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241 पोटेर्बिल शॉप आवंटन में जमकर धांधली हुई
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बरेली। पोर्टेबिल शॉप आवंटन घपले की जांच पूरी हो गई। तीन सदस्यीय कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। जांच रिपोर्ट में पोर्टेबिल दुकानों के निर्माण से लेकर आवंटन तक में जमकर धांधली करने का जिक्र है। इसमें फुटपाथ पर पुराने ठेले और फड़ वालों की उपेक्षा हुई। 17 बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी इस मामले में निर्णय करेंगे।
नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह और मुख्य अभियंता नगर निगम की ओर से भेजी गई जांच आख्या में बताया गया कि जिला अस्पताल रोड से जिला पंचायत तक 240 मीटर लंबाई में इंदिरा मार्केट के दाहिनी तरफ 127 और बायीं तरफ 114 पोर्टेबिल दुकानें लगी हैं। नगर निगम ने इंदिरा मार्केट से पहले 119 फड़ 250 रुपए प्रति माह किराया वसूलकर आवंटित किए थे। 241 में से 119 फड़ वालों को दुकानें आवंटित करते हुए 122 बाहरी लोगों को बिना आवंटन के दुकानें मिल दे दी गईं। इन लोगों को बिना ठीक प्रक्रिया अपनाए दुकानें मिलने पर सवाल उठाते हुए जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पोर्टेबिल शॉप में व्हील नहीं लगी है, जिससे दुकानों से आसानी से इधर से उधर हटाया नहीं जा सकता। इसलिए जिन दुकानों को पोर्टेबिल शॉप कहा गया, वह वास्तव में पोर्टेबिल नहीं हैं। दुकानों को किसने बनाया ? किसकी देख-रेख में बनाया गया? यह स्पष्ट नहीं है। न ही इसके कोई अभिलेख नगर निगम में हैं। इन दुकानों की मूल कीमत क्या है? यह कीमत किसके द्वारा तय की गई है? इसके भी कोई अभिलेख नहीं हैं।
जो दुकानें उपलब्ध कराई गईं, वह शासनादेश एवं अधिनियम पथ विक्रेता के विरुद्ध हैं। इंदिरा मार्केट में वेंडरों का सर्वे दो नामित पार्षदों से कराया गया। सर्वे में पाया गया कि 171 वेंडरों की सूची है, जिसमें मात्र 106 मान्य और 65 अमान्य हैं। मार्केट के दोनों ओर वंडिंग जोन नहीं बनाया गया। दुकानदारों ने जांच कमेटी के सदस्यों को बताया कि उनसे 60 हजार रुपए और 75 हजार रुपए दुकान देने के बदले वसूले गए हैं, जिसकी कोई रसीद नहीं दी गई है। फेरी नीति में स्थान खुला रखने का प्रावधान है, लेकिन फड़ और ठेले वालों को दुकानें नियम विरुद्ध दी गई हैं। कुछ दुकानदारों ने शिकायत की कि उनको धोखे में रखा गया और दुकान नहीं दी गई जबकि उनका पंजीकरण भी था। किसी भी दुकानदार के पास दुकान आवंटन का पत्र उपलब्ध नहीं है। जांच रिपोर्ट के अनुसार इंदिरा मार्केट में दुकान आवंटन की वैध प्रक्रिया नहीं अपनाई गईं बल्कि आवंटन की आड़ में अवैध वसूली की गई। वेंडिंग जोन का भी कोई प्लान स्वीकृत नहीं होने के चलते संपूर्ण आवंटन प्रक्रिया नियम विरुद्ध है।
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नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह और मुख्य अभियंता नगर निगम की ओर से भेजी गई जांच आख्या में बताया गया कि जिला अस्पताल रोड से जिला पंचायत तक 240 मीटर लंबाई में इंदिरा मार्केट के दाहिनी तरफ 127 और बायीं तरफ 114 पोर्टेबिल दुकानें लगी हैं। नगर निगम ने इंदिरा मार्केट से पहले 119 फड़ 250 रुपए प्रति माह किराया वसूलकर आवंटित किए थे। 241 में से 119 फड़ वालों को दुकानें आवंटित करते हुए 122 बाहरी लोगों को बिना आवंटन के दुकानें मिल दे दी गईं। इन लोगों को बिना ठीक प्रक्रिया अपनाए दुकानें मिलने पर सवाल उठाते हुए जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पोर्टेबिल शॉप में व्हील नहीं लगी है, जिससे दुकानों से आसानी से इधर से उधर हटाया नहीं जा सकता। इसलिए जिन दुकानों को पोर्टेबिल शॉप कहा गया, वह वास्तव में पोर्टेबिल नहीं हैं। दुकानों को किसने बनाया ? किसकी देख-रेख में बनाया गया? यह स्पष्ट नहीं है। न ही इसके कोई अभिलेख नगर निगम में हैं। इन दुकानों की मूल कीमत क्या है? यह कीमत किसके द्वारा तय की गई है? इसके भी कोई अभिलेख नहीं हैं।
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जो दुकानें उपलब्ध कराई गईं, वह शासनादेश एवं अधिनियम पथ विक्रेता के विरुद्ध हैं। इंदिरा मार्केट में वेंडरों का सर्वे दो नामित पार्षदों से कराया गया। सर्वे में पाया गया कि 171 वेंडरों की सूची है, जिसमें मात्र 106 मान्य और 65 अमान्य हैं। मार्केट के दोनों ओर वंडिंग जोन नहीं बनाया गया। दुकानदारों ने जांच कमेटी के सदस्यों को बताया कि उनसे 60 हजार रुपए और 75 हजार रुपए दुकान देने के बदले वसूले गए हैं, जिसकी कोई रसीद नहीं दी गई है। फेरी नीति में स्थान खुला रखने का प्रावधान है, लेकिन फड़ और ठेले वालों को दुकानें नियम विरुद्ध दी गई हैं। कुछ दुकानदारों ने शिकायत की कि उनको धोखे में रखा गया और दुकान नहीं दी गई जबकि उनका पंजीकरण भी था। किसी भी दुकानदार के पास दुकान आवंटन का पत्र उपलब्ध नहीं है। जांच रिपोर्ट के अनुसार इंदिरा मार्केट में दुकान आवंटन की वैध प्रक्रिया नहीं अपनाई गईं बल्कि आवंटन की आड़ में अवैध वसूली की गई। वेंडिंग जोन का भी कोई प्लान स्वीकृत नहीं होने के चलते संपूर्ण आवंटन प्रक्रिया नियम विरुद्ध है।
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