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36 साल बाद फिर पड़ रहा अंग्रेजी तारीख के साथ हज
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बरेली। इस बार का हज खास होने वाला है। एक तो अब से तीन दशक से भी पहले की तारीख को फिर दोहरा रहा है। जबकि इस्लामी और अंग्रेजी की तिथियां 36 साल बाद फिर से एक ही दिन पड़ रही हैं। ऊपर से अकबरी हज का पड़ना भी महत्वपूर्ण होगा।
वर्ष 2019 में होने वाला हज इस्लामी तारीख 9 जिलहज इस बार 9 अगस्त को पड़ रही है। यही तारीख अब से 36 साल पहले 1983 ईसवी मे पड़ी थी और हिजरी 1403 थी। जिसमें 9 जिलहज और 9 अगस्त की तारीख एक ही दिन थी। जो इस बार हज पर दोहराने वाली है। हिजरी के अब तक चल रहे माह के गणित के अनुसार हज की यही तिथि निकल रही है। बता दें कि उस वक्त पानी के जहाज से लोग हज यात्रा पर जाया करते थे। तब सऊदी अरब पहुंचने 20-22 दिन लग जाते थे।
हज सेवा ट्रेनर हाजी यासीन कुरैशी ने यह भी बताया कि इस बार एक खास बात हो रही है। वह यह कि इस साल अकबरी हज हो सकता है। यानी जुमा के दिन पड़ने वाला हज अकबरी (बड़ा) कहलाता है। इतिहास में जाएं तो 10 हिजरी में पैगंबरे इस्लाम ने हज का फर्ज अदा किया था, वह जुमे का दिन था। इसी लिहाज से यह अकबरी है। इस लिए अब इसका सवाब रसूल अल्लाह के साथ मयस्सर होता है। इस तरह जब भी जुमे के दिन हज होगा अकबरी कहलाएगा।
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वर्ष 2019 में होने वाला हज इस्लामी तारीख 9 जिलहज इस बार 9 अगस्त को पड़ रही है। यही तारीख अब से 36 साल पहले 1983 ईसवी मे पड़ी थी और हिजरी 1403 थी। जिसमें 9 जिलहज और 9 अगस्त की तारीख एक ही दिन थी। जो इस बार हज पर दोहराने वाली है। हिजरी के अब तक चल रहे माह के गणित के अनुसार हज की यही तिथि निकल रही है। बता दें कि उस वक्त पानी के जहाज से लोग हज यात्रा पर जाया करते थे। तब सऊदी अरब पहुंचने 20-22 दिन लग जाते थे।
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हज सेवा ट्रेनर हाजी यासीन कुरैशी ने यह भी बताया कि इस बार एक खास बात हो रही है। वह यह कि इस साल अकबरी हज हो सकता है। यानी जुमा के दिन पड़ने वाला हज अकबरी (बड़ा) कहलाता है। इतिहास में जाएं तो 10 हिजरी में पैगंबरे इस्लाम ने हज का फर्ज अदा किया था, वह जुमे का दिन था। इसी लिहाज से यह अकबरी है। इस लिए अब इसका सवाब रसूल अल्लाह के साथ मयस्सर होता है। इस तरह जब भी जुमे के दिन हज होगा अकबरी कहलाएगा।
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