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दिव्यांगों को आत्मनिर्भरता का संदेश देने केरल से आए ‘राइडर्स’

Fri, 10 May 2019 01:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 10 May 2019 01:57 AM IST
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दिव्यांगों को आत्मनिर्भरता का संदेश देने केरल से आए ‘राइडर्स’
बरेली। मनुष्य शरीर से नहीं बल्कि सोच से दिव्यांग होता है। क्योंकि कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो दिव्यांगता आड़े नहीं आती। यह कहना है केरल के दिव्यांग राइडर गिरीश कुमार पालकार का। जो भारत, नेपाल और भूटान का भ्रमण कर दिव्यांगों का हौसला बढ़ाने निकले हैं। वे पांच अप्रैल को कन्याकुमारी से रवाना हुए और कश्मीर से हरिद्वार होते हुए बुधवार की रात बरेली पहुंचे।
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केरल के रेलवे कमीशन सीनियर क्लर्क पालकार ने बताया कि उनके दाएं पैर में पोलियो है। इसलिए बचपन में दिव्यांगों के साथ लोगों का उपेक्षित रवैया देखकर उन्होंने साहसिक कार्य कर लोगों इस संबंध में नजरिया बदलने का संकल्प किया था। उम्र के 40 पड़ाव में उन्हें ये मौका मिला। रेलवे से 90 दिन का अवकाश लेकर वह अपने सहयोगी विभात वायकोम कोट्टयम के साथ खुद बाइक चलाकर भारत और अन्य दो देशों का भ्रमण करने के लिए निकले हैं। साथ ही, इस भ्रमण को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए आवेदन किया है। वह अब तक 13 हजार किलोमीटर बाइक चला चुके हैं। बुधवार को वह नकटिया में रहने वाले परिचित विनोद परमेसरन के घर ठहरे और गुरुवार की सुबह लखनऊ रवाना हो गए। ब्यूरो
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