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15 दिन छोड़िए...75 दिन में भी पूरी नहीं की जांच
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बरेली। हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी को बदायूं-बरेली फोरलेन के निर्माण में करोड़ों के गोलमाल की जांच 15 दिन में करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। मगर शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह जांच 75 दिन बाद भी पूरी नहीं की गई है। पहले से ही इसमें लीपापोती कर रहे अफसर घोटाले को दबाने में जुटे हैं। अब वह कोर्ट में अवमानना की शिकायत करेंगे।
बदायूं-बरेली फोरलेन बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था। पीडब्ल्यूडी ने वर्ष 2016-17 में राजमार्ग-33 पर इसका निर्माण कराया था, जिसका कांट्रेक्ट पीएनसी इंफ्राटेक को दिया गया था। 280 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर घपले की शिकायत हुई थी। इस सड़क को बनाने के लिए पुरानी सड़क का मलबा इस्तेमाल करने की शिकायत शासन तक पहुंची थी। चौपुला से रामगंगा तक रोड चौड़ीकरण में पुरानी सड़क के किनारे पर गिट्टी और कोलतार प्रयोग करने के आरोप लगे थे। पुरानी सड़क पर भी कोई काम नहीं हुआ। शासन ने इस मामले में जांच बैठाई लेकिन ऊंची पहुंच के बदौलत मामला दब गया। शिकायतकर्ता हाईकोर्ट गया तो पीडब्ल्यूडी को 15 दिन में जांच करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए। मगर 75 दिन बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट का कोई पता नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसकी जांच में उसे भी शामिल किया जाना चाहिए था। जांच रिपोर्ट की भी उसे कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। यह कोर्ट की अवमानना है।
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बदायूं-बरेली फोरलेन बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था। पीडब्ल्यूडी ने वर्ष 2016-17 में राजमार्ग-33 पर इसका निर्माण कराया था, जिसका कांट्रेक्ट पीएनसी इंफ्राटेक को दिया गया था। 280 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर घपले की शिकायत हुई थी। इस सड़क को बनाने के लिए पुरानी सड़क का मलबा इस्तेमाल करने की शिकायत शासन तक पहुंची थी। चौपुला से रामगंगा तक रोड चौड़ीकरण में पुरानी सड़क के किनारे पर गिट्टी और कोलतार प्रयोग करने के आरोप लगे थे। पुरानी सड़क पर भी कोई काम नहीं हुआ। शासन ने इस मामले में जांच बैठाई लेकिन ऊंची पहुंच के बदौलत मामला दब गया। शिकायतकर्ता हाईकोर्ट गया तो पीडब्ल्यूडी को 15 दिन में जांच करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए। मगर 75 दिन बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट का कोई पता नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसकी जांच में उसे भी शामिल किया जाना चाहिए था। जांच रिपोर्ट की भी उसे कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। यह कोर्ट की अवमानना है।
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