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तीन साल में जहरीली हो चुकी है बरेली की हवा

Wed, 05 Jun 2019 03:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2019 03:09 AM IST
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तीन साल में जहरीली हो चुकी है बरेली की हवा

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बरेली। बीते तीन साल में वाहनों की बढ़ती संख्या से हवा में मिला धुआं और विभिन्न वजहों से रोजाना उड़ती धूल से शहर की हवा जहरीली हो चुकी है। सामान्य की तुलना में बरेली का एयर इंडैक्स दो गुने से भी ज्यादा है। बरेली देश के 13 प्रदूषित शहरों में से एक है। उत्तर प्रदेश में जिन प्रदूषित शहरों का जिक्र आता है, उनमें गाजियाबाद को नंबर एक पर है। बरेली का नंबर वनारस और हापुड़ के बाद चौथा है।
ग्रीन पीस इंडिया (जीपीआई) ने वर्ष 2018 में देश भर में 280 प्रदूषित शहरों की सूची जारी की थी। उसमें उत्तर प्रदेश के 22 शहरों में बरेली 13 वें नंबर पर था। इस रिपोर्ट में पार्टीकुलेट मेटर (पीएम-10) के आंकड़े जुटाए गए थे। मई और जून 2018 में जहां बरेली का औसत पीएम 220 से 222 माइक्रो प्रति घन मीटर था, वहीं नवंबर 2018 में यह सबसे उच्च स्तर पर 444 माइक्रो प्रति घन मीटर पहुंच गया। मतलब, नवंबर 2018 में बरेली देश के बड़े प्रदूषित शहरों में एक हो गया था। हालांकि उसके बाद दिसंबर 2018 में प्रदूषण में कमी आई और उसका पीएम-10 घटकर 295 रह गया। मार्च 2019 में पीएम-10 159.38 और अप्रैल 2019 में 206.67 माइक्रो घन मीटर था, जो सामान्य से दो गुने से अधिक था।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक प्रेमचंद कनौजिया के अनुसार शहर में प्रतिदिन बढ़ते धूल और धुएं के असर और कम होती हरियाली से हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है। किसी खास मौके पर जैसे- दिवाली, अत्याधिक सर्दी पड़ने पर आसमान में धुंध छाने से वायु में सल्फर गैस, नाइट्रोजन के अलावा हवा में एसपीएम (सस्पेटेंड पार्टीकुलेट मेटर) तैरने वाले कणों की मात्रा भी कई गुना बढ़ जाती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के के क्षेत्रीय अधिकारी रोहित रोहित सिंह का कहना है कि पीएम-10 के कण सांस लेेने से पर हमारी नाक के जरिए फेपड़ों में पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं।
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एयर क्वालिटी इंडैक्स की स्थिति
0 से 15 तक बहुत अच्छा
51 से 100 तक संतोषजनक
101 से 200 तक प्रदूषित
201 से 300 तक भारी प्रदूषण
300 से 401 तक खुले में सांस लेने लायक नहीं

दमा, खांसी और स्किन का खतरा
जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता का कहना है कि वायु प्रदूषण से प्रदूषित हवा नाक के जरिए हमारे फेफड़ों तक पहुंचती है। उसे खांसी, दमा और चर्म रोग होने की समस्या रहती है। इनसे बचाव के लिए बाहर निकलते समय मुंह पर मास्क पहना चाहिए। चर्म रोगों से बचने के लिए फुल कपड़े पहनने आवश्यक हैं। सिर भी ढककर चलें तो बेहतर रहता है।
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