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अनाथालय प्रकरण: वो साहब तो अनाथ कर गए, अब आप न करना निराश
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बरेली। आर्यसमाज अनाथालय की जमीन कब्जाने के विवाद की जांच में पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला खेल कर गए। अपनी जांच रिपोर्ट में बगैर इस सवाल का जवाब दिए वह कब्जा करने के आरोपियों को क्लीन चिट दे गए कि मियां मुन्ना जान की मृत्यु के बाद उनके नाम से जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई। लिहाजा अनाथालय प्रबंधन अब जिला प्रशासन को इस मामले की नए सिरे से जांच कराने के लिए दोबारा दरख्वास्त देगा। अनाथालय प्रबंधन का कहना है कि उसकी ओर से इस जमीन के बैनामे के संबंध में जो सबूत दिए गए थे, जांच में उनका कोई जिक्र न होना इस बात का साफ प्रमाण है कि जांच निष्पक्षता के साथ नहीं की गई है।
आर्य समाज अनाथालय की करीब आठ हजार गज जमीन पर विवाद काफी लंबे समय से चल रहा है। अनाथालय के प्रधान हर्षवर्धन की तरफ से पहले इसकी शिकायत डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से की गई थी। उन्होंने कहा था कि अनाथालय की जमीन पर फिर दीवार बनाकर नाजायज कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। डीएम ने पूर्व एडीएम सिटी ओपी वर्मा को जांच कराने के आदेश दिए थे। एडीएम सिटी के निर्देश पर तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया था। इस दौरान अनाथालय प्रबंधन ने यह सबूत भी दिखाए थे कि अनाथालय ने वर्ष 1927 में मियां मुन्नाजान से इस जमीन का बैनामा कराया था, जबकि इस जमीन पर अपना दावा ठोकने वाला दूसरा पक्ष 1972 का बैनामा दिखा रहा है जबकि मियां मुन्नाजान की पत्नी ने वर्ष 1952 में ही एक दूसरी जमीन के बैनामे में खुद को बेवा बताया था।
सिटी मजिस्ट्रेट ने इस तथ्य की गहराई से जांच कराने की बात कही थी। उन्होंने इसके लिए रजिस्ट्री विभाग से पुराने रिकॉर्ड भी तलब किए, लेकिन इसी बीच उनका ट्रांसफर हो गया। रिलीव होने से ऐन पहले उन्होंने इस प्रकरण की एडीएम सिटी को जांच रिपोर्ट सौंपी तो उसमें इन सवालों का कोई जवाब देना तो दूर, उनकी जिक्र तक नहीं किया। पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने इसके साथ अनाथालय की जमीन पर कब्जे की बात को भी नकार दिया। पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट की जांच से अनाथालय प्रबंधन सकते में हैं और इस मामले की जांच नए सिरे से कराने की कोशिश में जुटा हुआ है।
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डीएम से मिलकर मैं इस मामले की जांच रिपोर्ट की जानकारी लूंगा। अगर विवादित बैनामे की जांच नहीं हुई है तो इसकी भी जांच कराने की मांग करेंगे। - हर्षवर्धन, प्रधान, आर्यसमाज अनाथालय
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आर्य समाज अनाथालय की करीब आठ हजार गज जमीन पर विवाद काफी लंबे समय से चल रहा है। अनाथालय के प्रधान हर्षवर्धन की तरफ से पहले इसकी शिकायत डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से की गई थी। उन्होंने कहा था कि अनाथालय की जमीन पर फिर दीवार बनाकर नाजायज कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। डीएम ने पूर्व एडीएम सिटी ओपी वर्मा को जांच कराने के आदेश दिए थे। एडीएम सिटी के निर्देश पर तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया था। इस दौरान अनाथालय प्रबंधन ने यह सबूत भी दिखाए थे कि अनाथालय ने वर्ष 1927 में मियां मुन्नाजान से इस जमीन का बैनामा कराया था, जबकि इस जमीन पर अपना दावा ठोकने वाला दूसरा पक्ष 1972 का बैनामा दिखा रहा है जबकि मियां मुन्नाजान की पत्नी ने वर्ष 1952 में ही एक दूसरी जमीन के बैनामे में खुद को बेवा बताया था।
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सिटी मजिस्ट्रेट ने इस तथ्य की गहराई से जांच कराने की बात कही थी। उन्होंने इसके लिए रजिस्ट्री विभाग से पुराने रिकॉर्ड भी तलब किए, लेकिन इसी बीच उनका ट्रांसफर हो गया। रिलीव होने से ऐन पहले उन्होंने इस प्रकरण की एडीएम सिटी को जांच रिपोर्ट सौंपी तो उसमें इन सवालों का कोई जवाब देना तो दूर, उनकी जिक्र तक नहीं किया। पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने इसके साथ अनाथालय की जमीन पर कब्जे की बात को भी नकार दिया। पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट की जांच से अनाथालय प्रबंधन सकते में हैं और इस मामले की जांच नए सिरे से कराने की कोशिश में जुटा हुआ है।
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डीएम से मिलकर मैं इस मामले की जांच रिपोर्ट की जानकारी लूंगा। अगर विवादित बैनामे की जांच नहीं हुई है तो इसकी भी जांच कराने की मांग करेंगे। - हर्षवर्धन, प्रधान, आर्यसमाज अनाथालय