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सीओ की मध्यस्तता में विधायक व इंस्पेक्टर के बीच घंटो संवाद हुआ
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किच्छा नदी में जिन लोगों के खनन को पूरी तरह अवैध मानते हुए शासन ने हाल ही में उनके पट्टे रद्द कर दिए, उन्हीं की ओर से कुछ दिनों पहले इंस्पेक्टर बहेड़ी ने भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। यही नहीं भाजपा विधायक छत्रपाल सिंह जब दूसरे पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे तो न सिर्फ इनकार कर दिया बल्कि विधायक से मोर्चा लेने से भी गुरेज नहीं किया। विधायक ने अफसरों पर इंस्पेक्टर के ट्रांसफर का दबाव बनाया तो आनन-फानन में अवैध खनन का एक और ऐसा मामला पकड़ लिया जो उनके ट्रांसफर का दबाव बेअसर करने के लिए ट्रंप कार्ड साबित हुआ। खनन पर इंस्पेक्टर और विधायक के बीच चल रहे खुले टकराव पर तो अफसर नहीं चेते, लेकिन शासन ने जब पट्टे रद्द कर अवैध खनन का रास्ता ही बंद कर दिया तो अफसर भी जाग गए। शुक्रवार को सीओ बहेड़ी ने अपने दफ्तर में आए विधायक के साथ इंस्पेक्टर की सुलह-सफाई कराने की भरपूर कोशिश की। कुछ मौकों पर विधायक ने नाराजगी जताई तो कुछ मौकों पर इंस्पेक्टर ने गिले-शिकवे रखे। आखिर में सीओ ने एलान किया कि अच्छे माहौल में दोनों के बीच बातचीत हुई है। विधायक जी अच्छे इंसान हैं। अब उनकी सारी बातें सुनी जाएंगी।
सीओ ने विधायक और
इंस्पेक्टर के बीच कराई
सुलह की बातचीत
सिर्फ माफिया का नहीं अब ‘माननीय’ का भी ख्याल रखेंगे इंस्पेक्टर
शासन ने बहेड़ी में अवैध खनन का खेल बंद कराया तो सीओ दफ्तर में पंचायत कराकर पुराना विवाद सुलझाया
सीओ की मध्यस्थता में विधायक और इंस्पेक्टर के बीच हुई घंटों बातचीत
अमर उजाला ब्यूरो
बहेड़ी। अवैध खनन के मुद्दे पर कोतवाली में तीन मई को हुई ‘जंग’ में आमने-सामने हुए भाजपा विधायक छत्रपाल और इंस्पेक्टर धनंजय सिंह करीब दो महीने बाद शुक्रवार को सीओ आलोक अग्रहरि की बदौलत उनके कार्यालय में फिर आमने-सामने बैठे लेकिन इस बार यह मुलाकात ‘युद्धविराम’ पर बातचीत के लिए कराई गई थी। विधायक और इंस्पेक्टर के बीच ‘बिगड़े रिश्तों’ को फिर ‘बेहतर’ बनाने के लिए सीओ को कई घंटे कोशिश करनी पड़ी। इस वार्ता के दौरान तो दफ्तर में किसी और को नहीं आने दिया गया लेकिन बाद में जरूर सीओ ने एलान किया कि उन्होंने इंस्पेक्टर और विधायक के बीच मनमुटाव दूर करा दिया है। अब जल्द ही दोनों के बीच फिर ‘अच्छा माहौल’ बनेगा।
यह तो पता नहीं लग पाया कि सीओ का बुलावा था या फिर विधायक छत्रपाल की अपनी पहल, लेकिन शुक्रवार को वह सुबह साढे़ नौ बजे ही सीओ के दफ्तर पहुंच गए। गार्ड ने विधायक के आने की सूचना दी तो सीओ अपने दफ्तर से बाहर निकले और विधायक को अपने कक्ष में ले गए। विधायक के साथ भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह भी थे, जिनके खिलाफ रंगदारी मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज करना विधायक और इंस्पेक्टर के बीच टकराव की वजह बन गया था। सूत्रों के मुताबिक सीओ ने विधायक से सीथे उनके और इंस्पेक्टर के बीच चल रहे विवाद पर चर्चा शुरू की। विधायक का पक्ष सुनने के बाद फोन करके इंस्पेक्टर धनंजय सिंह को आने को कहा। कुछ ही मिनटों में इंस्पेक्टर सीओ दफ्तर पहुंच गए।
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सूत्रों के मुताबिक काफी देर तक न विधायक इंस्पेक्टर से मुखातिब हुए न इंस्पेक्टर विधायक से। सीओ ने दोनों का मूड नॉर्मल कर उनके बीच बातचीत शुरू कराई तो विधायक ने जमकर अपनी भड़ास निकाली। इंस्पेक्टर भी बीच-बीच में अपनी बात कहते रहे। दोनों ने ‘स्वाभिमान’ पर टकराव होने की बातें बार-बार कहीं। सीओ दोनों को समझाते रहे, फिर दोनों को सुलह के लिए मनाया। कहा कि विधायक जनप्रतिनिधि हैं, उनकी सारी बातें सुनी जाएंगी। अगर किसी मामले में इंस्पेक्टर नहीं सुनेंगे या टालमटोल करेंगे तो विधायक सीधे उनसे कहें, वह खुद जांच करेंगे। कई घंटे तक चली बैठक के बाद विधायक और इंस्पेक्टर के बीच करीब दो महीने से बंद बातचीत शुरू हुई। इसके बाद पहले इंस्पेक्टर और फिर विधायक छत्रपाल सिंह अपने सहयोगी मोहन सिंह के साथ सीओ कार्यालय से निकले। इस मामले में विधायक का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इंस्पेक्टर ने कहा कि विधायक छत्रपाल से उनका कोई विवाद नहीं है। वह जनप्रतिनिधि हैं, वह उनका सम्मान करते हैं।
बातचीत में खूब भड़के विधायक
सूत्रों के मुताबिक विधायक इस बैठक में लगातार प्रदर्शित करते रहे कि वह किसी भी सूरत में इंस्पेक्टर से सुलह के मूड में नहीं हैं। उन्होंने बार बार यही कहा कि अब सारी हद पार हो चुकी हैं, दूरी काफी बढ़ चुकी है। मीडिया में कई दिनों ये मामला सुर्खियों में रहा है। अब वह सुलह की ओर कदम नहीं बढ़ा सकते लेकिन सीओ उन्हें मनाने में जुटे रहे और आखिरकार दोनों के बीच बातचीत शुरू करा ही दी।
वर्जन
विधायक और इंस्पेक्टर के बीच अच्छे माहौल में वार्तालाप हुआ है। कई मामलों पर दोनों के बीच गलतफहमी थी। काफी हद तक मैंने यह महसूस किया कि दोनों के बीच संवाद की कमी रही है। संवाद शुरू होने से कई मुद्दों पर मनमुटाव दूर हुआ है। जल्द ही दोनों के बीच अच्छा माहौल बनेगा। विधायक शिक्षक यानी गुरु भी रहे हैं, जैसा मैंने पहली वार्ता में पाया, वह एक अच्छे इंसान हैं। - आलोक कुमार अग्रहरि, सीओ बहेड़ी
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सीओ ने विधायक और
इंस्पेक्टर के बीच कराई
सुलह की बातचीत
सिर्फ माफिया का नहीं अब ‘माननीय’ का भी ख्याल रखेंगे इंस्पेक्टर
शासन ने बहेड़ी में अवैध खनन का खेल बंद कराया तो सीओ दफ्तर में पंचायत कराकर पुराना विवाद सुलझाया
सीओ की मध्यस्थता में विधायक और इंस्पेक्टर के बीच हुई घंटों बातचीत
अमर उजाला ब्यूरो
बहेड़ी। अवैध खनन के मुद्दे पर कोतवाली में तीन मई को हुई ‘जंग’ में आमने-सामने हुए भाजपा विधायक छत्रपाल और इंस्पेक्टर धनंजय सिंह करीब दो महीने बाद शुक्रवार को सीओ आलोक अग्रहरि की बदौलत उनके कार्यालय में फिर आमने-सामने बैठे लेकिन इस बार यह मुलाकात ‘युद्धविराम’ पर बातचीत के लिए कराई गई थी। विधायक और इंस्पेक्टर के बीच ‘बिगड़े रिश्तों’ को फिर ‘बेहतर’ बनाने के लिए सीओ को कई घंटे कोशिश करनी पड़ी। इस वार्ता के दौरान तो दफ्तर में किसी और को नहीं आने दिया गया लेकिन बाद में जरूर सीओ ने एलान किया कि उन्होंने इंस्पेक्टर और विधायक के बीच मनमुटाव दूर करा दिया है। अब जल्द ही दोनों के बीच फिर ‘अच्छा माहौल’ बनेगा।
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यह तो पता नहीं लग पाया कि सीओ का बुलावा था या फिर विधायक छत्रपाल की अपनी पहल, लेकिन शुक्रवार को वह सुबह साढे़ नौ बजे ही सीओ के दफ्तर पहुंच गए। गार्ड ने विधायक के आने की सूचना दी तो सीओ अपने दफ्तर से बाहर निकले और विधायक को अपने कक्ष में ले गए। विधायक के साथ भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह भी थे, जिनके खिलाफ रंगदारी मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज करना विधायक और इंस्पेक्टर के बीच टकराव की वजह बन गया था। सूत्रों के मुताबिक सीओ ने विधायक से सीथे उनके और इंस्पेक्टर के बीच चल रहे विवाद पर चर्चा शुरू की। विधायक का पक्ष सुनने के बाद फोन करके इंस्पेक्टर धनंजय सिंह को आने को कहा। कुछ ही मिनटों में इंस्पेक्टर सीओ दफ्तर पहुंच गए।
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सूत्रों के मुताबिक काफी देर तक न विधायक इंस्पेक्टर से मुखातिब हुए न इंस्पेक्टर विधायक से। सीओ ने दोनों का मूड नॉर्मल कर उनके बीच बातचीत शुरू कराई तो विधायक ने जमकर अपनी भड़ास निकाली। इंस्पेक्टर भी बीच-बीच में अपनी बात कहते रहे। दोनों ने ‘स्वाभिमान’ पर टकराव होने की बातें बार-बार कहीं। सीओ दोनों को समझाते रहे, फिर दोनों को सुलह के लिए मनाया। कहा कि विधायक जनप्रतिनिधि हैं, उनकी सारी बातें सुनी जाएंगी। अगर किसी मामले में इंस्पेक्टर नहीं सुनेंगे या टालमटोल करेंगे तो विधायक सीधे उनसे कहें, वह खुद जांच करेंगे। कई घंटे तक चली बैठक के बाद विधायक और इंस्पेक्टर के बीच करीब दो महीने से बंद बातचीत शुरू हुई। इसके बाद पहले इंस्पेक्टर और फिर विधायक छत्रपाल सिंह अपने सहयोगी मोहन सिंह के साथ सीओ कार्यालय से निकले। इस मामले में विधायक का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इंस्पेक्टर ने कहा कि विधायक छत्रपाल से उनका कोई विवाद नहीं है। वह जनप्रतिनिधि हैं, वह उनका सम्मान करते हैं।
बातचीत में खूब भड़के विधायक
सूत्रों के मुताबिक विधायक इस बैठक में लगातार प्रदर्शित करते रहे कि वह किसी भी सूरत में इंस्पेक्टर से सुलह के मूड में नहीं हैं। उन्होंने बार बार यही कहा कि अब सारी हद पार हो चुकी हैं, दूरी काफी बढ़ चुकी है। मीडिया में कई दिनों ये मामला सुर्खियों में रहा है। अब वह सुलह की ओर कदम नहीं बढ़ा सकते लेकिन सीओ उन्हें मनाने में जुटे रहे और आखिरकार दोनों के बीच बातचीत शुरू करा ही दी।
वर्जन
विधायक और इंस्पेक्टर के बीच अच्छे माहौल में वार्तालाप हुआ है। कई मामलों पर दोनों के बीच गलतफहमी थी। काफी हद तक मैंने यह महसूस किया कि दोनों के बीच संवाद की कमी रही है। संवाद शुरू होने से कई मुद्दों पर मनमुटाव दूर हुआ है। जल्द ही दोनों के बीच अच्छा माहौल बनेगा। विधायक शिक्षक यानी गुरु भी रहे हैं, जैसा मैंने पहली वार्ता में पाया, वह एक अच्छे इंसान हैं। - आलोक कुमार अग्रहरि, सीओ बहेड़ी