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योगी जी! ये सिस्टम तो सरकार पर भारी
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बरेली। योगी जी की सरकार को बने दो साल से ज्यादा हो चुका है। शुरूआती तीन महीने छोड़ दें तो सरकार बनने के बाद से लगातार भाजपा विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के अफसरों से झगड़े हो रहे हैं। कभी अवैध खनन में होने वाली वसूली के बंटवारे को लेकर तो कभी किसी अन्य वजह से। अफसर न तो संगठन और न ही जनप्रतिनिधियों को कुछ समझ रहे हैं। जनप्रतिनिधि भी अपने खास की उल्टी सीधी सिफारिश के लिए किसी से भी भिड़ जाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। न तो माननीयों पर किसी का कंट्रोल है, न ही पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर। पूरी सिस्टम शुरू से ही बेलगाम है। अब स्थिति और भी खराब होती जा रही है।
भाजपा जिला उपाध्यक्ष के खिलाफ रंगदारी का मुकदमा
बहेड़ी/ बरेली। टियूला गांव में किच्छा नदी के अंदर बालू का खनन करने वाले पटटेदार शंकर गुप्ता ने दो दिन पहले जिला भाजपा जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह समेत पांच नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें भाजपा नेताओं पर खनन के बदले हर माह एक लाख रुपये रंगदारी मांगने और न देने पर मारपीट करने, डंपर रोकने, ड्राइवरों से झगड़ा करने और खनन के पटटे वाली जगह हमला करने के आरोप लगाए। पुलिस ने भाजपा जिला उपाध्यक्ष समेत पांच नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ रंगदारी मांगने समेत तमाम धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया। भाजपा विधायक छत्रपाल सिंह को जब भाजपा जिल उपाध्यक्ष समेत कई कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज होने की बात पता चली तो वह भी समर्थकों के साथ थाने पहुंचे और उनकी इंस्पेक्टर से नोकझोंक हुई। विधायक ने इंस्पेक्टर पर अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष और अन्य समर्थकों के साथ बरेली पहुंचकर एडीजी अविनाश चंद्र से मिले और इंस्पेक्टर बहेड़ी को तुरंत पद से हटाने की मांग की।
बहेड़ी के टियूला गांव में उझानी के शंकर गुप्ता व उनके पार्टनर संदीप कुमार गुपता के नाम बालू खनन का पटटा है। उन्होंने तहरीर देकर पुलिस को बताया कि 31 मई की दोपहर भाजपा जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह चौधरी विजय सिंह, प्रेम कुमार, सुरेंद्र, धर्मपाल शर्मा और 15 अज्ञात लोगों ने उनसे कहा कि अगर वह खनन करना चाहते हैं कि हर महीने एक लाख रुपये उनको देने पड़ेंगे। तभी भीकमपुर रोड से ट्रक और डंपरों की निकाल सकते हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार जब उसने रंगदारी देने से इंकार किया तो मोहन सिंह अपने साथियों के साथ दोबारा पहुंचे और मजदूरों और ड्राइवरों से मारपीट की। खनन निकासी का सामान भी फेंक दिया। फैजान और सौरभ जान बचाकर भागे। शंकर गुप्ता की तहरीर पर पुलिस ने मोहन सिंह, विजय सिंह, प्रेम, सुरेंद्र व धर्मपाल शर्मा समेत 15 अज्ञात के खिलाफ रंगदारी मांगने ,मारपीट करने, जान से मारने की धमकी देने और हमला करने का मुकदमा दर्ज कर लिया। उधर रविवार आधी रात को मुकदमा दर्ज होने की खबर भाजपाइयों को पता चली तो वह विधायक को लेकर थाने पहुंचे। यहां भाजपा विधायक, उनके समर्थकों और इंस्पेक्टर के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भाजपाई क्रास मुकदमा लिखाना चाहते थे। इंस्पेक्टर के मना करने पर विधायक उखड़ गए। वह भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर और अपने तमाम समर्थकों के साथ एडीजी से मिलने पहुंचे, जहां भाजपा नेताओं पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाते हुए उनको खत्म करने और इंस्पेक्टर बहेड़ी पर तुरंत कार्रवाई की मांग की गई।
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अवैध खनन पुलिस की मदद से हो रहा है। पुलिस ने मेरे और बाकी गांव वालों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया। हम अवैध खनन के खिलाफ धरने पर बैठे थे। भीकमपुर मार्ग को ओवरलोड रेता ले जाने वाले डंपरों ने तोड़ दिया है। मोहन सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष ।
कौन कितने पानी में हैं ये सब हम अच्छे से जानते हैं । जो नेता रंगदारी मांगने वालों की मदद कर रहे हैं उनके खिलाफ भी मेरे पास पर्याप्त सबूत हैं। अगर हमने वह सबूत रख दिए तो भाजपा हाईकमान को भी जवाब देते नहीं बनेगा। शंकर गुप्ता, खनन पट्टाधारक
31 मार्च को खनन का पट्टा खत्म हो चुका है। पुलिस अब भी पट्टेदार से खनन क्यों करा रही है। सपा-बसपा सरकारों में पुलिस ने लूट की है। भाजपा सरकार में कठिनाई हो रही हे। इसलिए इंस्पेक्टर ने भाजपा के लोगों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए हैं। छत्रपाल गंगवार विधायक बहेड़ी
पहले भी अफसरों से विधायकों के हो चुके हैं विवाद
पुलिस या प्रशासन से भाजपा विधायक का विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार का किसी लाभार्थी को बिजली कनेक्शन दिलाने को लेकर जेई से विवाद हो गया था। उससे नाराज बिजली विभाग के कर्मचारियों ने शहर में कई घंटे का ब्लैक आउट रखा था। भाजपा विधायक और बिजली कर्मियों का विवाद लखनऊ तक पहुंचा था। उसमें कुछ बिजली इंजीनियरों के ट्रांसफर हुए थे। भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर का नगरपालिका चुनाव में वहां के तत्कालीन एसडीएम से विवाद भी काफी चर्चा में रहा था। भाजपा विधायक ने एसडीएम की शिकायत लखनऊ तक की, लेकिन उसके बावजूद एसडीएम नवाबगंज में कई महीनों तक तैनात रहे। वर्ष 2018 में उमरिया से कांवड़ यात्रा निकालने को लेकर बिथरी से भाजपा विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल का एसएसपी से विवाद हो गया था। उसमें भी विधायक और उनके समर्थकों पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इतना ही नहीं, उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एसपी सिटी पुलिस फोर्स लेकर भाजपा विधायक के घर दबिश देने भी पहुंच गए थे। पप्पू भरतौल के मोर्चा खोलने के बाद भी एसएसपी का ट्रांसफर नहीं हो पाया। फरीदपुर विधायक डॉ. श्यामबिहारी लाल का क्षेत्र के एक गांव में सड़क बनाने को लेकर वहां के एक युवक से विवाद भी चर्चा में रहा। सड़क डालने को लेकर विधायक ने विवादित टिप्पणी कर दी थी। बहेड़ी विधायक छत्रपाल गंगवार का इससे पहले एक मेडिकल स्टोर पर छापा डालने को लेकर एफएसडीए टीम से विवाद भी चर्चा में रहा। विधायक मेडिकल स्टोर पर बैठने वाले अपने शिष्य को थाने से जबरदस्ती छुड़ा लाए थे। नवाबगंज विधायक केसर सिंह का भी सड़क की गुणवत्ता को लेकर पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों से विवाद महीनों तक चला। पीडब्ल्यूडी इंजीनियर हड़ताल पर भी चले गए थे। अपनी सरकार में भी भाजपा नेताओं के पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से आए दिन विवाद योगी सरकार की छवि लगातार प्रभावित कर रहे हैं। ब्यूरोक्रेसी पर सरकार का नियंत्रण ढीला होता जा रहा है।
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भाजपा जिला उपाध्यक्ष के खिलाफ रंगदारी का मुकदमा
बहेड़ी/ बरेली। टियूला गांव में किच्छा नदी के अंदर बालू का खनन करने वाले पटटेदार शंकर गुप्ता ने दो दिन पहले जिला भाजपा जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह समेत पांच नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें भाजपा नेताओं पर खनन के बदले हर माह एक लाख रुपये रंगदारी मांगने और न देने पर मारपीट करने, डंपर रोकने, ड्राइवरों से झगड़ा करने और खनन के पटटे वाली जगह हमला करने के आरोप लगाए। पुलिस ने भाजपा जिला उपाध्यक्ष समेत पांच नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ रंगदारी मांगने समेत तमाम धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया। भाजपा विधायक छत्रपाल सिंह को जब भाजपा जिल उपाध्यक्ष समेत कई कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज होने की बात पता चली तो वह भी समर्थकों के साथ थाने पहुंचे और उनकी इंस्पेक्टर से नोकझोंक हुई। विधायक ने इंस्पेक्टर पर अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष और अन्य समर्थकों के साथ बरेली पहुंचकर एडीजी अविनाश चंद्र से मिले और इंस्पेक्टर बहेड़ी को तुरंत पद से हटाने की मांग की।
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बहेड़ी के टियूला गांव में उझानी के शंकर गुप्ता व उनके पार्टनर संदीप कुमार गुपता के नाम बालू खनन का पटटा है। उन्होंने तहरीर देकर पुलिस को बताया कि 31 मई की दोपहर भाजपा जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह चौधरी विजय सिंह, प्रेम कुमार, सुरेंद्र, धर्मपाल शर्मा और 15 अज्ञात लोगों ने उनसे कहा कि अगर वह खनन करना चाहते हैं कि हर महीने एक लाख रुपये उनको देने पड़ेंगे। तभी भीकमपुर रोड से ट्रक और डंपरों की निकाल सकते हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार जब उसने रंगदारी देने से इंकार किया तो मोहन सिंह अपने साथियों के साथ दोबारा पहुंचे और मजदूरों और ड्राइवरों से मारपीट की। खनन निकासी का सामान भी फेंक दिया। फैजान और सौरभ जान बचाकर भागे। शंकर गुप्ता की तहरीर पर पुलिस ने मोहन सिंह, विजय सिंह, प्रेम, सुरेंद्र व धर्मपाल शर्मा समेत 15 अज्ञात के खिलाफ रंगदारी मांगने ,मारपीट करने, जान से मारने की धमकी देने और हमला करने का मुकदमा दर्ज कर लिया। उधर रविवार आधी रात को मुकदमा दर्ज होने की खबर भाजपाइयों को पता चली तो वह विधायक को लेकर थाने पहुंचे। यहां भाजपा विधायक, उनके समर्थकों और इंस्पेक्टर के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भाजपाई क्रास मुकदमा लिखाना चाहते थे। इंस्पेक्टर के मना करने पर विधायक उखड़ गए। वह भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर और अपने तमाम समर्थकों के साथ एडीजी से मिलने पहुंचे, जहां भाजपा नेताओं पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाते हुए उनको खत्म करने और इंस्पेक्टर बहेड़ी पर तुरंत कार्रवाई की मांग की गई।
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अवैध खनन पुलिस की मदद से हो रहा है। पुलिस ने मेरे और बाकी गांव वालों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया। हम अवैध खनन के खिलाफ धरने पर बैठे थे। भीकमपुर मार्ग को ओवरलोड रेता ले जाने वाले डंपरों ने तोड़ दिया है। मोहन सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष ।
कौन कितने पानी में हैं ये सब हम अच्छे से जानते हैं । जो नेता रंगदारी मांगने वालों की मदद कर रहे हैं उनके खिलाफ भी मेरे पास पर्याप्त सबूत हैं। अगर हमने वह सबूत रख दिए तो भाजपा हाईकमान को भी जवाब देते नहीं बनेगा। शंकर गुप्ता, खनन पट्टाधारक
31 मार्च को खनन का पट्टा खत्म हो चुका है। पुलिस अब भी पट्टेदार से खनन क्यों करा रही है। सपा-बसपा सरकारों में पुलिस ने लूट की है। भाजपा सरकार में कठिनाई हो रही हे। इसलिए इंस्पेक्टर ने भाजपा के लोगों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए हैं। छत्रपाल गंगवार विधायक बहेड़ी
पहले भी अफसरों से विधायकों के हो चुके हैं विवाद
पुलिस या प्रशासन से भाजपा विधायक का विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार का किसी लाभार्थी को बिजली कनेक्शन दिलाने को लेकर जेई से विवाद हो गया था। उससे नाराज बिजली विभाग के कर्मचारियों ने शहर में कई घंटे का ब्लैक आउट रखा था। भाजपा विधायक और बिजली कर्मियों का विवाद लखनऊ तक पहुंचा था। उसमें कुछ बिजली इंजीनियरों के ट्रांसफर हुए थे। भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर का नगरपालिका चुनाव में वहां के तत्कालीन एसडीएम से विवाद भी काफी चर्चा में रहा था। भाजपा विधायक ने एसडीएम की शिकायत लखनऊ तक की, लेकिन उसके बावजूद एसडीएम नवाबगंज में कई महीनों तक तैनात रहे। वर्ष 2018 में उमरिया से कांवड़ यात्रा निकालने को लेकर बिथरी से भाजपा विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल का एसएसपी से विवाद हो गया था। उसमें भी विधायक और उनके समर्थकों पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इतना ही नहीं, उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एसपी सिटी पुलिस फोर्स लेकर भाजपा विधायक के घर दबिश देने भी पहुंच गए थे। पप्पू भरतौल के मोर्चा खोलने के बाद भी एसएसपी का ट्रांसफर नहीं हो पाया। फरीदपुर विधायक डॉ. श्यामबिहारी लाल का क्षेत्र के एक गांव में सड़क बनाने को लेकर वहां के एक युवक से विवाद भी चर्चा में रहा। सड़क डालने को लेकर विधायक ने विवादित टिप्पणी कर दी थी। बहेड़ी विधायक छत्रपाल गंगवार का इससे पहले एक मेडिकल स्टोर पर छापा डालने को लेकर एफएसडीए टीम से विवाद भी चर्चा में रहा। विधायक मेडिकल स्टोर पर बैठने वाले अपने शिष्य को थाने से जबरदस्ती छुड़ा लाए थे। नवाबगंज विधायक केसर सिंह का भी सड़क की गुणवत्ता को लेकर पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों से विवाद महीनों तक चला। पीडब्ल्यूडी इंजीनियर हड़ताल पर भी चले गए थे। अपनी सरकार में भी भाजपा नेताओं के पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से आए दिन विवाद योगी सरकार की छवि लगातार प्रभावित कर रहे हैं। ब्यूरोक्रेसी पर सरकार का नियंत्रण ढीला होता जा रहा है।