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नेताजी ने पांच सड़कें बताईं.. उनमें से एक दामाद जी की

Tue, 02 Jul 2019 09:24 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2019 09:24 PM IST
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नेताजी ने पांच सड़कें बताईं.. उनमें से एक दामाद जी की
बरेली। शायद विकास इतनी तेजी से हो रहा है कि माननीयों को ऐसी जगह तलाश करनी मुश्किल हो गई हैं जहां विकास कार्य की जरूरत हो। जिला योजना की बैठक में सांसदों और विधायकों के प्रस्ताव देखकर यही महसूस हुआ। पिछले सत्र में कई विधायक और सांसद अपनी निधि पूरी तरह खर्च नहीं कर पाए, इसके बावजूद जिला योजना की बैठक में कई जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव उंगलियों पर गिने जाने लायक भी नहीं थे। एक नेताजी जिला योजना में सीसी रोड के प्रस्ताव मांगे जाने पर सिर्फ पांच सड़कों के प्रस्ताव दे पाए। इसमें एक सड़क उनके ‘दामाद जी’ के घर के सामने से गुजरती है। बरेली के सांसद की ओर से इस बैठक में विकास कार्यों के सर्वाधिक 39 और आंवला के सांसद की ओर से सबसे कम सिर्फ सात सीसी संपर्क मार्गों के प्रस्ताव जिला योजना में शामिल किए गए।
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2019-20 की जिला योजना के लिए सांसद और विधायकों ने जो सीसी रोड और संपर्क मार्गोँ के निर्माण के प्रस्ताव दिए, वे सब स्वीकृत हो चुके हैं। बरेली के सांसद संतोष गंगवार की ओर से 39 संपर्क मार्ग और आंवला के सांसद धर्मेंद्र कश्यप की ओर से सात संपर्क मार्गोँ के निर्माण के प्रस्ताव जिला योजना में शामिल कराए गए हैं। एक माननीय की ओर से अपनी विधानसभा क्षेत्र से सिर्फ पांच संपर्क मार्गों के निर्माण के प्रस्ताव शामिल कराए गए जिसमें एक संपर्क मार्ग वह भी है जो उनके दामाद के घर के सामने से होकर गुजरता है। इस प्रस्ताव पर जिला योजना की बैठक में ही खुसुर-पुसुर होती रही। दूसरे प्रस्तावों में सिंचाई मंत्री की ओर से 24 और शहर विधायक की ओर से 13 संपर्क मार्ग और नाली निर्माण के काम जिला योजना मेें शामिल हुए हैं। शासन से बजट मिलने के अनुपात के हिसाब से जिला योजना में शामिल सीसी मार्ग और नाली निर्माण कराए जाएंगे।
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अपनी निधि से कभी प्रस्ताव नहीं दे पाते तो कभी अफसर लटकाते
कहने को सरकार माननीयों को हर साल अच्छी-खासी सांसद और विधायक निधि देती है लेकिन इसका भी सदुपयोग जनहित में नहीं हो पा रहा है। पिछले साल संतोष गंगवार की सांसद निधि के ढाई करोड़ और धर्मेंद्र कश्यप की सांसद निधि के तीन करोड़ रुपये खर्च नहीं हो पाए थे, इसलिए दोनों सांसदों की किस्त भी रोक दी गई थी। अब दोबारा प्रस्ताव भेजे गए हैं। दूसरी ओर जिले के विधायकों ने अपनी निधि से तमाम प्रस्ताव दे रखे हैं तो उन्हें अफसरों ने लटका रखा है। विधायक निधि के ज्यादातर काम शुरू तक नहीं हो पाए हैं। जो शुरू भी हुए वे अधूरे पड़े हैं।
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