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16 से शुरू होगा पितृ पक्ष
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Wed, 14 Sep 2016 01:01 AM IST
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पितरों के तर्पण का समय आ गया है। अगले 15 दिनाें तक घरों में इनका आशीर्वाद बना रहेगा। 16 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है। इस दौरान गुरु अस्त रहेंगे। कोई शुभ कार्य नहीं होगा।
आचार्य अनुराग शंखधार ने बताया कि भाद्र पक्ष पूर्णिमा में पितृपक्ष 16 से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगा। ज्योतिष के अनुसार सूर्य जब कन्या राशि में गतिशील होते हैं तब यह पक्ष कनागत के नाम से जाना गया। वैसे यह 15 दिन का होता है, लेकिन क्षय व वृद्धि तिथियों के कारण 15 और 17 दिनाें का भी हो जाता है। इस बार सप्तमी तिथि क्षय होने के कारण यह 15 दिन का ही रहेगा। 10 सितंबर को गुरु पश्चिम में अस्त हो चुके हैं जो नवरात्र में 6 अक्तूबर को पूर्व दिशा में उदय होंगे। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में गुरु अस्त का संयोग प्रकृति के हानि का संकेत देता है। जल में संक्रमण, फल में कीड़े, फसल नष्ट होने का योग भी बनता है। बाजार में भी मंदी के आसार हैं। भगवान विष्णु के पसीने से तिल और रोम से कुश की उत्पत्ति हुई है, इसलिए इससे तर्पण करने का महत्व है।
घरों में आते हैं पितृ
आचार्य मुकेश मिश्रा बताते हैं कि मान्यता के अनुसार इन दिनों सभी के पितृ पृथ्वी लोक में अपने-अपने घराें में आते हैं और अमावस्या पर प्रसन्न होकर अपने वंश को आशीर्वाद देकर लौट जाते हैं। इन दिनाें पितराें को याद करने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं।
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गाय को हरा चारा खिलाने पर पुण्य लाभ
आचार्य मुकेश मिश्रा बताते हैं कि अगर निर्धन व्यक्ति के पास तर्पण व ब्राह्मणाें को भोजन कराने की व्यवस्था नहीं है तो निराश होने की जरूरत नहीं। ऐसे में प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाना पुण्य लाभ देगा। पितर भी संतुष्ट होंगे।
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आचार्य अनुराग शंखधार ने बताया कि भाद्र पक्ष पूर्णिमा में पितृपक्ष 16 से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगा। ज्योतिष के अनुसार सूर्य जब कन्या राशि में गतिशील होते हैं तब यह पक्ष कनागत के नाम से जाना गया। वैसे यह 15 दिन का होता है, लेकिन क्षय व वृद्धि तिथियों के कारण 15 और 17 दिनाें का भी हो जाता है। इस बार सप्तमी तिथि क्षय होने के कारण यह 15 दिन का ही रहेगा। 10 सितंबर को गुरु पश्चिम में अस्त हो चुके हैं जो नवरात्र में 6 अक्तूबर को पूर्व दिशा में उदय होंगे। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में गुरु अस्त का संयोग प्रकृति के हानि का संकेत देता है। जल में संक्रमण, फल में कीड़े, फसल नष्ट होने का योग भी बनता है। बाजार में भी मंदी के आसार हैं। भगवान विष्णु के पसीने से तिल और रोम से कुश की उत्पत्ति हुई है, इसलिए इससे तर्पण करने का महत्व है।
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घरों में आते हैं पितृ
आचार्य मुकेश मिश्रा बताते हैं कि मान्यता के अनुसार इन दिनों सभी के पितृ पृथ्वी लोक में अपने-अपने घराें में आते हैं और अमावस्या पर प्रसन्न होकर अपने वंश को आशीर्वाद देकर लौट जाते हैं। इन दिनाें पितराें को याद करने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं।
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गाय को हरा चारा खिलाने पर पुण्य लाभ
आचार्य मुकेश मिश्रा बताते हैं कि अगर निर्धन व्यक्ति के पास तर्पण व ब्राह्मणाें को भोजन कराने की व्यवस्था नहीं है तो निराश होने की जरूरत नहीं। ऐसे में प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाना पुण्य लाभ देगा। पितर भी संतुष्ट होंगे।