{"_id":"5c4b6ccdbdec224c7412033f","slug":"191548446925-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"काटना ही चाहते होंगे वर्ना बचाए जा सकते थे पेड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काटना ही चाहते होंगे वर्ना बचाए जा सकते थे पेड़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बरेली। डीडीपुरम से शील चौराहे तक मॉडल रोड बना रहा नगर निगम अगर इस रोड पर खड़े पेड़ों को बचाना चाहता तो उन्हें बचाया जा सकता था। इन पेड़ों को प्रोजेक्ट के डिजायन में शामिल किया जा सकता था या फिर ट्रांसप्लांट भी किया जा सकता था। मगर निगम ने ऐसी कोई कोशिश किए बगैर ही से यहां तमाम पेड़ों को काट डाला।
मॉडल रोड प्रोजेक्ट की लागत करीब साढ़े चार करोड़ रुपये है। इन दिनों इस पर काफी तेजी से काम चल रहा है। नगर निगम ने मॉ़डल रोड बनाने बनाने के लिए इस इलाके में दर्जन भर से ज्यादा हरे-भरे पेड़ काट दिए हैं। इनमें से अधिकांश पेड़ों की उम्र 15-20 साल थी। नगर निगम के इस काम से इस इलाके के लोग काफी आहत हैं। अब विशेषज्ञों का भी कहना है कि अगर निगम के अफसर चाहते तो इतनी उम्र के पेड़ों को आसानी से बचाया जा सकता था। पहला तरीका यह था कि पेड़ों को प्रोजेक्ट के डिजायन में ही शामिल कर लिया जाता और दूसरा तरीका ट्रांसप्लांटेशन का भी था।
आसान और सस्ता काम है ट्रांसप्लांटेशभन
आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना का कहना है कि 20 वर्ष तक के पेड़ों का आसानी से ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। यह बहुत आसान और सस्ता भी है। इसमें पतझड़ के दौरान पेड़ के चारों ओर गड्ढा खोदकर जड़ें निकलने के लिए छोड़ देते हैं। इसके बाद पेड़ का लोड कम करने के लिए ऊपर से छंटाई करके उसे हल्का कर दिया जाता है। इसके छह महीने बाद यानी की बसंत ऋतु शुरू होने से पहले पेड़ को एक जगह से निकालकर दूसरी जगह ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। इसके लिए किसी विशेष तकनीक की जरूरत भी नहीं होती। सामान्य जेसीबी से यह काम आसानी से किया जा सकता है। उनका कहना है कि विदेशों में यह तकनीक आम है लेकिन हमारे यहां लोग पेड़ों को बचाने के बजाय उन्हें काटना ज्यादा आसान समझते हैं।
मॉडल रोड प्रोजेक्ट की लागत करीब साढ़े चार करोड़ रुपये है। इन दिनों इस पर काफी तेजी से काम चल रहा है। नगर निगम ने मॉ़डल रोड बनाने बनाने के लिए इस इलाके में दर्जन भर से ज्यादा हरे-भरे पेड़ काट दिए हैं। इनमें से अधिकांश पेड़ों की उम्र 15-20 साल थी। नगर निगम के इस काम से इस इलाके के लोग काफी आहत हैं। अब विशेषज्ञों का भी कहना है कि अगर निगम के अफसर चाहते तो इतनी उम्र के पेड़ों को आसानी से बचाया जा सकता था। पहला तरीका यह था कि पेड़ों को प्रोजेक्ट के डिजायन में ही शामिल कर लिया जाता और दूसरा तरीका ट्रांसप्लांटेशन का भी था।
विज्ञापन
आसान और सस्ता काम है ट्रांसप्लांटेशभन
आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना का कहना है कि 20 वर्ष तक के पेड़ों का आसानी से ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। यह बहुत आसान और सस्ता भी है। इसमें पतझड़ के दौरान पेड़ के चारों ओर गड्ढा खोदकर जड़ें निकलने के लिए छोड़ देते हैं। इसके बाद पेड़ का लोड कम करने के लिए ऊपर से छंटाई करके उसे हल्का कर दिया जाता है। इसके छह महीने बाद यानी की बसंत ऋतु शुरू होने से पहले पेड़ को एक जगह से निकालकर दूसरी जगह ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। इसके लिए किसी विशेष तकनीक की जरूरत भी नहीं होती। सामान्य जेसीबी से यह काम आसानी से किया जा सकता है। उनका कहना है कि विदेशों में यह तकनीक आम है लेकिन हमारे यहां लोग पेड़ों को बचाने के बजाय उन्हें काटना ज्यादा आसान समझते हैं।
विज्ञापन