{"_id":"5d1526808ebc3e3c7c22be70","slug":"15616671805-baheri-news65","type":"story","status":"publish","title_hn":"पटाखे-ढोल रहे बेअसर, हाथियों को जंगल में नहीं खदेड़ पाए वनकर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पटाखे-ढोल रहे बेअसर, हाथियों को जंगल में नहीं खदेड़ पाए वनकर्मी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली/ बहेड़ी। नेपाल से पहुंचे दोनों हाथियों को उत्तराखंड के जंगल में खदेड़ने के लिए दागे गए पटाखे और बजाए गए ढोल बेअसर रहे। हाथी दो किमी क्षेत्र में ही गन्ने और पापुलर के खेतों में चहलकदमी करते रहे। वन विभाग को उम्मीद है कि दोनों हाथी गुरुवार की रात अपने आप उत्तराखंड के जंगल की ओर निकल जाएंगे, यदि ऐसा नहीं होता है तो शुक्रवार सुबह से ही उन्हें ड्रोन कैमरों की मदद से खदेड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके लिए पीटीआर व वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट की टीमें भी अपने साजो सामान के साथ देर शाम मौके पर पहुंच गईं।
लखीमपुर थाना क्षेत्र के जंगल में दो हाथियों के पहुंचने के बाद एक किसान की मौत होने से शासन तक हिल गया है। वन संरक्षक पीपी सिंह से शासन स्तर से लगातार अपडेट लिया जा रहा है। देर रात साढे़ आठ बजे वन संरक्षक वहां से बरेली के लिए निकले। उन्होंने बताया कि लखनऊ से वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की टीम पहुंच चुकी है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व से ड्रोन कैमरा मंगाया गया है। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी दोनों वयस्क हाथियों पर नजर बनाए हुए हैं। उनका मूवमेंट गांवों की ओर न बढे़ इसके लिए भी गांवों में वन विभाग की टीमें लगाई गई हैं। अभियान में दो एसडीओ, तीन रेंजर व डीएफओ भरतलाल को लगाया गया है। साथ ही पीलीभीत व बरेली के वन कर्मी भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि जहां पर दोनों हाथी हैं उसके तीन ओर गांव हैं। सिर्फ एक ओर रास्ता है जहां से हाथी उत्तराखंड के चोरगलिया के जंगल में चले जाएंगे। जहां पर हाथी हैं उनसे पांच किमी दूर चोरगलिया का जंगल है, लेकिन रास्ते में कई गांव व आबादी वाले स्थान हैं। इनको इन आबादी वाले स्थानों से बचाकर जंगल जंगल लेकर चोरगलिया पहुंचाना होगा। इसको लेकर तीनों टीमें मौके पर मैप प्लान कर रहीं हैं। रात भर टीमें रणनीति बनाएंगी। अगर रात में हाथियों का मूवमेंट होता है तो उन पर नजर रखकर उनको रात में ही जंगल की ओर ले जाने का काम शुरू होगा। उन्होंने बताया कि दिन भर लोगों की भीड़ जुटती रही, जिससे काम भी नहीं हो पाया। शाम तीन बजे से पुलिस ने पब्लिक को वहां से हटाया तब कार्रवाई चालू की गई।
विज्ञापन
मृतक के परिजनों को मिलेगी पांच लाख रुपये की सहायता
बहेड़ी। एसडीएम ममता मालवीय ने बताया कि हाथी के हमले से मारे गए किसान लाखन के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिलाने को उन्होंने रिपोर्ट बनाकर डीएम के द्वारा शासन को भिजवा दी है। जल्द ही शासन स्तर की यह मदद पीड़ित परिवार को मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार काम कर रही है। वह भी उनके संपर्क में हैं। शुक्रवार तक हाथियों को जंगल की ओर वन विभाग की टीम पहुंचा देगी।
देर रात हुआ अंतिम संस्कार
बहेड़ी। पोस्टमार्टम के बाद लाखन सिंह का शव देर रात गांव में पहुंचा। गमगीन माहौल में उसका गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। उसके इकलौते पुत्र सुरजू ने उसे मुखाग्नि दी। मृतक के अंतिम संस्कार में नगर व देहात से काफी संख्या में लोग पहुंचे। विधायक छत्रपाल सिंह, अतुल गर्ग, आलोक गर्ग, नीशीथ गंगवार, दुष्यंत गंगवार, चौ. आराम सिंह, सम्राट सिंह आदि ने शोक प्रकट किया है।
विज्ञापन
लखीमपुर थाना क्षेत्र के जंगल में दो हाथियों के पहुंचने के बाद एक किसान की मौत होने से शासन तक हिल गया है। वन संरक्षक पीपी सिंह से शासन स्तर से लगातार अपडेट लिया जा रहा है। देर रात साढे़ आठ बजे वन संरक्षक वहां से बरेली के लिए निकले। उन्होंने बताया कि लखनऊ से वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की टीम पहुंच चुकी है।
विज्ञापन
पीलीभीत टाइगर रिजर्व से ड्रोन कैमरा मंगाया गया है। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी दोनों वयस्क हाथियों पर नजर बनाए हुए हैं। उनका मूवमेंट गांवों की ओर न बढे़ इसके लिए भी गांवों में वन विभाग की टीमें लगाई गई हैं। अभियान में दो एसडीओ, तीन रेंजर व डीएफओ भरतलाल को लगाया गया है। साथ ही पीलीभीत व बरेली के वन कर्मी भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि जहां पर दोनों हाथी हैं उसके तीन ओर गांव हैं। सिर्फ एक ओर रास्ता है जहां से हाथी उत्तराखंड के चोरगलिया के जंगल में चले जाएंगे। जहां पर हाथी हैं उनसे पांच किमी दूर चोरगलिया का जंगल है, लेकिन रास्ते में कई गांव व आबादी वाले स्थान हैं। इनको इन आबादी वाले स्थानों से बचाकर जंगल जंगल लेकर चोरगलिया पहुंचाना होगा। इसको लेकर तीनों टीमें मौके पर मैप प्लान कर रहीं हैं। रात भर टीमें रणनीति बनाएंगी। अगर रात में हाथियों का मूवमेंट होता है तो उन पर नजर रखकर उनको रात में ही जंगल की ओर ले जाने का काम शुरू होगा। उन्होंने बताया कि दिन भर लोगों की भीड़ जुटती रही, जिससे काम भी नहीं हो पाया। शाम तीन बजे से पुलिस ने पब्लिक को वहां से हटाया तब कार्रवाई चालू की गई।
विज्ञापन
मृतक के परिजनों को मिलेगी पांच लाख रुपये की सहायता
बहेड़ी। एसडीएम ममता मालवीय ने बताया कि हाथी के हमले से मारे गए किसान लाखन के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिलाने को उन्होंने रिपोर्ट बनाकर डीएम के द्वारा शासन को भिजवा दी है। जल्द ही शासन स्तर की यह मदद पीड़ित परिवार को मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार काम कर रही है। वह भी उनके संपर्क में हैं। शुक्रवार तक हाथियों को जंगल की ओर वन विभाग की टीम पहुंचा देगी।
देर रात हुआ अंतिम संस्कार
बहेड़ी। पोस्टमार्टम के बाद लाखन सिंह का शव देर रात गांव में पहुंचा। गमगीन माहौल में उसका गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। उसके इकलौते पुत्र सुरजू ने उसे मुखाग्नि दी। मृतक के अंतिम संस्कार में नगर व देहात से काफी संख्या में लोग पहुंचे। विधायक छत्रपाल सिंह, अतुल गर्ग, आलोक गर्ग, नीशीथ गंगवार, दुष्यंत गंगवार, चौ. आराम सिंह, सम्राट सिंह आदि ने शोक प्रकट किया है।