{"_id":"5cc0c5abbdec2260216526c0","slug":"171556137387-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जहां मुसलमान डटे, वहां हिंदू भी पीछे नहीं हटे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जहां मुसलमान डटे, वहां हिंदू भी पीछे नहीं हटे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। इस बार के लोकसभा चुनाव मेें बिजली, पानी, सड़क, रोजगार और विकास के मुद्दे एक तरह से गायब ही रहे। बरेली और आंवला में मतदान का हिंदू मुस्लिम में पूरी तरह ध्रुवीकरण हो गया। मोदी को हराने के लिए जहां मुसलमानों ने अपने बहुल बूथों पर बंपर वोट डाले, वहीं देश की सुरक्षा के मुद्दे पर मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए हिंदू भी वोटिंग में पीछे नहीं रहे।
बरेली लोकसभा क्षेत्र के मुस्लिम बहुल एरिया पुराना शहर, किला, सीबीगंज, बुधौलिया, शीशगढ़, शाही, शेरगढ़ के अलावा भोजीपुरा आदि इलाकों के अधिकांश बूथों पर मतदान का प्रतिशत 60 से ऊपर ही रहा। भोजीपुरा में तो 66 प्रतिशत पोलिंग रही, जो कि मुस्लिम बहुल एरिया माना जाता है। इसके विपरीत बरेली शहर में हर चुनाव में ज्यादातर मतदान केंद्रों पर 40 से 45 फीसदी अधिकतम वोटिंग होती थी, इस बार यहां 55.46 फीसदी वोट पड़े। रामपुर गार्डन और सिविल लाइंस इलाकों के अलावा कैंट जैसे हिंदू बहुल एरिया में भी पहली बार मतदान पिछली बार की तुलना में 10 से 12 फीसदी बढ़ा। वहीं आंवला के राजनीतिक समीकरणों को देखें तो मुस्लिम बहुल बिथरी चैनपुर में जहां 60.20 फीसदी वोट पड़े, वहीं हिंदू बहुल फरीदपुर, भमोरा, आलमपुर जाफराबाद आदि इलाकों में मतदान का आंकड़ा 60 फीसदी को छू गया। मतलब, आंवला के ग्रामीण इलाकों में 59.71 फीसदी वोट पड़े। दातागंज और शेखूपुर में मतदान का प्रतिशत क्रमश : 56.26 और 56.43 प्रतिशत रहा, जो मुस्लिम बहुल बिथरी चैनपुर-60.20 प्रतिशत से कम रहा।
आंवला में अगर देखा जाए तो बिथरी चैनपुर, फरीदपुर (कस्बा), शेखूपुर में ही मुस्लिम बहुतायत संख्या में हैं। यहां के बूथों पर अगर मतदान का प्रतिशत 55 से 62 प्रतिशत के बीच में रहा, वहीं हिंदु बहुल क्यारा, आलमपुर जाफराबाद, भमोरा के अलावा दातागंज के बूथों पर भी मतदान बहुत ज्यादा कम नहीं रहा।
विज्ञापन
शेखूपुर में हिंदू मुस्लिम मिश्रित आबादी है। यहां औसतन 70 हजार मुस्लिम वोट है, बाकी हिंदू मतदाता। वहां भी 55 फीसदी से ऊपर वोट पड़े। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि जहां मोदी को हटाने के लिए मुसलमान अगर डटे रहे तो मोदी को दोबारा सत्ता देने के लिए हिंदुओं ने भी किसी भी तरह की कोर कसर बाकी नहीं रखी।
मुस्लिम बहुल इलाकों का मतदान
बरेली और आंवला लोकसभा-- (कहीं-कहीं मिश्रित आबादी भी है)
एरिया मतदान प्रतिशत
भोजीपुरा 66.00 प्रतिशत
बिथरी चैनपुर 60.20 प्रतिशत
मीरगंज में--
शाही 60.00 प्रतिशत से अधिक
शीशगढ़ 60.00 प्रतिशत से अधिक
शेरगढ़ 60.00 प्रतिशत से अधिक
हिंदू बहुल इलाकों में मतदान (कहीं-कहीं मिश्रित आबादी भी है)
एरिया मतदान प्रतिशत
मीरगंज (हिंदू बहुल बूथ) 65.30 प्रतिशत
नवाबगंज 66.10 प्रतिशत
बरेली शहर 55.46 प्रतिशत
बरेली कैंट 52.15 प्रतिशत
फरीदपुर 62.00 प्रतिशत
आंवला 59.71 प्रतिशत
दातागंज 56.26 प्रतिशत
शेखूपुर 56.43 प्रतिशत
विज्ञापन
बरेली लोकसभा क्षेत्र के मुस्लिम बहुल एरिया पुराना शहर, किला, सीबीगंज, बुधौलिया, शीशगढ़, शाही, शेरगढ़ के अलावा भोजीपुरा आदि इलाकों के अधिकांश बूथों पर मतदान का प्रतिशत 60 से ऊपर ही रहा। भोजीपुरा में तो 66 प्रतिशत पोलिंग रही, जो कि मुस्लिम बहुल एरिया माना जाता है। इसके विपरीत बरेली शहर में हर चुनाव में ज्यादातर मतदान केंद्रों पर 40 से 45 फीसदी अधिकतम वोटिंग होती थी, इस बार यहां 55.46 फीसदी वोट पड़े। रामपुर गार्डन और सिविल लाइंस इलाकों के अलावा कैंट जैसे हिंदू बहुल एरिया में भी पहली बार मतदान पिछली बार की तुलना में 10 से 12 फीसदी बढ़ा। वहीं आंवला के राजनीतिक समीकरणों को देखें तो मुस्लिम बहुल बिथरी चैनपुर में जहां 60.20 फीसदी वोट पड़े, वहीं हिंदू बहुल फरीदपुर, भमोरा, आलमपुर जाफराबाद आदि इलाकों में मतदान का आंकड़ा 60 फीसदी को छू गया। मतलब, आंवला के ग्रामीण इलाकों में 59.71 फीसदी वोट पड़े। दातागंज और शेखूपुर में मतदान का प्रतिशत क्रमश : 56.26 और 56.43 प्रतिशत रहा, जो मुस्लिम बहुल बिथरी चैनपुर-60.20 प्रतिशत से कम रहा।
विज्ञापन
आंवला में अगर देखा जाए तो बिथरी चैनपुर, फरीदपुर (कस्बा), शेखूपुर में ही मुस्लिम बहुतायत संख्या में हैं। यहां के बूथों पर अगर मतदान का प्रतिशत 55 से 62 प्रतिशत के बीच में रहा, वहीं हिंदु बहुल क्यारा, आलमपुर जाफराबाद, भमोरा के अलावा दातागंज के बूथों पर भी मतदान बहुत ज्यादा कम नहीं रहा।
विज्ञापन
शेखूपुर में हिंदू मुस्लिम मिश्रित आबादी है। यहां औसतन 70 हजार मुस्लिम वोट है, बाकी हिंदू मतदाता। वहां भी 55 फीसदी से ऊपर वोट पड़े। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि जहां मोदी को हटाने के लिए मुसलमान अगर डटे रहे तो मोदी को दोबारा सत्ता देने के लिए हिंदुओं ने भी किसी भी तरह की कोर कसर बाकी नहीं रखी।
मुस्लिम बहुल इलाकों का मतदान
बरेली और आंवला लोकसभा-- (कहीं-कहीं मिश्रित आबादी भी है)
एरिया मतदान प्रतिशत
भोजीपुरा 66.00 प्रतिशत
बिथरी चैनपुर 60.20 प्रतिशत
मीरगंज में--
शाही 60.00 प्रतिशत से अधिक
शीशगढ़ 60.00 प्रतिशत से अधिक
शेरगढ़ 60.00 प्रतिशत से अधिक
हिंदू बहुल इलाकों में मतदान (कहीं-कहीं मिश्रित आबादी भी है)
एरिया मतदान प्रतिशत
मीरगंज (हिंदू बहुल बूथ) 65.30 प्रतिशत
नवाबगंज 66.10 प्रतिशत
बरेली शहर 55.46 प्रतिशत
बरेली कैंट 52.15 प्रतिशत
फरीदपुर 62.00 प्रतिशत
आंवला 59.71 प्रतिशत
दातागंज 56.26 प्रतिशत
शेखूपुर 56.43 प्रतिशत