{"_id":"5d03fced8ebc3e5a1860ea51","slug":"156054243414-bareilly-news88","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘भारत में समान कार्य समान वेतन पर कवायद’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘भारत में समान कार्य समान वेतन पर कवायद’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। अंतरराष्ट्रीय जेनेवा अधिवेशन में भारत ने श्रम कानून सुधार और समान कार्य समान वेतन जैसे बिंदु जोरदार तरीके से प्रस्तुत किए हैं। इसके तहत 44 श्रम कानूनों को चार कोड में समाहित करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके साथ खुदरा कारोबार में पेंशन स्कीम, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा आदि मुद्दों पर प्रयास जारी हैं।
जेनेवा अधिवेशन में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने दूसरे दिन अपने संबोधन में कहा कि हर वर्ष भारतीय अर्थ व्यवस्था में श्रमिक बढ़ रहे हैं। इसलिए असंगठित श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, समान कार्य समान वेतन जैसे क्षेत्रों में प्राथमिकता से काम हो रहा है। तकनीकी क्रांति, जलवायु परिवर्तन और वैश्वीकरण से रोजगार सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक ‘भारत नए का निर्माण’ विजन दिया है। इससे कामगारों सहित सभी वर्गों का विकास संभव है।
विज्ञापन
जेनेवा अधिवेशन में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने दूसरे दिन अपने संबोधन में कहा कि हर वर्ष भारतीय अर्थ व्यवस्था में श्रमिक बढ़ रहे हैं। इसलिए असंगठित श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, समान कार्य समान वेतन जैसे क्षेत्रों में प्राथमिकता से काम हो रहा है। तकनीकी क्रांति, जलवायु परिवर्तन और वैश्वीकरण से रोजगार सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक ‘भारत नए का निर्माण’ विजन दिया है। इससे कामगारों सहित सभी वर्गों का विकास संभव है।
विज्ञापन