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यहां तो नर्सिंग होम, दुकानें और स्कूल से लेकर सब कुछ
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बरेली। बीडीए के मास्टर प्लान का शहर के किसी भी हिस्से में पालन नहीं कराया गया। ऐसा ही हाल चौपुला चौराहा से बिहारीपुर पुलिस चौकी तक है। मास्टर प्लान में इस रोड के दोनों ओर का एरिया आवासीय दर्शाया गया है। मगर सही बात ये है कि रोड के दोनों ओर दुकानें, कांप्लेक्स और नर्सिंग होम बने हैं और उनके पीछे आवासीय बस्ती है।
चौपुला से टेलीफोन एक्सचेंज रोड की ओर बढ़ते ही दुकानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। स्पेयर पार्ट्स के अलावा मिष्ठान की दुकानें हैं। शराब की दुकान है। टेेलीफोन एक्सचेंज भी है। उसके आगे तीन से चार बड़े नर्सिंग होम हैं। फिर आगे जरनल स्टोर की दुकानें हैं। इसी रोड पर स्कूल भी हैं। कई मंजिल ऊंची बिल्डिंग बनी हैं, जिनमें नीचे दुकानों में कुछ न कुछ कारोबार हो रहा है। आगे चलकर कुछ रिहायशी मकान भी बने हैं, लेकिन प्रत्येक मकान में कोई न कोई दुकान जरूर चल रही है।
अंग्रेजी मीडियम स्कूल समेत कुछ प्राइवेट स्कूल भी इस रोड पर चल रहे हैं। उसके आगे बिहारीपुर पुलिस चौकी है। पुलिस चौकी के आगे भी चार या पांच दुकानें बनी हैं। दुकानों की लाइन जिला पंचायत के दफ्तर तक जाती है। दुकानों के ऊपर दो या तीन मंजिल तक मकान भी बने हैं। यह इलाका शहर के पुराने इलाकों में से एक माना जाता है।
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वहीं रोड के दूसरी ओर भी दुकानें हैं। इनमें अधिकांश स्पेयर पार्ट्स की हैं और मिस्त्री भी बैठते हैं। आगे गिहार बस्ती है। गिहार बस्ती में रहने वाले लोग छोटे-मोटे काम करके अपनी आजीविका चलाते हैं। बस्ती जैसे ही खत्म होती है तो उसके आगे दुकानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। विभिन्न बैंकों के एटीएम भी इसी रोड पर हैं। कुल मिलाकर रोड के दोनों ओर 80 परसेंट से अधिक एरिया में कमर्शियल गतिविधियां संचालित होती हैं। फिर भी यह इलाका कमर्शियल नहीं है।
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चौपुला से टेलीफोन एक्सचेंज रोड की ओर बढ़ते ही दुकानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। स्पेयर पार्ट्स के अलावा मिष्ठान की दुकानें हैं। शराब की दुकान है। टेेलीफोन एक्सचेंज भी है। उसके आगे तीन से चार बड़े नर्सिंग होम हैं। फिर आगे जरनल स्टोर की दुकानें हैं। इसी रोड पर स्कूल भी हैं। कई मंजिल ऊंची बिल्डिंग बनी हैं, जिनमें नीचे दुकानों में कुछ न कुछ कारोबार हो रहा है। आगे चलकर कुछ रिहायशी मकान भी बने हैं, लेकिन प्रत्येक मकान में कोई न कोई दुकान जरूर चल रही है।
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अंग्रेजी मीडियम स्कूल समेत कुछ प्राइवेट स्कूल भी इस रोड पर चल रहे हैं। उसके आगे बिहारीपुर पुलिस चौकी है। पुलिस चौकी के आगे भी चार या पांच दुकानें बनी हैं। दुकानों की लाइन जिला पंचायत के दफ्तर तक जाती है। दुकानों के ऊपर दो या तीन मंजिल तक मकान भी बने हैं। यह इलाका शहर के पुराने इलाकों में से एक माना जाता है।
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वहीं रोड के दूसरी ओर भी दुकानें हैं। इनमें अधिकांश स्पेयर पार्ट्स की हैं और मिस्त्री भी बैठते हैं। आगे गिहार बस्ती है। गिहार बस्ती में रहने वाले लोग छोटे-मोटे काम करके अपनी आजीविका चलाते हैं। बस्ती जैसे ही खत्म होती है तो उसके आगे दुकानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। विभिन्न बैंकों के एटीएम भी इसी रोड पर हैं। कुल मिलाकर रोड के दोनों ओर 80 परसेंट से अधिक एरिया में कमर्शियल गतिविधियां संचालित होती हैं। फिर भी यह इलाका कमर्शियल नहीं है।