ आवासीय कॉलोनियां भी हैं। फिर उसके आगे शोरूम दिखते हैं। चंद कदम आगे चलने पर आधा दर्जन से अधिक शोरूम दिखते हैं। एक मंदिर भी इसी रोड पर बना है, जिसके आगे दो से तीन साल पहले दुकानें बनाई जा चुकी हैं। कुल मिलाकर रोड के दोनों ओर घना मार्केट है। मार्केट की कुछ बिल्डिंग दशकों पुरानी हैं।
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मूर्ति नर्सिंग होम रोड के शुरू होते ही दुकानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। रोड के एक ओर नर्सिंग होम से चंद कदम बढ़ते ही आवासीय भवन दिखते हैं, मगर उनमें आगे दुकानें भी हैं। थोड़ा और चलें तो कई मंजिला ऊंची इमारत बनी है, जिसके नीचे दुकानें और गोदाम हैं। एक बड़ी और लंबी बिल्डिंग दो से तीन मंजिल ऊंची बनी है, जिसमें दर्जनों दुकानें ऊपर और नीचे बनी है। एक पब्लिक स्कूल के अलावा नगर निगम का गैराज भी है। फिर नेताजी सुभाषचंद्र बोस पार्क। प्रेमनगर थाना के सामने एक दर्जन दुकानों की मार्केट बनी है। उसके आगे तीन से चार क्लीनिक हैं। फिर पांच से छह नर्सिंग होम। बीच में घनी दुकानों का मार्केट है। कपड़े, हौजरी, फर्नीचर के कई शोरूम हैं। तीन से चार कांप्लेक्स भी बने हैं।
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इनमें प्रत्येक कांप्लेक्स में 30 से 40 या 50 दुकानें ऊपर नीचे तक बनी हैं, जिनमें रोजाना करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। एक अंग्रेजी मीडियम स्कूल की आलीशान बिल्डिंग भी है। उसके अगल-बगल कुछ बड़े शोरूम हैं। आखिर में धर्मकांटा और ठीक प्रेमनगर चौराहे पर हनुमान जी का मंदिर है। वहीं रोड के दूसरी ओर भी कई चिकित्सकों के क्लीनिक हैं। रेडीमेड कपड़े, जनरल स्टोर आदि की दर्जनों दुकानें हैं। प्रेमनगर थाने से पहले कुछ आवासीय कॉलोनियां भी हैं। फिर उसके आगे शोरूम दिखते हैं। चंद कदम आगे चलने पर आधा दर्जन से अधिक शोरूम दिखते हैं। एक मंदिर भी इसी रोड पर बना है, जिसके आगे दो से तीन साल पहले दुकानें बनाई जा चुकी हैं। कुल मिलाकर रोड के दोनों ओर घना मार्केट है। मार्केट की कुछ बिल्डिंग दशकों पुरानी हैं।
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