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हार के कारणों पर भी एकराय नहीं कांग्रेसी
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बरेली। बरेली और आंवला सीटों पर हारने का इतना गम नहीं है लेकिन देश भर में हुई भारी पराजय ने कांग्रेसियों को बुरी तरह हक्का-बक्का कर दिया है। फिलहाल इस पराजय का कारण तो कोई नहीं समझ पा रहा है लेकिन कांग्रेस के प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस पर मंथन करने में जरूर डूब गए हैं। कांग्रेस के भविष्य को लेकर मन में उठ रहे सवाल उनकी बेचैनी का कारण बने हुए हैं।
पता था कि ऐसे ही नतीजे आएंगे
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और इस चुनाव में प्रत्याशी रहे प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि जो जनादेश आया है, उसका वह सम्मान करते हैं। हालांकि भाजपा ने जैसे हालात बनाए थे, उससे साफ था कि यही नतीजे आएंगे। भाजपा की यह जीत अंतरराष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय ताकतों का भी एक हिस्सा है क्योंकि विदेशी ताकतें भारतीय अर्थ व्यवस्था और राजनैतिक फैसलों को तेजी से अपने हाथों में लेती जा रही हैं। इस लोकसभा चुनाव में भी यह साफ दिखा। कांग्रेस को अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए इस सच्चाई को गली-मोहल्ले तक पहुंचाना होगा। लेकिन इसके साथ कांग्रेस संगठन अपनी खामियां भी तलाश करेगा।
आईटी सेल को मजबूत करे कांग्रेस
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामदेव पांडे ने कहा कि कांग्रेस संगठन आईटी सिस्टम पर ध्यान देने में चूक गया। भाजपा को उम्मीद से ज्यादा बहुमत मिलना और पहले से जीत का प्रचार होना कहीं कुछ संकेत भी करते हैं। इसके साथ संगठन को अब विपक्षी पार्टियाें के साथ मिलकर मंथन कर भारी पराजय के कारण तलाशने चाहिए। संगठन के बाहर और भीतर जो भी खामियां हैं, उन्हें प्राथमिकता से दूर किया जाए।
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हम अपनी बात लोगों तक नहीं पहुंचा पाए
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सदस्य प्रेमप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस लोगाें तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाई। यह भ्रम चुनाव में भारी पड़ा। हमें इससे सबक लेकर नए सिरे से संगठन में समीक्षा करनी होगी। अधिक सजगता और कार्यकर्ता सम्मान भी जरूरी है। चुनाव प्रचार में प्रियंका देर से आईं। हमें आत्ममंथन के साथ और मजबूती खड़ा होना होगा।
पब्लिक ने नहीं साजिश ने हराया
शहर अध्यक्ष चौधरी असलम मियां ने कहा कि चुनाव में कांग्रेस को पब्लिक नहीं, साजिश ने हराया है। जैसा पहले एग्जिट पोल से प्रचार किया गया, बाद में परिणाम भी वैसे ही आए। चुनाव में सांप्रदायिक ताकतें हावी रहीं। अब संगठन 2022 के चुनाव की तैयारी में जुटेगा। राहुल गांधी से आग्रह किया है कि वह पद पर बने रहें। संगठन को अधिक मजबूत होना चाहिए।
कांग्रेस संगठन के लिए आत्ममंथन का वक्त
बरिष्ठ कांग्रेसी और पिछले विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे नवाब मुजाहिद हसन खां ने कहा कि जो जनादेश आया है, उसे स्वीकार करना होगा। संगठन निचले स्तर पर आत्ममंथन करे और अपनी खामियां तलाशे। बड़े नेता आते हैं और कुछ स्थानों पर घूमकर चले जाते हैं, जबकि उन्हें सभी इलाकों में स्थिति देखनी चाहिए। अब हर बूथ पर संगठन मजबूत किया जाए।
आक्रामक रणनीति बनाना भूली कांग्रेस
पीसीसी सदस्य कौशल अग्रवाल ने कहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेश स्तर पर नीचे तक संगठन की समीक्षा कराए, जुझारू कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाए। शीर्ष नेता आक्रामक शैली अपनाएं और निचले स्तर तक कांग्रेस अपनी नीतियां और नियम पहुंचाए। कांग्रेस आज भी लोगों में लोकप्रिय है, लेकिन संगठनात्मक खामियाें के चलते ही चुनाव में पिछड़ रहे हैं।
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पता था कि ऐसे ही नतीजे आएंगे
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और इस चुनाव में प्रत्याशी रहे प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि जो जनादेश आया है, उसका वह सम्मान करते हैं। हालांकि भाजपा ने जैसे हालात बनाए थे, उससे साफ था कि यही नतीजे आएंगे। भाजपा की यह जीत अंतरराष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय ताकतों का भी एक हिस्सा है क्योंकि विदेशी ताकतें भारतीय अर्थ व्यवस्था और राजनैतिक फैसलों को तेजी से अपने हाथों में लेती जा रही हैं। इस लोकसभा चुनाव में भी यह साफ दिखा। कांग्रेस को अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए इस सच्चाई को गली-मोहल्ले तक पहुंचाना होगा। लेकिन इसके साथ कांग्रेस संगठन अपनी खामियां भी तलाश करेगा।
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आईटी सेल को मजबूत करे कांग्रेस
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामदेव पांडे ने कहा कि कांग्रेस संगठन आईटी सिस्टम पर ध्यान देने में चूक गया। भाजपा को उम्मीद से ज्यादा बहुमत मिलना और पहले से जीत का प्रचार होना कहीं कुछ संकेत भी करते हैं। इसके साथ संगठन को अब विपक्षी पार्टियाें के साथ मिलकर मंथन कर भारी पराजय के कारण तलाशने चाहिए। संगठन के बाहर और भीतर जो भी खामियां हैं, उन्हें प्राथमिकता से दूर किया जाए।
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हम अपनी बात लोगों तक नहीं पहुंचा पाए
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सदस्य प्रेमप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस लोगाें तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाई। यह भ्रम चुनाव में भारी पड़ा। हमें इससे सबक लेकर नए सिरे से संगठन में समीक्षा करनी होगी। अधिक सजगता और कार्यकर्ता सम्मान भी जरूरी है। चुनाव प्रचार में प्रियंका देर से आईं। हमें आत्ममंथन के साथ और मजबूती खड़ा होना होगा।
पब्लिक ने नहीं साजिश ने हराया
शहर अध्यक्ष चौधरी असलम मियां ने कहा कि चुनाव में कांग्रेस को पब्लिक नहीं, साजिश ने हराया है। जैसा पहले एग्जिट पोल से प्रचार किया गया, बाद में परिणाम भी वैसे ही आए। चुनाव में सांप्रदायिक ताकतें हावी रहीं। अब संगठन 2022 के चुनाव की तैयारी में जुटेगा। राहुल गांधी से आग्रह किया है कि वह पद पर बने रहें। संगठन को अधिक मजबूत होना चाहिए।
कांग्रेस संगठन के लिए आत्ममंथन का वक्त
बरिष्ठ कांग्रेसी और पिछले विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे नवाब मुजाहिद हसन खां ने कहा कि जो जनादेश आया है, उसे स्वीकार करना होगा। संगठन निचले स्तर पर आत्ममंथन करे और अपनी खामियां तलाशे। बड़े नेता आते हैं और कुछ स्थानों पर घूमकर चले जाते हैं, जबकि उन्हें सभी इलाकों में स्थिति देखनी चाहिए। अब हर बूथ पर संगठन मजबूत किया जाए।
आक्रामक रणनीति बनाना भूली कांग्रेस
पीसीसी सदस्य कौशल अग्रवाल ने कहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेश स्तर पर नीचे तक संगठन की समीक्षा कराए, जुझारू कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाए। शीर्ष नेता आक्रामक शैली अपनाएं और निचले स्तर तक कांग्रेस अपनी नीतियां और नियम पहुंचाए। कांग्रेस आज भी लोगों में लोकप्रिय है, लेकिन संगठनात्मक खामियाें के चलते ही चुनाव में पिछड़ रहे हैं।