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जंक्शन पर आराम के लिए भटकता रहा देहरादून का चेकिंग स्टाफ
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बरेली। देहरादून से बरेली आया चेकिंग स्टाफ आराम करने के लिए जंक्शन पहुंचा, लेकिन रिटायरिंग रूम में बेड न होने पर जंक्शन पर भटकता रहा। सुबह स्टाफ के लिए रिटायरिंग में ठहरने की व्यवस्था कराई गई। इसकी शिकायत मंडलीय अधिकारियों से की गई है।
दून एक्सप्रेस से चेकिंग स्टाफ जंक्शन तक आता है। जंक्शन पर वह गार्ड/ ड्राइवर के रनिंग रूम में रातभर रुक कर अगले दिन रात साढ़े दस बजे दून एक्सप्रेस से देहरादून के लिए रवाना होता है। 2016 से स्टाफ की लखनऊ तक जाने की ड्यूटी लगा दी गई। मंगलवार को फिर से बरेली तक ड्यूटी के आदेश दिए गए। बुधवार सुबह चार बजे चेकिंग स्टाफ जंक्शन पहुंचा, रनिंग रूम में बेड न होने के कारण वह भटकता रहा। स्टेशन मास्टर के पास भी गए, लेकिन उन्होंने भी मजबूरी दिखाई। सुबह आठ बजे के करीब रिटायरिंग में स्टाफ को ठहराया गया।
सूत्रों का कहना था कि 2016 से पहले रनिंग रूम में स्टाफ के लिए बेड थे, लेकिन वह बालामऊ के रनिंग रूम में भेज दिए गए। वहां से वापस आना असंभव है। जानकारों का कहना है कि रिटायरिंग रूम खाली नहीं होता है तो स्टाफ भटकता रहता है। इस संबंध में स्टेशन डायरेक्टर मनोज मीणा ने बताया कि नए बेड आने के संबंध में मुरादाबाद के मंडलीय अधिकारियों को अवगत कराया है, जल्द ही रनिंग रूम में बेड उपलब्ध होंगे।
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दून एक्सप्रेस से चेकिंग स्टाफ जंक्शन तक आता है। जंक्शन पर वह गार्ड/ ड्राइवर के रनिंग रूम में रातभर रुक कर अगले दिन रात साढ़े दस बजे दून एक्सप्रेस से देहरादून के लिए रवाना होता है। 2016 से स्टाफ की लखनऊ तक जाने की ड्यूटी लगा दी गई। मंगलवार को फिर से बरेली तक ड्यूटी के आदेश दिए गए। बुधवार सुबह चार बजे चेकिंग स्टाफ जंक्शन पहुंचा, रनिंग रूम में बेड न होने के कारण वह भटकता रहा। स्टेशन मास्टर के पास भी गए, लेकिन उन्होंने भी मजबूरी दिखाई। सुबह आठ बजे के करीब रिटायरिंग में स्टाफ को ठहराया गया।
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सूत्रों का कहना था कि 2016 से पहले रनिंग रूम में स्टाफ के लिए बेड थे, लेकिन वह बालामऊ के रनिंग रूम में भेज दिए गए। वहां से वापस आना असंभव है। जानकारों का कहना है कि रिटायरिंग रूम खाली नहीं होता है तो स्टाफ भटकता रहता है। इस संबंध में स्टेशन डायरेक्टर मनोज मीणा ने बताया कि नए बेड आने के संबंध में मुरादाबाद के मंडलीय अधिकारियों को अवगत कराया है, जल्द ही रनिंग रूम में बेड उपलब्ध होंगे।
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