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‘कण-कण में ईश्वर स्वरूप देखना ही सच्ची भक्ति’
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बरेली। त्रिवटीनाथ मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा का समापन हो गया। कथा व्यास राधिका शरण महाराज ने कथा की शुरुआत श्रीमद्भागवत की स्तुति और संकीर्तन से की।
उन्होंने श्री कृष्ण के गिरीराज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर धारण करने की कथा सुनाई तो पंडाल जय श्री कृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इसके बाद कथाव्यास ने रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण वर्णन किया। अर्जुन सुभद्रा विवाह और अभिमन्यु के चक्रव्यूह भेदन की कथा सुनकर श्रद्धालु रोमांचित हो उठे। आखिरी दिन कुब्जा मुक्ति की झांकी निकाली गई, जिसके भावपूर्ण मंचन के बाद कथा व्यास ने प्रत्येक मनुष्य में ईश्वर का स्वरूप देखते हुए गुणों को ग्रहण करने और अवगुणों से बचने की सलाह दी। कथा में प्रदीप शर्मा, सुदीप गुप्ता, आरके गौड़, विनीता शर्मा, आस्था अग्रवाल, अपूर्वा शर्मा प्रताप चंद सेठ और अन्य लोग मौजूद रहे। ब्यूरो
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उन्होंने श्री कृष्ण के गिरीराज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर धारण करने की कथा सुनाई तो पंडाल जय श्री कृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इसके बाद कथाव्यास ने रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण वर्णन किया। अर्जुन सुभद्रा विवाह और अभिमन्यु के चक्रव्यूह भेदन की कथा सुनकर श्रद्धालु रोमांचित हो उठे। आखिरी दिन कुब्जा मुक्ति की झांकी निकाली गई, जिसके भावपूर्ण मंचन के बाद कथा व्यास ने प्रत्येक मनुष्य में ईश्वर का स्वरूप देखते हुए गुणों को ग्रहण करने और अवगुणों से बचने की सलाह दी। कथा में प्रदीप शर्मा, सुदीप गुप्ता, आरके गौड़, विनीता शर्मा, आस्था अग्रवाल, अपूर्वा शर्मा प्रताप चंद सेठ और अन्य लोग मौजूद रहे। ब्यूरो
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