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ये अवैध खनन बंद नहीं हुआ तो बहेड़ी के कई गांव समा जाएंगे किच्छा नदी के आगोश में

Mon, 01 Jul 2019 02:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2019 02:13 AM IST
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ये अवैध खनन बंद नहीं हुआ तो बहेड़ी के कई गांव समा जाएंगे किच्छा नदी के आगोश में
बहेड़ी। शासन ने तो पट्टे रद्द कर अवैध खनन पर रोक लगा दी लेकिन प्रशासन की ओर से शायद अब भी हरी झंडी है। नतीजा यह है कि नरायननगला मोहम्मदपुर में किच्छा नदी में अवैध खनन का जो मामला शासन तक गूंज चुका है, वहां अब भी अवैध खनन बंद नहीं हुआ है। इस गांव में खनन अब रात के अंधेरे में हो रहा है। नदी किनारे रेत पर जेसीबी और डंपरों के टायरों के ताजा निशान इसकी साफ गवाही दे रहे हैं। पहले ही की तरह फड़ भी सजे हुए हैं। लखनऊ की टीम आने से पहले करीब 50 फुट गहरे गड्ढों को जरूर रेत से पाट दिया गया था। अवैध खनन के इस खेल से अफसरों पर कोई असर हो न हो लेकिन आसपास के कई गांवों के इसकी वजह से बाढ़ में डूबने के साफ आसार दिख रहे हैं। इन गांवों के लोगों में इसको लेकर भारी भारी चिंता भी है।
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टियूला गांव में खनन को लेकर ही इंस्पेक्टर धनंजय सिंह और विधायक छत्रपाल सिंह के बीच जंग छिड़ गई थी। इंस्पेक्टर ने विधायक के करीबी मोहन सिंह पर रिपोर्ट दर्ज करने के बाद ईद के दिन नरायननगला मोहम्मदपुर में खनन कर रही दो पोकलैंड मशीनें सीज कर दी थीं। इसके बाद मामला और गरमा गया था। इसके बाद शासन ने बहेड़ी में खनन के दोनों पट्टे निरस्त कर जांच के लिए लखनऊ से टीम भेजी थी लेकिन इसकी सूचना जिला मुख्यालय से लीक हो जाने पर खनन करने वालों ने रातोंरात 50-60 फुट गहरे गड्ढों को नदी की रेत से जेसीबी के जरिये पाटकर पानी भर दिया था।
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खनन पर रोक लगा दिए जाने के बावजूद जांच टीम के लौटने के बाद खनन फिर शुरू हो गया है। रविवार को नराननगला मोहम्मदपुर में किच्छा नदी के किनारे ताजा रेत के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हुए थे। इनके आसपास पोकलैंड मशीनों और डंपरों के ताजा निशान भी बने हुए साफ दिख रहे थे। मौके पर दो फड़ सजे हुए थे, जिनके आसपास डीजल के खाली और भरे ड्रम रखे हुए थे। यहां मिले कुछ लोगों ने पहले खुद को किसान बताया लेकिन एक किसान इसका विरोध करते हुए कहने लगा कि ये लोग खनन करने वाले मजदूर हैं। नदी के उस पार दो मशीनें खेतों के अंदर खड़ी हुई हैं जो रात में नदी से रेत निकालती हैं। रोज रेत फड़ से उठकर जा भी रहा है। बहरहाल प्रशासन खामोश है।
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किसान बोले- बेशर्मी के इस खेल की उम्मीद नहीं थी
क्षेत्र के किसानों ने बताया कि उन्हें इस तरह के अराजकता भरे माहौल और पूरी बेशर्मी से खनन किए जाने की उम्मीद नहीं थी। पोकलैंड और नाव में लगी आधुनिक लिफ्टर मशीनों के जरिये नदी के अंदर से रेत खींचकर निकाला जा रहा है। इससे कई गांवों को बाढ़ का साफ खतरा है। जब जमीन अंदर से खोखली हो जाएगी तो बाढ़ आने पर सैकड़ों एकड़ जमीन के साथ कई गांव भी उसमें समा जाएंगे। किसानों का कहना था कि रजपुरा, नरायननगला, बाकौली, भीकमपुर, मोहम्मदपुर गौटिया जैसे कई गांवों पर बाढ़ का भयंकर खतरा मंडरा रहा है। गांव के लोग अफसरों और नेताओं दोनों से शिकायतें कर चुके हैं लेकिन कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं है। खनन से मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में आम जनता की जिंदगी से खेला जा रहा है।


विवेचक दे रहे गच्चा वर्ना इंस्पेक्टर भी छोड़ने की मूड में नहीं
जिले में तैनाती के बाद से ही चर्चाओं में रहे सीओ आलोक अग्रहरि ने शुक्रवार को इंस्पेक्टर को अपने दफ्तर बुलाकर नेताजी से उनकी समझौता वार्ता तो करा दी थी, लेकिन बताया जा रहा है कि इसके बावजूद न नेताजी इंस्पेक्टर को छोड़ने के मूड में हैं न इंस्पेक्टर बैकफुट पर आने को तैयार हैं। मोहम्मदपुर में इंस्पेक्टर ने ईद के दिन अवैध खनन पकड़ा था और इसकी कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस केस की विवेचना कर रहे दरोगा अभी तक पर्चे नहीं काट पाए हैं। अभी इस केस में सिर्फ दो नाम खुले हैं। इंस्पेक्टर बार-बार विवेचक को जल्द पर्चे काटने के लिए टोक चुके हैं। जिन दो लोगों के नाम सामने आए हैं, वे भी अपने पार्टनरों का नाम नहीं उगल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उनके जुबान खोलते ही इंस्पेक्टर ऐसा शिकंजा कस सकते हैं जिसकी उम्मीद भी नहीं की जा रही है।
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