{"_id":"5ceee2f8bdec220709710a90","slug":"15591595927-bareilly-news88","type":"story","status":"publish","title_hn":"..और इस मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के मिल रहे हैं दो सौ रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
..और इस मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के मिल रहे हैं दो सौ रुपये
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। वैसे तो शहर के तमाम अस्पताल रोगियों की जेबें खाली कराने के मामलों में अक्सर घिरते रहे हैं लेकिन पीलीभीत रोड पर एक मेडिकल कॉलेज कई दिनों से अपने यहां भर्ती होने वालों को उल्टा पैसा दे रहा है। चाहे कोई रोगी हो या निरोगी. मेडिकल कॉलेज में सिर्फ एक दिन के लिए भर्ती होने के लिए उसे दो सौ से तीन सौ रुपये तक दिए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की बसें गांव-गांव ऐसे लोगों को तलाश करती घूम रही हैं जो वहां भर्ती होने को तैयार हों। सिर्फ एक दिन भर्ती करने के बाद ये बसें लोगों को वापस उनके गांव भी छोड़कर आ रही हैं।
दरअसल नियमानुसार मेडिकल कॉलेजों में जितने बेड का अस्पताल होता है, उससे आधे रोगी भर्ती होने जरूरी होते हैं। इसी आधार पर उनका एमसीआई से रिन्युवल हो पाता है। मरीजों की संख्या कम होने पर बेड घटा दिए जाते हैं। मेडिकल कॉलेज इसी वजह से बिना रोग के लोगों को भर्ती करने का खेल करते हैं। गांव बकैनिया के एक ग्रामीण ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से उनके गांव में कुछ लोग सुबह आए थे। उन्होंने गांव के ही दो युवकों को सेट किया कि वह और लोगों से बात कर उन्हें मेडिकल कॉलेज में एक दिन को भर्ती होने के लिए राजी करें। जो लोग वहां जाएंगे उन्हें दो सौ रुपये एक रात रुकने के दिए जाएंगे। खाना-पानी भी मुफ्त मिलेगा। जाने और छोड़ने के लिए बस आएगी। गांव के करीब 150 लोगो ंके इसके लिए राजी होने के बाद बस से उन्हें भरकर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। एक रात रुकने के बाद दूसरे दिन शाम को गांव छुड़वा दिया गया। सभी को पैसे भी दे दिए गए। ऐसा ही आसपास के दूसरे गांवों में भी हो रहा है। गांव काशीधरमपुर, तितरा, बीजामऊ, आठपुर आदि गांव में भी मेडिकल कॉलेज की बसें पहुंच रही हैं। बकैनिया से अब तक तीन बसें ग्रामीणों मेडिकल कालेज ले जा चुकी हैं। मामला तब बिगड़ा जब एक ग्रामीण ने अस्पताल के इस काम की सूचना डायल 100 पर आरिफ नाम से दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की लेकिन कहीं कोई विरोध सामने नहीं आया तो राजी का सौदा बताकर लौट गई। --
विज्ञापन
दरअसल नियमानुसार मेडिकल कॉलेजों में जितने बेड का अस्पताल होता है, उससे आधे रोगी भर्ती होने जरूरी होते हैं। इसी आधार पर उनका एमसीआई से रिन्युवल हो पाता है। मरीजों की संख्या कम होने पर बेड घटा दिए जाते हैं। मेडिकल कॉलेज इसी वजह से बिना रोग के लोगों को भर्ती करने का खेल करते हैं। गांव बकैनिया के एक ग्रामीण ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से उनके गांव में कुछ लोग सुबह आए थे। उन्होंने गांव के ही दो युवकों को सेट किया कि वह और लोगों से बात कर उन्हें मेडिकल कॉलेज में एक दिन को भर्ती होने के लिए राजी करें। जो लोग वहां जाएंगे उन्हें दो सौ रुपये एक रात रुकने के दिए जाएंगे। खाना-पानी भी मुफ्त मिलेगा। जाने और छोड़ने के लिए बस आएगी। गांव के करीब 150 लोगो ंके इसके लिए राजी होने के बाद बस से उन्हें भरकर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। एक रात रुकने के बाद दूसरे दिन शाम को गांव छुड़वा दिया गया। सभी को पैसे भी दे दिए गए। ऐसा ही आसपास के दूसरे गांवों में भी हो रहा है। गांव काशीधरमपुर, तितरा, बीजामऊ, आठपुर आदि गांव में भी मेडिकल कॉलेज की बसें पहुंच रही हैं। बकैनिया से अब तक तीन बसें ग्रामीणों मेडिकल कालेज ले जा चुकी हैं। मामला तब बिगड़ा जब एक ग्रामीण ने अस्पताल के इस काम की सूचना डायल 100 पर आरिफ नाम से दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की लेकिन कहीं कोई विरोध सामने नहीं आया तो राजी का सौदा बताकर लौट गई। --
विज्ञापन