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रबर फैक्ट्री की जमीन पर कमजोर पड़ी प्रशासन की पैरवी

Wed, 09 May 2018 01:26 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Wed, 09 May 2018 01:26 AM IST
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govt fails to present storng contendership of rubber factory
rubber factory
 रबर फैक्ट्री की जमीन पर प्रशासन की पैरवी कमजोर पड़ने लगी है। फैक्ट्री की जमीन पर नया उद्योग लगाने के लिए प्रशासनिक अफसरों में शुरू में जो उत्साह था, वह अब ठंडा पड़ चुका है। फैक्ट्री मालिक भी नहीं चाहते कि रबर फैक्ट्री की जमीन पर कोई नया उद्योग लगे, इसलिए इस मसले को कानूनी पचड़ों में उलझाया जा रहा है। मुंबई उच्च न्यायालय में आज रबर फैक्ट्री के केस की सुनवाई है।
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श्रमिक यूनियन की मानें तो बुधवार को होने वाली सुनवाई में प्रशासन या शासन की ओर से ठोस पैरवी करने के लिए मुंबई कोई नहीं गया है। दूसरी ओर फैक्ट्री की श्रमिक यूनियन ने अपने बकाया की मांग को लेकर मोर्चा संभाल लिया है। श्रमिकों का प्रतिनिधिमंडल 243 करोड़ का बकाया चुकाने की मांग को लेकर डीआरटी मुंबई में नया केस फाइल करने के लिए रवाना हो गया है।
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पूर्व डीएम आर. विक्रम सिंह ने रबर फैक्ट्री की जमीन पर नए उद्योग विकसित करने को लेकर काफी उत्साह दिखाया था। इन्वेस्टर समिट में भी बरेली में नया उद्योग लगाने के लिए रबर फैक्ट्री की जमीन को उपयुक्त माना गया। बीडीए से रबर फैक्ट्री का लैंड यूज बदलने को लेकर भी शासन का दबाव बना। नए जिलाधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह के चार्ज संभालते ही एक बारगी लगा कि रबर फैक्ट्री पर प्रशासन की पैरवी तेज होगी, मगर थोड़े ही दिन बाद रबर फैक्ट्री की जमीन वापस पाने के लिए प्रशासन का लंबे समय से बना दबाव फिर कमजोर पड़ने लगा। राजनीतिज्ञों की मंशा को भांपते हुए अफसरों ने भी रबर फैक्ट्री की जमीन वापस पाने के लिए पैरवी करने से हाथ खड़े कर दिए।
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श्रमिकों ने किया 243 करोड़ बकाया का दावा
रबर फैक्ट्री की श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष अशोक मिश्रा, ए. मजमूदार और प्रमोद का प्रतिनिधि मंडल 1452 श्रमिकों के 243 करोड़ रुपये के बकाया की मांग को लेकर डीआरटी में याचिका दायर करने के लिए मुंबई पहुंच गया। यूनियन अध्यक्ष ने बताया कि बुधवार को इस मामले पर हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले श्रमिक रबर फैक्ट्री की जमीन से अपने बकाया भुगतान की मांग को लेकर आज डीआरटी में रिट दायर करेंगे। जब रबर फैक्ट्री की जमीन पर बैंक अपना बकाया अदा करने का दबाव बना रहे हैं तो उनका बकाया क्यों नहीं दिया जा रहा। यूनियन प्रतिनिधि मंडल के मुताबिक पहले श्रमिकों का केस श्रमायुक्त न्यायालय में दायर किया गया था, मगर अब वह इसके लिए डीआरटी में जाएंगे। ताकि अगर बैंक बकाया चुकाने के लिए फैक्ट्री की जमीन बिके या नीलाम हो तो सबसे पहले श्रमिकों का बकाया भुगतान किया जाए।


उद्यमी फैक्ट्री लगाने आएं तो हफ्ते भर में मिलेगी जमीन
राज्य के विधि एवं न्याय मंत्री और बरेली के प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि अगर कोई बड़ा उद्यमी या दो से तीन छोटे उद्यमी रबर फैक्ट्री की जमीन पर उद्योग लगाने को तैयार हों तो सरकार हफ्ते भर में उनको जमीन दिला देगी। बैंक या श्रमिकों का बकाया चुकाना कोई बड़ा इश्यू नहीं है। उनको कोर्ट की सहमति से या बातचीत से हल कर लिया जाएगा। यह कोई मुश्किल काम नहीं है। कर्नाटक में भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार करने गए बृजेश पाठक ने वहां से दूरभाष पर बताया कि राज्य सरकार बरेली में रबर फैक्ट्री की जमीन पर प्राइवेट भागेदारी से बड़ा उद्योग लगाने के पक्ष में है। इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। रबर फैक्ट्री की जमीन पर जो कानूनी विवाद हैं, वह बहुत मुश्किल नहीं हैं क्योंकि जमीन सरकार की है। उस पर किसी तरह का विवाद नहीं है। विवाद केवल इतना है कि फैक्ट्री पर जो बकाया हैं, उनका भुगतान कैसे हो। इसको बमुश्किल हफ्ते भर में हल किया जा सकता है क्योंकि केंद्र और प्रदेश में सरकार भाजपा की है। बरेली या बाहर का कोई भी उद्यमी रबर फैक्ट्री की जमीन पर नया उद्योग लगाने का इच्छुक है तो वह अपना प्रोजेक्ट प्रशासन के माध्यम से उन तक भेजे। तुरंत कार्रवाई कराई जाएगी। वह इस संबंध में कर्नाटक से लौटने के बाद जल्द ही प्रशासन को पत्र लिखेंगे।


स्टैंडअप योजना में एक करोड़ का लोन
बरेली। मई स्टैंड अप इंडिया योजना वर्ष 2018-19 के तहत उद्यमियों को अपना उद्योग लगाने के लिए आवेदन मांगे गए हैं। अपना उद्योग लगाने वाले पात्र को 10 लाख से लेकर एक करोड़ तक का बैंक लोन दिया जाएगा। अभ्यर्थी इस योजना में आवेदन संबंधित वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। आवेदन जिला उद्योग केंद्र में किसी भी कार्य दिवस में जमा किया जा सकता है।
 
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